‘कैचेस विन मैचेस’ की उड़ीं धज्जियां… भारत का टी20 में शर्मनाक वर्ल्ड रिकॉर्ड, बांग्लादेश ने पावरप्ले में लूटी महफिल

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भारत ने बनाया शर्मनाक वर्ल्ड रिकाॅर्ड, बांग्लादेश ने लूटी महफिल
Last Updated:June 25, 2026, 21:08 IST
India women make embarrassing fielding record: ओल्ड ट्रैफर्ड में बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने बेहद खराब फील्डिंग का प्रदर्शन करते हुए एक शर्मनाक रिकॉर्ड अपने नाम किया. मैच के शुरुआती 5 ओवरों में महज 17 गेंदों के भीतर भारतीय फील्डर्स ने 4 कैच टपका दिए. महिला टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट के इतिहास में पावरप्ले के दौरान यह किसी भी टीम का अब तक का सबसे खराब फील्डिंग स्पेल है. लगातार मिल रहे जीवनदानों का फायदा उठाकर बांग्लादेशी बल्लेबाजों ने पावरप्ले में 40 रन कूट डाले, जिसने भारतीय टीम की पुरानी कमजोरी को फिर उजागर कर दिया.भारतीय महिला क्रिकेट टीम की लचर फील्डिंग की खुली पोल.
नई दिल्ली. भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर एक ऐसा अनचाहा इतिहास रच दिया, जिसे कोई भी टीम कभी याद नहीं रखना चाहेगी. बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले में भारतीय फील्डर्स ने मैदान पर मानो ‘अपराध’ कर दिया. खराब फील्डिंग और छूटे हुए कैचों के एक डरावने सिलसिले ने भारत को महिला टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट के इतिहास की पहली ऐसी टीम बना दिया, जिसने मैच के शुरुआती 5 ओवरों के भीतर ही 4 कैच टपका दिए. यह महिला टी20 इंटरनेशनल इतिहास में केवल दूसरा ऐसा मौका था जब पावरप्ले में किसी टीम ने 4 कैच छोड़े हों, लेकिन भारत ने इस ‘भूलने लायक रिकॉर्ड’ को महज 17 गेंदों के भीतर अंजाम देकर सबको हैरान कर दिया.
भारतीय टीम के लिए इस डरावने सिलसिले की शुरुआत तीसरे ओवर की पांचवीं गेंद पर हुई. बांग्लादेश की सलामी बल्लेबाज जुआयरिया फिरदौस ने गेंदबाज श्री चरणी की गेंद पर एक खराब स्वीप शॉट खेला. गेंद हवा में तैरती हुई शॉर्ट फाइन लेग की तरफ गई. विकेटकीपर यास्तिका भाटिया ने गेंद को भांपते हुए तेजी से दौड़ लगाई और एक शानदार फुल-लेंथ डाइव लगाई. यास्तिका की उंगलियां गेंद तक पहुंच तो गईं, लेकिन वह उसे दस्तानों में समाने में नाकाम रहीं. यह मैच का पहला जीवनदान था.
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की लचर फील्डिंग की खुली पोल.
अभी भारतीय टीम इस झटके से उबर भी नहीं पाई थी कि चौथे ओवर की आखिरी गेंद पर जुआयरिया को दूसरा जीवनदान मिल गया. इस बार गेंदबाज थीं रेणुका सिंह. रेणुका की एक शॉर्ट डिलीवरी पर जुआयरिया ने पुल करने का प्रयास किया. गेंद सीधे डीप मिडविकेट पर खड़ी राधा यादव के हाथों में गई. यह एक बेहद आसान और सीधा कैच था, लेकिन मैदान पर मौजूद हर कोई तब दंग रह गया जब गेंद राधा के हाथों से छिटक कर बाउंड्री पार चार रनों के लिए चली गई.
राधा यादव के लिए पुराना दर्द हुआ ताजाराधा के लिए यह ड्रॉप कैच विशेष रूप से परेशान करने वाला था. वह पिछले मैच में साउथ अफ्रीका के खिलाफ भी दो बेहद महत्वपूर्ण कैच छोड़ चुकी थीं, जिसमें मैच जिताऊ पारी खेलने वालीं मारिजान काप का कैच भी शामिल था. इस मैच में भी उनकी यह गलती टीम पर भारी पड़ी.
नंदिनी शर्मा के ओवर में लगातार दो झटकेमैदान पर गलतियों का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा. पांचवें ओवर में कहानी और दर्दनाक हो गई। ओवर की दूसरी गेंद पर शोभना मोस्टरी ने श्री चरणी की गेंद पर एक जोरदार ड्राइव लगाया. गेंद बल्ले का बाहरी किनारा लेकर कवर्स की तरफ गई, जहां फील्डर नंदिनी शर्मा तैनात थीं. नंदिनी ने अपनी बाईं ओर लो-डाइव लगाई, गेंद पर दोनों हाथ भी टिकाए, लेकिन आखिरकार गेंद उनकी पकड़ से फिसल गई.
ठीक एक गेंद बाद, यानी पांचवें ओवर की चौथी गेंद पर, जुआयरिया फिरदौस ने भारतीय फील्डर्स का एक बार फिर इम्तिहान लिया. जुआयरिया के टॉप-एज स्लाग स्वीप से गेंद शॉर्ट थर्ड की तरफ हवा में उठ गई. नंदिनी शर्मा ने अपनी पिछली गलती को सुधारने के इरादे से तेजी से दौड़ लगाई और गेंद की तरफ खुद को हवा में उछाल दिया. वह गेंद तक पहुंचने में कामयाब भी रहीं, लेकिन किस्मत और ग्रिप दोनों ने उनका साथ नहीं दिया. यह 17 गेंदों के भीतर भारत का चौथा ड्रॉप कैच था.
बांग्लादेश ने उठाया पूरा फायदा, भारत की पुरानी कमजोरी उजागरबांग्लादेशी बल्लेबाजों ने भारतीय टीम की इस ‘फील्डिंग काइंडनेस’ यानी दरियादिली का भरपूर फायदा उठाया. जीवनदानों की बदौलत बांग्लादेश ने पावरप्ले (शुरुआती 6 ओवर) में केवल 1 विकेट खोकर 40 रन कूट डाले, जिसने मैच का रुख बदल दिया. शर्मनाक बात यह है कि इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम की फील्डिंग का यह कोई पहला फ्लॉप शो नहीं था. यह मौजूदा प्रतियोगिता में दूसरा मौका था जब किसी टीम ने पहले 6 ओवरों में 3 या उससे अधिक कैच छोड़े हों और बदकिस्मती से दोनों ही बार यह शर्मनाक रिकॉर्ड भारत के नाम रहा. इससे पहले एजबेस्टन में पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में भी भारतीय फील्डर्स ने तीन कैच टपकाए थे.
भारतीय टीम ने बांग्लादेश के खिलाफ प्लेइंग इलेवन में किए दो बड़े बदलाव.
क्या है आगे की राह?क्रिकेट में अक्सर कहा जाता है कि ‘कैचेस विन मैचेस’ (कैच पकड़ो, मैच जीतो). लेकिन भारतीय महिला टीम ने ओल्ड ट्रैफर्ड के मैदान पर इस कहावत की धज्जियां उड़ा दीं. बड़े टूर्नामेंट्स में अगर टीम इंडिया को चैंपियन बनना है, तो गेंदबाजी और बल्लेबाजी के साथ-साथ अपनी फील्डिंग के स्तर को भी विश्व स्तरीय बनाना होगा. बार-बार मिलती जीवनदानों की वजह से गेंदबाजों का मनोबल भी टूटता है और विरोधी टीम को मैच में हावी होने का मौका मिलता है. अब देखना यह होगा कि भारतीय टीम इस ‘नाइटमेयर स्पेल’ से उबरकर अपनी फील्डिंग की कमियों को कैसे सुधारती है.
About the AuthorKamlesh Raiचीफ सब एडिटर
कमलेश राय वर्तमान में इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें
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