मैं इन्हें पाल नहीं सकता…गरीबी से लाचार पिता ने तीन मासूम बच्चे बाल गृह को सौंप दिए

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मैं इन्हें पाल नहीं सकता…लाचार पिता ने 3 मासूम बच्चे बाल गृह को सौंप दिए
Last Updated:June 24, 2026, 00:00 IST
ओडिशा के सुंदरगढ़ में दाने-दाने को मोहताज एक बेबस पिता को अपने जिगर के टुकड़ों को खुद से दूर करना पड़ा. पत्नी के छोड़कर जाने के बाद इस दिहाड़ी मजदूर के लिए बच्चों का पेट पालना बिल्कुल असंभव हो गया था. भूख, कुपोषण और गंभीर बीमारी से तड़पते मासूमों की जान बचाने के लिए, इस लाचार पिता ने भारी मन से अपने तीन बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सौंप दिया, ताकि उन्हें एक सुरक्षित जीवन मिल सके.सांकेतिक इमेज. (AI)
ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले से एक बेहद दर्दनाक और दिल झकझोर देने वाली खबर सामने आई है. यहां गरीबी और लाचारी ने एक पिता को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया, जिसकी कोई माता-पिता कल्पना भी नहीं कर सकते. किंजिरकेला थाना क्षेत्र में रहने वाले एक दिहाड़ी मजदूर ने तंगहाली से हारकर अपने ही जिगर के टुकड़ों को खुद से दूर कर दिया. इस बेबस पिता ने अपने तीन छोटे बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के हवाले कर दिया है.
इस गरीब मजदूर की जिंदगी में दुखों का पहाड़ तब टूटा जब उसकी पत्नी उसे और उनके चार मासूम बच्चों को बेसहारा छोड़कर चली गई. पत्नी के जाने के बाद परिवार के लालन-पालन की पूरी जिम्मेदारी अकेले इस पिता के कंधों पर आ गई. एक दिहाड़ी मजदूर होने के नाते उसकी मामूली कमाई इतनी भी नहीं थी कि वह अपने बच्चों को दो वक्त की भरपेट रोटी खिला सके. काम और बच्चों की देखभाल के बीच जूझते हुए यह पिता पूरी तरह से बेबस हो गया था.
घर में नहीं थे खाने को
गरीबी और तंगहाली की इस भयानक मार का सबसे ज्यादा असर मासूम बच्चों की सेहत पर पड़ रहा था. घर में खाने-पीने का पर्याप्त सामान न होने के कारण बच्चे कुपोषण का शिकार होने लगे थे. लगातार भूखे रहने और शरीर को सही पोषण न मिलने की वजह से बच्चे अक्सर बीमार रहने लगे. एक पिता के लिए अपने बच्चों को यूं आंखों के सामने भूखे और बीमार तड़पते देखना किसी असहनीय दर्द से कम नहीं था.
जब जीवन पर मंडराया संकट
जब हालात पूरी तरह से बेकाबू हो गए और बच्चों के जीवन पर संकट मंडराने लगा, तो इस लाचार पिता ने एक बेहद कठोर फैसला लिया. भारी मन से वह चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के पास पहुंचा और अधिकारियों के सामने अपनी दयनीय स्थिति रखी. उसने हाथ जोड़कर गुहार लगाई कि उसके पांच साल के बेटे, आठ साल की बेटी और दस साल की बड़ी बेटी को वे अपनी देखरेख में ले लें, ताकि कम से कम उनके बच्चों की जान बच सके.
पिता की इस दर्दभरी गुहार पर CWC के अधिकारियों ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया और परिवार की स्थिति का वेरिफिकेशन किया. जांच में गरीबी और कुपोषण की बात सच पाए जाने के बाद, बाल कल्याण समिति ने तुरंत तीनों बच्चों की कस्टडी आधिकारिक रूप से स्वीकार कर ली. अब इन तीनों मासूम बच्चों को बेहतर देखभाल, पर्याप्त भोजन, इलाज और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक सुरक्षित बाल गृह में शिफ्ट कर दिया गया है.
About the AuthorGyanendra Mishra
Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi..com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें
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