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Nagaur News: जी-7 मंच तक पहुंची नागौरी अश्वगंधा, पीएम मोदी ने वैश्विक नेताओं को किया भेंट, जानें खासियत

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जी-7 मंच तक पहुंची नागौरी अश्वगंधा, पीएम मोदी ने वैश्विक नेताओं को किया भेंट

Last Updated:June 23, 2026, 07:53 IST

Nagauri Ashwagandha Special Features: कभी नागौर के जंगलों में खुद-ब-खुद उगने वाली नागौरी अश्वगंधा आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना चुकी है. जी-7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इसे विदेशी नेताओं को भेंट किए जाने के बाद इसकी चर्चा और बढ़ गई है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, नागौरी अश्वगंधा में विथेनोलाइड्स और अन्य औषधीय तत्व अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे इसकी गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है. नागौर के किसान प्रकाश ढाका के अनुसार, अश्वगंधा की खेती में करीब 10 महीने का समय लगता है और इसके बीज व जड़ें दोनों ही काफी मूल्यवान होते हैं. इसकी कीमत 3 हजार रूपए किलो है. आयुर्वेद में इसका उपयोग ऊर्जा बढ़ाने, तनाव कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने के लिए किया जाता है. बढ़ती मांग से किसानों को बेहतर आय की उम्मीद भी जगी है.

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नागौर. कभी नागौर के जंगलों और बंजर क्षेत्रों में स्वतः उगने वाली नागौरी अश्वगंधा आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना चुकी है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के नेताओं को नागौरी अश्वगंधा उपहार स्वरूप भेंट की. इस कदम ने न केवल भारत की समृद्ध आयुर्वेदिक परंपरा को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाया, बल्कि नागौर की इस विशिष्ट औषधीय फसल को भी नई पहचान प्रदान की है.

प्रधानमंत्री द्वारा नागौरी अश्वगंधा को उपहार के रूप में चुनना केवल एक औपचारिकता नहीं माना जा रहा, बल्कि यह नागौर की मिट्टी, यहां के किसानों की मेहनत और भारत की हजारों वर्षों पुरानी आयुर्वेदिक विरासत का सम्मान है. इससे नागौर के किसानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नए अवसर मिलने की उम्मीद भी बढ़ी है. नागौर के निकटवर्ती मालगांव निवासी किसान प्रकाश ढाका ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष 10 बीघा भूमि में नागौरी अश्वगंधा की खेती की थी. उन्होंने जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगी अश्वगंधा के पौधों से एक-एक बीज एकत्र कर इसकी खेती शुरू की. उनके अनुसार, इस फसल को तैयार होने में करीब 10 महीने का समय लगता है.

तीन हजार रुपए किलो है कीमत

अश्वगंधा की जड़ों के साथ-साथ इसके बीज भी अत्यंत मूल्यवान होते हैं और इनकी कीमत लगभग तीन हजार रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाती है. हालांकि खेती के दौरान बीजों को पक्षियों और अन्य जीवों से बचाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बना रहता है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग चौधरी ने बताया कि नागौर जिले की शुष्क जलवायु, रेतीली मिट्टी और विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियां यहां की अश्वगंधा को अन्य क्षेत्रों में उगाई जाने वाली अश्वगंधा से अलग बनाती है.

जीआई टैग भी मिल चुका है

उन्होंने बताया कि इसी विशेषता के कारण नागौरी अश्वगंधा को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग भी प्राप्त हुआ है. कृषि अनुसंधान उप केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजदीप मुंदियाड़ा ने बताया कि नागौरी अश्वगंधा में विथेनोलाइड्स, जड़ भंगुरता और स्टार्च की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक पाई जाती है, जिससे इसके औषधीय गुण और प्रभावशीलता बढ़ जाती है.

ऊर्जा बढ़ाने और तनाव कम करने में है सहायक

आयुर्वेद में अश्वगंधा को रसायन’श्रेणी की खास औषधि मानी जाती है. इसका उपयोग ऊर्जा बढ़ाने, तनाव कम करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने और संपूर्ण स्वास्थ्य सुधारने के लिए लंबे समय से किया जाता रहा है. आधुनिक वैज्ञानिक शोधों ने भी इसके गुणों की पुष्टि की है, जिसके चलते वैश्विक बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. नागौरी अश्वगंधा को जीआई टैग दिलाने में नागौरी वेलफेयर सोसायटी की महत्वपूर्ण भूमिका रही. संस्था ने इसकी विशिष्टता और नागौर क्षेत्र से इसके ऐतिहासिक संबंधों को प्रमाणित करते हुए पंजीकरण प्रक्रिया को सफल बनाया.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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