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अमेरिका-ईरान में समझौते से किन भारतीय कंपनियों की चमकेगी किस्मत? इनके शेयरों पर रखिएगा नजर!

नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक समझौते (MoU) ने ग्लोबल मार्केट के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार में भी हलचल तेज कर दी है. दोनों देशों के बीच सीजफायर और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने के इस शुरुआती तालमेल से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है. बाजार एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस जियोपॉलिटिकल सुधार से भारतीय रिफाइनिंग, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियों की किस्मत चमक सकती है, जिसके चलते आने वाले दिनों में इनके शेयरों में तगड़ी तेजी देखने को मिल सकती है.

इस पूरे घटनाक्रम पर ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा (Nomura) का कहना है, “अमेरिका-ईरान के बीच यह समझौता भारत की सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs), सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स और पेट्रोनेट एलएनजी (Petronet LNG) के लिए सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होगा. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खुलने से शिपिंग ट्रैफिक सामान्य होगा, जिससे कच्चे तेल पर लगा जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम कम होगा और कीमतें नीचे आएंगी.”

कच्चे तेल के दाम घटने से बीपीसीएल (BPCL), एचपीसीएल (HPCL) और आईओसी (IOC) जैसी कंपनियों के अंडर-रिकवरी के नुकसान में सीधी कमी आएगी और उनका मार्जिन सुधरेगा. ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) ने इस मौके को भुनाने की सलाह देते हुए हाइलाइट किया है कि मिड-ईस्ट क्राइसिस शुरू होने के बाद से BPCL का शेयर 19% और IOC का शेयर 23% तक टूट चुका है, जो अब निवेशकों के लिए एक अच्छी रिस्क-रिवॉर्ड अपॉर्चुनिटी बन रहा है.

रिलायंस, IGL, MGL और गुजरात गैस…

अगर आने वाले दिनों में ईरानी क्रूड ऑयल की बाजार में आधिकारिक एंट्री होती है, तो भारतीय रिफाइनर्स सबसे पहले कतार में होंगे. इससे पहले भी IOC, BPCL, HPCL और रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) ईरान से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदते रहे हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज ने तो एक समय में ईरान से 50 लाख बैरल तेल खरीदने की बड़ी डील भी की थी. इसके अलावा, पेट्रोनेट एलएनजी को कतर से आने वाली गैस की वॉल्यूम बढ़ने और एलएनजी की कीमतें गिरने से सीधा फायदा होगा. वहीं गैस की लागत घटने से आईजीएल (IGL), एमजीएल (MGL) और गुजरात गैस (Gujarat Gas) जैसी सिटी गैस कंपनियों के मुनाफे में जोरदार उछाल देखने को मिल सकता है.

चाबहार से इरकॉन इंटरनेशनल को लाभ

इस डील का दूसरा और सबसे रणनीतिक फायदा भारत के महत्वाकांक्षी चाबहार पोर्ट (Chabahar Port) प्रोजेक्ट को मिलेगा. भारत ने इस प्रोजेक्ट में 120 मिलियन डॉलर का निवेश किया है और 2024 में इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) ने ईरान के साथ 10 साल का लॉन्ग-टर्म ऑपरेशनल एग्रीमेंट साइन किया था. 2026 में अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट (Sanctions Waiver) खत्म होने के बाद भारत अपनी होल्डिंग को अस्थायी रूप से एक ईरानी एंटिटी को ट्रांसफर करने की प्लानिंग कर रहा था, लेकिन इस ताजा शांति समझौते से चाबहार पोर्ट और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) को एक नया जीवन मिल गया है.

इससे भारत के लिए पाकिस्तान को बाईपास करके सेंट्रल एशिया और रूस तक व्यापार करना बेहद आसान हो जाएगा. ऐसे में चाबहार-जाहेदान रेलवे प्रोजेक्ट से जुड़ी इरकॉन इंटरनेशनल (IRCON International) और चाबहार पोर्ट से जुड़ी कंपनियों के शेयर निवेशकों के लिए मल्टीबैगर साबित हो सकते हैं.

शिपिंग, फार्मा कंपनियों के लिए भी मौका

इसके अलावा शिपिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर भी इस डील का साइलेंट विनर बनकर उभरेगा. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, समुद्री रास्ते सामान्य होने से माल ढुलाई (Freight) और इंश्योरेंस की लागत में भारी गिरावट आएगी, जिससे शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) को सीधे तौर पर बड़ा मुनाफा होगा.

फार्मा सेक्टर की बात करें तो सन फार्मा (Sun Pharma), डॉ. रेड्डीज (Dr. Reddy’s) और सिप्ला (Cipla) जैसी कंपनियों के लिए ईरान में जेनेरिक दवाओं की सप्लाई का रास्ता फिर खुलेगा, क्योंकि प्रतिबंध हटने से डॉलर पेमेंट चैनल दोबारा चालू हो जाएंगे जो अब तक सबसे बड़ी रुकावट थी.

युद्ध और स्ट्राइक्स की वजह से ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर को पहुंचे भारी नुकसान के बाद वहां पुनर्निर्माण (Reconstruction) का काम शुरू होगा, जिससे एलएंडटी (L&T), थर्मैक्स (Thermax), भेल (BHEL) और दिग्गज स्टील कंपनियों के लिए बड़े ऑर्डर्स के दरवाजे खुल सकते हैं.

हालांकि, इस समझौते का एक दूसरा पहलू भी है. नोमुरा के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें गिरने से ओएनजीसी (ONGC) और ऑयल इंडिया (Oil India) जैसी अपस्ट्रीम क्रूड प्रोड्यूसर कंपनियों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि तेल सस्ता होने से उनकी प्रति बैरल कमाई घट जाएगी. कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान की यह शांति वार्ता भारत की इकॉनमी के लिए महंगाई से राहत, रुपये में मजबूती और ट्रेड बैलेंस सुधारने की बड़ी उम्मीद लेकर आई है, लेकिन निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि 60 दिनों की अंतिम बातचीत अभी बाकी है.

(Disclaimer: यहां बताए गए स्‍टॉक्‍स ब्रोकरेज हाउसेज की रिपोर्ट्स पर आधारित हैं. यदि आप इनमें से किसी में भी पैसा लगाना चाहते हैं तो पहले सर्टिफाइड इनवेस्‍टमेंट एडवायजर से परामर्श कर लें. आपके किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.)

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