52 की उम्र में दुनिया को चौंकाया, 78 देशों को दी टक्कर, अलवर की सुमन ने वर्ल्ड योगासन में जीता सिल्वर

अलवर: राजस्थान के अलवर की रहने वाली सुमन यादव ने 52 साल की उम्र में पहली बार आयोजित हुई ‘वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप’ में तिरंगा लहराकर देश का नाम रोशन किया है. इस वैश्विक प्रतियोगिता में सुमन ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक अपने नाम किया. आज वे देश की लाखों महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरी हैं. देश में महिलाएं अब हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं. अलवर में योग फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में सुमन यादव ने शानदार प्रदर्शन किया. सुमन ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2019 में योग की शुरुआत की थी.
समय के साथ योगासन के प्रति उनकी रुचि बढ़ती गई और उन्होंने विभिन्न योगासन प्रतियोगिताओं में लगातार भाग लेना शुरू किया. अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल की और जिले का नाम रोशन किया. अलवर की सुमन यादव ने योग के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए विश्व स्तर पर देश का नाम रोशन किया है. 52 वर्ष की आयु में उन्होंने विश्व योगासन चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और निरंतर अभ्यास के बल पर किसी भी उम्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं.
2015 में योग सफर की हुई थी शुरूआत
सुमन यादव ने बताया कि उनके योग सफर की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई. बच्चों की शिक्षा के लिए वह कोटा गई थीं, जहां उन्होंने पार्कों में लोगों को योग करते देखा. इससे प्रेरित होकर उन्होंने कोटा के वृंदावन पार्क में नियमित योगाभ्यास शुरू किया. शुरुआत में उनका उद्देश्य केवल स्वस्थ रहना था, लेकिन धीरे-धीरे योग के प्रति उनकी रुचि बढ़ती गई. उन्होंने न केवल स्वयं अभ्यास किया, बल्कि अन्य लोगों को भी योग सिखाना शुरू किया. शिक्षा विभाग से जुड़ने के बाद उन्होंने बालिकाओं और शिक्षिकाओं को सेल्फ डिफेंस तथा योग का प्रशिक्षण भी दिया. लगातार अभ्यास करते हुए उन्होंने योग की बारीकियों को सीखा और वर्ष 2019 में पहली बार योग प्रतियोगिताओं में भाग लिया.
2020 में राष्ट्रीय स्तर पर टॉप-6 खिलाड़ियों में शामिल हुईं
पहली ही प्रतियोगिता में राज्य स्तर पर प्रथम स्थान हासिल किया. इसके बाद राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई और टॉप-10 में स्थान प्राप्त किया. वर्ष 2020 में वह राष्ट्रीय स्तर पर टॉप-6 खिलाड़ियों में शामिल हुईं और इसके बाद लगातार कई वर्षों तक इस उपलब्धि को कायम रखा. सुमन यादव ने बताया कि भारत सरकार द्वारा आयोजित योगासन भारत प्रतियोगिता में उन्होंने बहरोड़ से जिला स्तर पर भाग लिया.
इसके बाद उदयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया. विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी उन्होंने पहला स्थान हासिल किया. इसके बाद खेल मंत्रालय द्वारा चुने गए शीर्ष तीन खिलाड़ियों में उनका चयन हुआ और उन्हें भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला. विश्व योगासन प्रतियोगिता में भाग लेते हुए उन्होंने तीसरा स्थान प्राप्त किया.
सरकारी स्कूल की शिक्षिका हैं सुमन यादव
हाल ही में गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित विश्व योगासन चैंपियनशिप में दुनिया के 78 देशों के 522 खिलाड़ियों ने भाग लिया. 45 से 55 वर्ष आयु वर्ग में 20 देशों के खिलाड़ियों के बीच सुमन यादव ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता. उन्होंने बताया कि अधिकांश प्रतियोगी उनसे कम उम्र के थे, लेकिन कड़े मुकाबले के बावजूद उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया. सुमन यादव एक सरकारी स्कूल में पीटीआई शिक्षिका हैं. वह प्रतिदिन सुबह 5 बजे उठकर अभ्यास करती थीं, स्कूल की जिम्मेदारियां निभाने के बाद घर के कार्यों के साथ शाम को दो से तीन घंटे योग का अभ्यास करती थीं.
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने पति और बच्चों को दिया, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया. सुमन कहती हैं कि उनका सपना विश्व योगासन चैंपियनशिप जीतना था और आज उनके हाथ में मौजूद रजत पदक उसी संकल्प और मेहनत का परिणाम है.



