जहां तैरती थीं नावें, वहां अब 200 मीटर तक दिख रही है सूखी जमीन… समंदर अचानक पीछे क्यों जा रहा है?

तारीख 8 जून 2026, सुबह का वक्त. फिलीपींस के मिंडानावो में बच्चे स्कूल के पहले दिन की तैयारियों में जुटे थे कि तभी अचानक धरती का सीना 7.8 तीव्रता के भीषण भूकंप से दहल उठा. विनाश के उस खौफनाक मंजर के ठीक दो दिन बाद जब तटीय इलाकों के लोग समंदर किनारे पहुंचे तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं. सदियों से हिलोरे मारता समंदर अपनी जगह से अचानक गायब हो चुका था. पानी करीब 200 मीटर पीछे खिसक गया था और जहां कभी नावें तैरती थीं, वहां अब सूखी जमीन और सदियों पुराने कोरल रीफ तड़प रहे थे. ऐसा लग रहा था मानो कुदरत ने पलक झपकते ही धरती का पूरा नक्शा बदल दिया हो. आखिर समंदर के इस तरह गायब होने के पीछे का रहस्य क्या है?
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, समुद्र तट (तटरेखा) करीब 200 मीटर तक आगे बढ़ गया है. जहां कभी गहरा पानी हुआ करता था, वहां अब सूखी जमीन, समुद्री घास और विशाल मूंगे की चट्टानें (कोरल रीफ) साफ नजर आ रही हैं. वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह भूवैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसे कोस्टल अपलिफ्ट (तटीय उत्थान) कहा जाता है. भूकंप के शक्तिशाली दबाव के कारण समंदर की सतह और जमीन अचानक ऊपर की तरफ उठ गई है, जिससे तट का यह हिस्सा अब हमेशा के लिए बदल गया है.
भूवैज्ञानिक घटना से जुड़ी 5 मुख्य बातें
• क्या है कोस्टल अपलिफ्ट का विज्ञान? फिलीपींस के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DOST) के सचिव रेनाटो सॉलिडम जूनियर के अनुसार जब किसी सक्रिय फॉल्ट या ट्रेंच पर बहुत अधिक दबाव जमा हो जाता है तो भूकंप के रूप में वह अचानक रिलीज होता है. इस शक्तिशाली दबाव के हटने से जमीन और समुद्र की सतह ऊपर की ओर उठ जाती है. इसे विज्ञान की भाषा में कोसिस्मिक अपलिफ्ट कहते हैं.
• कोटाबाटो ट्रेंच की हलचल से उठा समुद्र: फिलीपींस के सीस्मोलॉजी संस्थान के निदेशक टेरेसिटो बकोलकोल ने बताया कि यह 7.8 तीव्रता का भूकंप दक्षिणी मिंडानावो के पास मौजूद कोटाबाटो ट्रेंच में हलचल के कारण आया था. इस ट्रेंच में एक टेक्टोनिक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे खिसक रही थी, जिससे अचानक आए झटके ने जमीन को ऊपर धकेल दिया.
• 2 मीटर ऊपर उठी जमीन, 200 मीटर बढ़ी तटरेखा: भूकंप के बाद सारंगानी और दावाओ ऑक्सीडेंटल के तटीय इलाकों में जमीन का स्तर अचानक लगभग 2 मीटर (6.6 फीट) ऊपर उठ गया. जमीन के ऊपर उठने से उस हिस्से का पानी अपने आप पीछे हट गया, जिससे उथले पानी वाला 200 मीटर का हिस्सा सूखी जमीन में तब्दील हो गया और समुद्री किनारा पहले से ज्यादा लंबा दिखने लगा.
• लाखों समुद्री जीवों के अस्तित्व पर संकट: इस भूवैज्ञानिक बदलाव के कारण पानी के अंदर रहने वाले लाखों जीवों का आशियाना उजड़ गया है. हमेशा पानी में डूबे रहने वाले कोरल रीफ (मूंगे की चट्टानें) और समुद्री घास के मैदान अचानक धूप और हवा के संपर्क में आ गए हैं. पानी की कमी के कारण भारी मात्रा में समुद्री जीवों की मौत हो गई है, जिससे स्थानीय मत्स्य पालन (फिशरीज) और जैव विविधता पर बुरा असर पड़ेगा.
• स्थायी बदलाव, घबराने की जरूरत नहीं: वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह भूकंप का एक स्वाभाविक और प्राकृतिक प्रभाव है, इसलिए स्थानीय लोगों को पैनिक होने की जरूरत नहीं है. हालांकि, यह बदलाव अब हमेशा के लिए हो गया है. जब तक भविष्य में कोई अन्य टेक्टोनिक हलचल जमीन को वापस नीचे नहीं धकेलती, तब तक समंदर का पानी अपनी पुरानी जगह पर वापस नहीं लौटेगा.
भविष्य के लिए चेतावनी और क्या बरतें सावधानी?वैज्ञानिकों ने स्थानीय लोगों को चेतावनी दी है कि वे बाहर आ चुकीं इन नाजुक मूंगे की चट्टानों (कोरल रीफ) पर चलने से बचें, क्योंकि ये काफी नुकीली और कमजोर होती हैं. इसके अलावा, समुद्र की गहराई बदलने के कारण अब छोटी नावों के संचालन और कश्ती चलाने वाले मछुआरों को नए रास्तों को समझना होगा. हालांकि यह क्षेत्र अब स्थिर दिख रहा है लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भविष्य में इस ट्रेंच से दोबारा भूकंप नहीं आ सकते.
सवाल-जवाबक्या समंदर का पानी पीछे हटना किसी आने वाली सुनामी का संकेत है?फिलीपींस के सीस्मोलॉजी संस्थान (PHIVOLCS) के अनुसार, यह सुनामी का संकेत नहीं है. सुनामी में पानी कुछ मिनटों के लिए पीछे जाता है, लेकिन यहाँ भूकंप के कारण जमीन स्थायी रूप से 2 मीटर ऊपर उठ गई है, जिसे ‘कोस्टल अपलिफ्ट’ कहा जाता है. इसलिए घबराने की बात नहीं है.क्या फिलीपींस में ऐसी घटना पहले भी कभी दर्ज की गई है?हाँ, इससे पहले साल 2013 में फिलीपींस के बोहोल (Bohol) में आए 7.2 तीव्रता के भूकंप के बाद भी ऐसा ही नजारा देखा गया था. तब लून और मारिबोझोक के तटीय इलाकों में जमीन ऊपर उठने की वजह से समुद्र तटरेखा आगे खिसक गई थी.इस घटना का स्थानीय मछुआरों और पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा?समुद्र की सतह ऊपर उठने से तटीय गहराई बदल गई है, जिससे छोटी नावों के संचालन में दिक्कत आएगी. साथ ही, पानी से बाहर आए मूंगे और समुद्री घास नष्ट हो रहे हैं, जिससे मछलियों का प्राकृतिक आवास खत्म होने से स्थानीय मछली पालन और रोजगार प्रभावित होगा.



