गजब है सीकर की कोटा बनने की कहानी, तीन दशक में बन गई 3 हजार करोड़ की कोचिंग इंडस्ट्री, पढ़ें पूरा सफर

Last Updated:May 15, 2026, 15:13 IST
Sikar News : NEET UG Exam 2026 का पेपर लीक होने के बाद राजस्थान की दूसरी बड़ी कोचिंग सिटी सीकर देशभर में चर्चा में है. वजह है पेपर लीक केस के तार सीकर से जुड़ना. सीकर में कोचिंग का सफर करीब तीन दशक पुराना है. इन तीन दशक में सीकर देशभर में छा गया. वह राजस्थान की कोचिंग सिटी कोटा को टक्कर देने लग गया. आज सीकर को करीब 3 हजार करोड़ रुपये की कोचिंग इंस्डस्ट्री माना जाता है. जानें किसने की थी सीकर में कोचिंग की शुरुआत. कैसे यह सफर आगे बढ़ा?सीकर में अब चारों तरफ कोचिंग सेंटर्स के ही होर्डिंग्स नजर आते हैं.
सीकर. राजस्थान का कोटा शहर कोचिंग सिटी के नाम से देशभर में ख्याति अर्जित कर चुका है. उसके बाद राजस्थान का दूसरा शहर सीकर उसी राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है. यहां की कोचिंग इंडस्ट्री भी अब हजारों करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है. कोटा की तर्ज पर सीकर में भी आज 18 से 20 राज्यों के स्टूडेंड्स मेडिकल (NEET) और इंजीनिरिंग (JEE) प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने के लिए आते हैं. कोचिंग के साथ ही यहां स्कूल और कॉलेज का बड़ा जाल बिछ चुका है. वहीं पीजी और होस्टल इंडस्ट्री भी बूम पकड़ रही है. हाल ही में नीट पेपर लीक केस में सीकर का नाम सामने आने के बाद यह एक बार फिर से देशभर में सुर्खियों में छाया हुआ है.
सीकर राजस्थान के शेखावाटी इलाके का सबसे बड़ा जिला है. महाराव शेखाजी से शेखावाटी के नाम से मशहूर हुआ यह क्षेत्र आज राजस्थान ही नहीं बल्कि देशभर में शिक्षा, सेना और राजनीति के क्षेत्र में अव्वल है. शेखावाटी में तीन जिले के आते हैं. इनमें सीकर, चूरू और झुंझुनूं शामिल है. शेखावाटी का यह क्षेत्र देश सेवा के लिए भी पूरे देश में प्रसिद्ध है. यहां के बांके जवान देश सेवा के लिए बॉर्डर पर मर मिटने के लिए हरदम तैयार रहते हैं. शेखावाटी के तीन जिलों में से झुंझुनूं और सीकर शिक्षा के क्षेत्र में देशभर में अग्रणी माने जाते हैं. किसी समय राजस्थान बोर्ड की दसवीं कक्षा और 12वीं की तीनों स्ट्रीम साइंस,आर्टस तथा कॉमर्स की मैरिट में केवल सीकर और झुंझुनूं से ही सबसे ज्यादा बच्चे आते थे यह सिलसिला बरसों चला. इस पर कई बार शंका भी जताई गई थी. अब सीकर ने कोचिंग के मामले में भी पूरे देश में अपनी धाक जमा ली है.
1996 में रखी गई थी सीकर में कोचिंग की नींव
सीकर में कोचिंग इंडस्ट्री का सफर करीब तीन दशक पुराना है. यहां पर कोचिंग इंडस्ट्री की शुरुआत करने का श्रेय मोटे तौर पर सीएलसी के संस्थापक इंजीनियर श्रवण चौधरी को जाता है. सीकर के छोटे से गांव चेलासी से निकले श्रवण को कोटा कोचिंग की सफलता खटकती थी. बस इसी खटक के चलते श्रवण चौधरी ने सीकर में कोचिंग को आगे बढ़ाने की ठानी. कोटा को चैलेंज करने के लिए 1996 में बेहद छोटे स्तर पर सीएलसी की नींव रखी गई. साल दर साल मिली सफलता के बाद सीकर का नाम राजस्थान में चर्चा में आने लगा. उसके बाद सीकर में कोचिंग एक इंडस्ट्र्री के रूप में आगे बढ़ने लगी. करीब दस साल तक कोचिंग के क्षेत्र में सीएलसी ने एकछत्र राज किया.
2007 में सीकर में गुरुकृपा कोचिंग सेंटर का उदय हुआउसके बाद कोटा में चलने वाली कई कोचिंग सेंटर्स की यहां ब्रांच खुलनी शुरू हुई. इनमें दासवानी क्लासेज, बंसल क्लासेज, करियर कोचिंग समेत कई बड़े नाम यहां आए. लेकिन वे यहां उतने सक्सेस नहीं हो पाए. उसके बाद साल 2007 में सीकर में गुरुकृपा कोचिंग सेंटर का उदय हुआ. चूंकि तब तक सीकर में कोचिंग का पैटर्न सैट हो गया था. कोचिंग की थीम, उसके फायदे और अन्य चीजों से स्टूडेंट्स के साथ ही अभिभावक भी समझ चुके थे. लिहाजा गुरुकृपा ने मैदान में कदम रखते ही उसने सीएलसी को टक्कर देना शुरू कर दिया. इसी बीच स्कूल से आगे बढ़ते हुए प्रिंस ग्रुप ने भी कोचिंग के फील्ड में कदम रख दिया और उसने यहां प्रिंस एजुकेशन हब ही बना डाला. उसके बाद यह सिलसिला बदस्तूर आगे बढ़ता गया और आज छोटे-बड़े करीब डेढ़ दर्जन कोचिंग संस्थान सीकर में अपने पैर जमा चुके हैं. आज पूरा शहर साल भर बच्चों की उपलब्धियों वाले होर्डिंग्स से अटा हुआ रहता है.
डिफेंस सर्विस के लिए भी बड़ा कोचिग हब हैकोटा और सीकर की कोचिंग इंडस्ट्री में एक बड़ा अंतर यह है सीकर में केवल मेडिकल और इंजनीनियरिंग के प्रवेश परीक्षा की कोचिंग नहीं होती है बल्कि यहां हर तरह की नौकरियों के लिए कोचिंग उपलब्ध है. सीकर मेडिकल और इंजीनियरिंग के अलावा डिफेंस सर्विस के लिए भी बड़ा कोचिग हब है. चूंकि यहां के युवाओं का पहला सपना सेना में जाने का होता है. लिहाजा कोचिंग सेंटर्स ने युवाओं के इस जज्बे को भांप लिया और यहां डिफेंस से जुड़ी नौकरियों की भी एजुकेशनल कोचिंग और फिजीकल ट्रेनिंग शुरू कर दी. आज देशभर के बच्चे मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए सीकर आते हैं. कोचिंग के कारण सीकर की अर्थव्यवस्था का बूस्टर डोज मिल गया है. सीकर को जोड़ने वाले सभी सड़क मार्गों पर कोचिंग के जरिये सफलता पाने वाले बच्चों के होर्डिंग यह बताने के लिए काफी है कि आप कोचिंग सिटी के पास आ गए हैं.
यहां बच्चों को प्रोफेशनली तरीके से नहीं बल्कि इमोशन के साथ पढ़ाते हैंसीकर के कोचिंग के सफर को लेकर यहां के विद्या भारती समूह के निदेशक शिक्षाविद् डॉ. बलवंत सिंह चिराणा कहते हैं कि कोटा और सीकर की कोचिंग में एक बड़ा फर्क है. यहां की सफलता का राज कोचिंग सेंटर्स में पढ़ाने वाले टीचर्स की मेहनत है. यहां कोटा की तरह स्थापित बड़े ब्रांड नहीं है. सीकर में जिन्होंने भी कोचिंग की जड़ें जमाई है वे गांव गुवाड़ से निकले मेहनती युवा हैं. वे यहां बच्चों को प्रोफेशनली तरीके से नहीं बल्कि इमोशन के साथ पढ़ाते हैं. उनमें सीकर का नाम ऊपर करने का जज्बा है. इसी जज्बे ने सीकर को कोचिंग की इन ऊंचाइयों तक पहुंचाया है.
करीब तीन हजार करोड़ की कोचिंग इंडस्ट्री है सीकरसीकर को देशभर के स्टूडेंट्स से मिले रेस्पॉस के कारण आज यहां बहुमंजिला कोचिंग सेंटर्स ने शहर की फिजां बदल दी है. शहर की पिपराली रोड़, नवलगढ़ रोड़ और सीकर बाईपास पूरी तरह से कोचिंग सेंटर्स और हॉस्टल से भर गया है. मोटे अनुमान के अनुसार सीकर को करीब तीन हजार करोड़ की कोचिंग इंडस्ट्री माना जाता है. करीब 20 से 25 हजार परिवारों की आजीविका कोचिंग और इससे जुड़े अन्य काम धंधों से जुड़ा है. यहां अब 500 से ज्यादा हॉस्टल और पीजी खुल चुके हैं. यहां करीब एक लाख से ज्यादा बच्चे कोचिंग और स्कूल एजुकेशन के लिए आ रहे हैं. अकेले शहर में छोटे-बड़े करीब 400 प्राइवेट स्कूल हैं. पूरे जिले में इनकी संख्या करीब दो हजार तक मानी जाती है. कोचिंग इंडस्ट्री बन जाने से यहां जमीनों के भाव आसमान को छू लग गए हैं.
About the AuthorSandeep Rathore
संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…और पढ़ें
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