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वो देश, जो बताता है कि एग्जाम के दिन सिस्टम कैसे काम करता है – नो ट्रैफिक, नो आफिस, सबकी छुट्टी

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वो देश जो बताता है कि एग्जाम के दिन सिस्टम कैसे काम करता है – थम जाता है देश

Last Updated:June 22, 2026, 16:25 IST

ये केवल एक एग्जाम नहीं है, बल्कि ये उस देश में एक ऐसा राष्ट्रीय त्योहार या ‘महा-इवेंट’ है जो उस दिन के लिए पूरे देश की रफ्तार को धीमा कर देता है. बस सबकी कोशिश होती है कि स्टूडेंट्स सही समय पर एग्जाम सेंटर पहुंच सकें और अच्छी तरह एग्जाम दे सकें. इस 8-9 घंटे के एग्जाम से तय होता है कि छात्र को कौन सा कॉलेज मिलेगा, कैसी नौकरी मिलेगी, यहां तक कि उसका सामाजिक स्टेटस क्या होगा.

देश में 21 जून को पूरे देश में फिर से नीट के एग्जाम हुए. लेकिन कुछ बच्चे एग्जाम सेंटर तक नहीं पहुंच पाए. थोड़ी देरी से पहुंचने की वजह वो बच्चे एग्जाम नहीं दे सके. इन बच्चों के वीडियो खूब वायरल हुए.  क्या आपको मालूम है कि एक देश ऐसा भी है, जहां एक खास एग्जाम के दिन सड़कों पर ट्रैफिक बिल्कुल बंद कर दिया जाता है. बाजार बंद हो जाते हैं. आफिसों की छुट्टी कर दी जाती है, पूरे देश में सन्नाटा फैल जाता है. जिससे परीक्षा देने वाले बच्चे आसानी से और सही समय पर एग्जाम सेंटर तक पहुंच सकें. (AI Photo)

उस दिन रोड पर कतई अनावश्यक वाहन नहीं दौड़ सकते, विमान कुछ समय के लिए रोक दिए जाते हैं. सैन्‍य प्रशिक्षण पर भी रोक रहती है. शेयर बाजार उस समय बंद रखे जाते हैं, एग्जाम के बाद देरी से खुलते हैं. सारा जोर स्टूडेंट्स को एग्जाम सेंटर पर सही समय पर पहुंचने और पहुंचाने के लिए होता है. एग्जाम नवंबर में होता है. इस दिन सड़कों पर सिर्फ स्‍टूडेंट्स ही नजर आते हैं. (AI Photo)

इस देश का नाम साउथ कोरिया है. जहां ये एग्जाम इस देश में खासा अहम माना जाता है, ये करीब 8 घंटे का होता है, माना जाता है कि इस एग्जाम से ही उस देश में बच्चों का भविष्य पक्का हो जाता है. इस देश का नाम साउथ कोरिया. ये एग्जाम हर साल नवंबर में होता है. एग्जाम का नाम है सुनेउंग. दरअसल, सुनेउंग कोरियाई भाषा में होने वाले कॉलेज स्‍कोलास्टिक एबिलिटी टेस्‍ट यानी सीएसएटी या सी-सैट को कहते हैं. इस परीक्षा में हर साल लाखों स्‍टूडेंट्स हिस्‍सा लेते हैं. (AI Photo)

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इस परीक्षा से तय होता है कि स्‍टूडेंट यूनिवर्सिटी जाएगा या नहीं. साथ ही इसी परीक्षा से उनकी नौकरी की संभावनाओं पर भी असर पड़ सकता है. इसी परीक्षा से तय होता है कि उनकी आय कितनी होगी और वे कहां रहेंगे. सुनेउंग स्टूडेंट्स के भविष्‍य के लिए सबसे अहम परीक्षा है. पुलिस वाहन भी परीक्षा में देर से आने वाले छात्रों को जल्‍द से जल्‍द परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने के लिए सायरन बजाते हुए सड़क से गुजरते हैं. ये परीक्षा सुबह 8 बजकर 40 मिनट पर शुरू हो जाती है. (AI Photo)

दक्षिण कोरिया में सुनेउंग के दिन हर तरफ शांति का माहौल इसलिए बनाया जाता है ताकि परीक्षा दे रहे स्‍टूडेंट्स का ध्‍यान भंग ना हो सके. वो सही समय पर परीक्षा पर पहुंचे. सुनेउंग के लिए पेपर्स तैयार करने की प्रक्रिया भी काफी रहस्यमयी है. हर साल सितंबर में पूरे दक्षिण कोरिया से करीब 500 टीचर्स का चयन किया जाता है. (AI Photo)

सुनेयुंग एग्जाम में पेपर सेटर्स को गैंगवॉन के पहाड़ी प्रांत में एक गुप्त स्थान पर ले जाया जाता है. एक महीने के लिए उनके फोन जब्त कर लिए जाते हैं. उनके बाहरी दुनिया से किसी भी तरह के संपर्क पर पाबंदी लगा दी जाती है. एक महीने तक उन्हें बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाती है. यहां तक वे अपने परिवार से भी संपर्क नहीं कर सकते हैं. कुल मिलाकर इस मैराथन परीक्षा का पेपर बहुत ही गोपनीय तरीके से बनाया जाता है ताकि उसका एक भी सवाल लीक ना हो सके. (AI Photo)

जिस पहाड़ी कैंपस में पेपर सेटर्स को रखा जाता है, उस पूरे परिसर की निगरानी साउथ कोरिया की नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस यानी वहां की खुफिया एजेंसी करती है. वहां से कचरा भी बाहर जाने से पहले चेक होता है. (AI Photo)

दोपहर में जब इंग्लिश का लिसनिंग टेस्ट चल रहा होता है, उस 25-35 मिनट के दौरान पूरे देश में हवाई जहाजों के टेक-ऑफ और लैंडिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी जाती है. जो विमान हवा में होते हैं, उन्हें 10,000 फीट की ऊंचाई पर ही होल्ड करके रखा जाता है ताकि उनके इंजन की आवाज से बच्चों का ध्यान न भटके. परीक्षा केंद्रों के आसपास से गुजरने वाली ट्रेनों और गाड़ियों को हॉर्न बजाने की मनाही होती है। यहाँ तक कि मिलिट्री अपनी लाइव-फायर ड्रिल और ट्रेनिंग भी रोक देती है. (AI Photo)

आधिकारिक तौर पर हर स्‍टूडेंट का व्यक्तिगत स्कोर परीक्षा के एक महीने बाद एक राष्ट्रीय वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाता है.दक्षिण कोरिया दुनिया में सबसे अधिक शिक्षित आबादी वाले देशों में से एक है. वहां अच्छी यूनिवर्सिटीज में दाखिला बहुत मुश्किल होता जा रहा है. यही नहीं मनपसंद पढ़ाई में भी बहुत मुश्किल से ही एडमिशन मिल पाता है, क्योंकि कंपटीशन का स्तर बहुत ऊंचा है. (AI Photo)

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