किरोड़ी लाल मीणा का बड़ा आरोप! डोटासरा और उनके समधी पर फर्जी OBC सर्टिफिकेट बनवाने का दावा, FIR की मांग

Last Updated:June 23, 2026, 19:22 IST
OBC Certificate Controversy: राजस्थान की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है. कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को पत्र लिखकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और उनके समधी रमेशचंद्र पूनियां के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है. किरोड़ी लाल मीणा ने आरोप लगाया है कि दोनों ने कथित रूप से फर्जी ओबीसी प्रमाणपत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लिया और अपने परिजनों को सरकारी सेवाओं में लाभ पहुंचाया. उन्होंने यह भी दावा किया कि क्रीमी लेयर में आने के बावजूद ओबीसी श्रेणी का फायदा उठाया गया. मंत्री ने अपने पत्र में मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. आरोपों के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है.
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किरोड़ी लाल मीणा ने डोटासरा पर किया बड़ा हमला, FIR की उठी मांग
जयपुर. राजस्थान की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है. सूबे के कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने राजस्थान के पूर्व शिक्षा मंत्री और वर्तमान पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा तथा उनके समधी रमेश चंद्र पूनिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. किरोड़ी लाल मीणा ने सीएम भजनलाल शर्मा को एक पत्र लिखकर दोनों नेताओं सहित उनके परिजनों पर एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की पुरजोर मांग की है. मीणा ने आरोप लगाया है कि इन प्रभावशाली लोगों ने मिलकर ओबीसी (OBC) के फर्जी सर्टिफिकेट बनवाए और अपने सगे-संबंधियों को नाजायज तरीके से आरएएस (RAS) अधिकारी बनवाया. मुख्यमंत्री को लिखे इस पत्र के साथ उन्होंने कार्मिक विभाग का एक महत्वपूर्ण सरकारी सर्कुलर और अन्य पुख्ता दस्तावेज भी संलग्न किए हैं.
सीएम को भेजे गए पत्र में किरोड़ी लाल मीणा ने लिखा- डोटासरा ने अपने बेटे अविनाश का आरएएस में चयन करवाया, जिसके पुख्ता प्रमाण वे निजी तौर पर सीएम को दे चुके हैं. उन्होंने आगे कहा कि आवश्यकता पड़ने पर या जब कोई जांच एजेंसी चाहेगी तब भी वे प्रमाण प्रस्तुत कर देंगे. उन्होंने लिखा, आरएएस 2016 में डोटासरा के बेटे के मुख्य परीक्षा में 343 नंबर आए और साक्षात्कार में 85 नंबर दिए गए. कुल 428 नंबर आने से उनका चयन अकाउंट्स सर्विस में हो गया. आरएएस भर्ती 2016 की मुख्य परीक्षा में सर्वाधिक 425 नंबर हासिल करने वाली गरिमा जिंदल को साक्षात्कार में मात्र 25 नंबर दिए गए. जबकि डोटासरा के प्रभाव के कारण उनके बेटे अविनाश को साक्षात्कार में 85 नंबर दिए गए. उन्होंने कहा कि सर्वाधिक नंबर आने के बावजूद गरिमा को साक्षात्कार में कम नंबर मिले और वह मूल आरएएस में चयनित नहीं हो पाई.
किरोड़ी लाल मीणा ने लिखा सीएम भजन लाल शर्मा को पत्र
समधी रमेश चंद्र पूनिया के परिवार पर आरोपपत्र में दूसरा बड़ा निशाना डोटासरा के समधी और चुरू के पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी रमेश चंद्र पूनिया पर साधा गया है. डॉ. मीणा ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि रमेश चंद्र पूनिया वर्ष 1993 में महज 32 वर्ष की उम्र में ही प्रधानाध्यापक बन चुके थे. नियम के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति 40 वर्ष की आयु से पहले राज्य सेवा का पद पा लेता है, तो उसकी संतानें ओबीसी क्रीमीलेयर (क्रीमीलेयर श्रेणी) के तहत आती हैं और उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता. इसके बावजूद, रमेश चंद्र पूनिया ने अपनी तीनों संतानों का फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र बनवाया. इसी फर्जीवाड़े के दम पर उनकी पुत्री और डोटासरा की पुत्रवधु प्रतिभा पूनिया आरएएस 2016 में चयनित होकर वर्तमान में आमेर डेवलपमेंट मैनेजमेंट ऑथोरिटी में अतिरिक्त चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर हैं. इसके अलावा उनकी दूसरी बेटी प्रभा पूनिया और पुत्र गौरव पूनिया का चयन भी आरएएस परीक्षा 2018 में इसी कोटे से कराया गया.
आरपीएससी सदस्यों पर दबाव और कूटनीति का पर्दाफाशमंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने इस पूरे मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के भीतर मची साठगांठ को भी उजागर किया है. उन्होंने पत्र में साफ लिखा कि पेपर लीक मामले में पकड़े गए पूर्व आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा और रामूराम रायका ने पुलिस पूछताछ में यह स्वीकार किया है कि गोविंद सिंह डोटासरा ने इन बच्चों को इंटरव्यू में ऊंचे नंबर दिलाने के लिए आयोग के सदस्यों पर अनुचित दबाव बनाया था. इन सभी आरोपियों ने आरपीएससी के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर कूट रचित दस्तावेज पेश किए और अवैध तरीके से आरएएस अफसर बनकर आज तक सरकार से अवैध वेतन प्राप्त कर रहे हैं, जो कि कानूनन एक निरंतर जारी रहने वाला संज्ञेय अपराध है.
सरकारी सर्कुलर का हवाला और कड़ी धाराओं में केस की मांगअपने आरोपों को कानूनी रूप से मजबूत करने के लिए कृषि मंत्री ने कार्मिक विभाग द्वारा 2 मई 2019 को जारी वह सरकारी सर्कुलर भी मुख्यमंत्री को भेजा है, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि 40 वर्ष या उससे कम आयु में राज्य सेवा का पद (जैसे लेक्चरर या हेडमास्टर) प्राप्त करने वाले कार्मिकों के बच्चे क्रीमीलेयर की श्रेणी में आएंगे. इस आधार पर यह पूरा मामला पूरी तरह अवैध साबित होता है. मीणा लाल ने सीएम से आग्रह किया है कि वे इस गंभीर भ्रष्टाचार पर तुरंत एक्शन लें और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316(4), 316(5), 338, 336(3), 340(2), 198, 201 और 61(2) के तहत आरपीएससी या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश जारी करें.
About the AuthorJagriti Dubey
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