पहाड़ों में मिलने वाली जंगली प्याज, पुरानी खुजली फोड़े में उपयोगी, जानें कैसे करें इस्तेमाल

Last Updated:July 05, 2026, 13:02 IST
Joint Pain Relief Tips: जोड़ों के दर्द, गठिया और त्वचा संबंधी बीमारियों से परेशान लोगों के बीच इन दिनों पारंपरिक जड़ी-बूटी से इलाज करने वाले वैद्यों की मांग बढ़ रही है. उत्तर प्रदेश के चित्रकूट निवासी वैद्य राजेश सिंह इन दिनों सीतामढ़ी में लोगों का उपचार कर रहे हैं. उनका दावा है कि उनके पास एक ऐसी विशेष जड़ी-बूटी है, जो जोड़ों और नसों के दर्द के साथ-साथ कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं में भी लाभ पहुंचा सकती है. राजेश सिंह का कहना है कि यह पारंपरिक चिकित्सा पद्धति उन्हें अपने पूर्वजों से विरासत में मिली है.
राजेश सिंह के अनुसार, उनकी दवा का मुख्य घटक ‘जंगली प्याज’ है. उनका दावा है कि यह सामान्य प्याज नहीं है, बल्कि नेपाल के ऊंचे और पथरीले पहाड़ी इलाकों में पाया जाने वाला एक विशेष पौधा है. इसे ढूंढ़ना और निकालना काफी कठिन होता है. इसके बाद पारंपरिक विधि से इसे औषधि के रूप में तैयार किया जाता है.
वैद्य का दावा है कि यह जड़ी-बूटी यूरिक एसिड बढ़ने से होने वाले गठिया, पुराने जोड़ों के दर्द, वात रोग और साइटिका जैसी समस्याओं में लाभ पहुंचाती है. उनके अनुसार, इस दवा के उपयोग से कई मरीजों को दर्द से राहत मिली है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है.
राजेश सिंह का यह भी कहना है कि यह जड़ी-बूटी कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं, जैसे पुरानी खुजली, फोड़े-फुंसियां और संक्रमण के कारण कान बहने जैसी दिक्कतों में भी उपयोगी हो सकती है.
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उनका दावा है कि पारंपरिक तरीके से तैयार की गई यह औषधि कई प्रकार की तकलीफों में इस्तेमाल की जाती है. फिलहाल वैद्य राजेश सिंह अगले एक-दो महीने तक सीतामढ़ी और आसपास के क्षेत्रों में रहकर लोगों को अपनी पारंपरिक चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराएंगे.
हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी जड़ी-बूटी या पारंपरिक उपचार को अपनाने से पहले योग्य डॉक्टर या आयुष विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. खासकर यदि बीमारी पुरानी या गंभीर हो.
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