राजस्थान में ‘आउट ऑफ कंट्रोल’ हुई जेलें! सीएम को मारने की धमकी से लेकर डकैत की हत्या तक सबकुछ होता है यहां

Last Updated:June 30, 2026, 12:58 IST
Dacoit Jagan Gurjar Murder Case : राजस्थान में क्या जेलें आऊट ऑफ कंट्रोल हो गई हैं? अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या की वारदात ने साफ कर दिया है कि जेलों में जेल प्रशासन की नहीं बल्कि बदमाशों की तूती बोलती है. राजस्थान में जेल से पूर्व में एक या दो बार नहीं बल्कि तीन बार सीएम को जान से मारने की धमकी भी दी जा चुकी है. बीकानेर जेल में गैंगवार हो चुकी है. इस दौरान वहां ताबड़तोड़ गोलियां चली थी. यहां जेल ही नहीं बल्कि थाने के लॉकअप में बंद गैंगस्टर को उसके साथी AK-47 से हमलाकर छुड़ा ले गए थे. अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद डकैत जगन गुर्जर की सोमवार को हत्या करदी गई.
अजमेर. राजस्थान की सबसे हाई सिक्योरिटी वाली अजमेर जेल में चंबल के कुख्यात डकैत रहे जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई. यह कोई सामान्य घटना नहीं है. यह पूरे सिस्टम को हिला देने वाली घटना है. राजस्थान में जेलों से सूबे के मुखिया सीएम को धमकी तक दे जाती है. फिर भी सिस्टम नहीं सुधरता है. जेल प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद जेल की सलाखों में अभी तक मोबाइल की एंट्री बंद नहीं हुई है. नशा पत्ता पहुंचना तो आम बात है. इन सब हालात से सवाल खड़ा होता है कि क्या राजस्थान में जेलें ‘आउट ऑफ कंट्रोल’ हो रही हैं? मौजूदा हालात से तो कुछ ऐसा ही लग रहा है.
राजस्थान को आमतौर पर शांत सूबा माना जाता है. यहां बिहार और उत्तर प्रदेश के मुकाबले ना तो उतनी गैंगवार है और ना ही आए दिन कोई बड़ा राजनीतिक उठापटक होती है. शौर्य और स्वाभिमान की प्रतीक राजस्थान में कुछ एक ही इलाके हैं जहां गैंगवार सिर उठाती है. इनमें शेखावाटी, पश्चिमी राजस्थान और हरियाणा के मेवात इलाके तथा उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश की सीमा से सटे भरतपुर, धौलपुर और अलवर में गैंगवार की घटनाएं ज्यादा सामने आती रही है. लेकिन गनीमत यह है कि उन गैंगवारों पर समय-समय पर काबू पा लिया जाता है.
तमाम प्रयासों के बावजूद सिस्टम ‘फुल प्रूफ’ नहीं हो पायाबाजवूद इसके प्रदेश में जेल सिस्टम अभी तक पटरी पर नहीं आ पाया है. राजस्थान की जेलों से आए दिन मोबाइल और ड्रग्स तो बरामद होते ही रहते हैं. इन पर अंकुश लगाने के लिए समय-समय पर उच्चाधिकारियों के मौजूदगी में ‘सर्च ऑपरेशन’ चलाए जाते हैं. लेकिन शायद ही कोई मौका ऐसा आता है जब सर्च टीम बैरंग लौटती है. उसे हर बार किसी न किसी जेल में मोबाइल और अन्य आपत्तिजनक चीजें मिलती ही है. इससे साफ है कि तमाम प्रयासों और सरकारी दावों के विपरीत जेल सिस्टम ‘फुल प्रूफ’ नहीं हो पाया है. जेल प्रशासन के जैमर और सिक्योरिटी में लीकेज है. जेल प्रशासन उन लीकेज को अभी तक या तो ढूंढ नहीं पाया है या फिर हरे नोटों के फेर में ढूंढना ही नहीं चाहता.
थाने पर AK 47 से हमला और जेल में गैंगवार
राजस्थान की जेलों में ही गैंगवार तक हो चुकी है. एक दशक पहले बीकानेर जेल में सूबे के कुख्यात गैंगस्टर बलबीर बानूड़ा समेत तीन बदमाशों को दूसरी गैंग के लोगों ने गोलियों से भूनकर और डंडों से हमला कर मौत के घाट उतार दिया था. इस जेल में राजस्थान मोस्ट वांटेड रहा कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल भी उस समय मौजूद था. गैंगवार में वह भी घायल हो गया था. उस घटना से पूरा सूबा हिल उठा था. वहीं साल 2019 में अलवर जिले के बहरोड़ थाने के लॉकअप में बंद मेवात इलाके (हरियाणा) के कुख्यात गैंगस्टर एक लाख रुपये के इनामी विक्रम उर्फ पपला गुर्जर को उसके साथियों ने थाने पर AK 47 रायफल से हमला कर छुड़ा लिया था. ये राजस्थान पुलिस और जेल प्रशासन पर लगे वो धब्बे जिन्हें आसानी से मिटाया नहीं जा सकता.
सीएम भजनलाल शर्मा को जेलों से तीन बार मारने की धमकी दी जा चुकी है
करीब ढाई साल पहले राजस्थान में सत्तारुढ़ हुई बीजेपी सरकार के मुखिया सीएम भजनलाल शर्मा को इस अवधि में तीन बार जेलों से जान से मारने की धमकी दी जा चुकी है. इनमें दो बार दौसा सेंट्रल जेल से और एक बार बीकानेर सेंट्रल जेल से जान से मारने की धमकी दी गई थी. इसी अवधि में जयपुर सेंट्रल जेल से सूबे के डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा को भी जान से मारने की धमकी दी गई थी. तब भी सूबे की सियासत में हड़कंप मचा था. जेलों में सघन तलाशी अभियान चले लेकिन जेल प्रशासन गैंस्टरर्स की हरकतों को रोकने में नाकाम रहा. अब अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या ने फिर साबित कर दिया कि क्रिमीनल जेल प्रशासन के सख्ती से उस पर ज्यादा भारी पड़ते हैं. भले ही जेल प्रशासन कुछ भी तर्क दे लेकिन नाकामियों को छिपाया नहीं जा सकता.About the AuthorSandeep Rathore
संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…और पढ़ें
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