Rajasthan

पानी कम होते ही नदी के बीचों-बीच तैरने लगे 1500 मकान, जानिए वेल्लाटूरु का सच

Last Updated:July 06, 2026, 11:01 IST

Hyderabad News : कृष्णा नदी में जलस्तर घटने से पुलिचिंतला बांध में डूबा पुराना वेल्लाटूरु गांव फिर दिखा. विकास के कारण विस्थापित हुए लोगों के लिए यह भावुक क्षण है. हाल ही में बांध से पानी छोड़े जाने और भीषण गर्मी के कारण कृष्णा नदी का जलस्तर काफी नीचे पहुंच गया. इसके बाद पानी के भीतर छिपा पुराना वेल्लाटूरु गांव एक बार फिर दिखाई देने लगा.

हैदराबाद. वक्त के थपेड़े और विकास की रफ्तार में गांवों का विस्थापित होना कोई नई बात नहीं है. लेकिन जब नदी का सीना चीरकर एक पूरा का पूरा बसा-बसाया अतीत फिर से सामने आ जाए, तो यह दृश्य भावुक भी कर देता है और हैरान भी. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमा पर कृष्णा नदी के तट पर बसे पुराने वेल्लाटूरु गांव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है.

सालों पहले पुलिचिंतला जलविद्युत परियोजना और बांध के निर्माण के कारण यह ऐतिहासिक गांव पूरी तरह जलमग्न हो गया था. विकास परियोजना के लिए यहां रहने वाले करीब 1500 परिवारों को अपने पुश्तैनी घर, आंगन और गलियां छोड़नी पड़ी थीं. पुनर्वास योजना के तहत इन लोगों को न्यू वेल्लाटूरु में बसाया गया, लेकिन पुराने गांव की यादें आज भी पानी के भीतर दफन हैं.

जलस्तर घटते ही फिर नजर आया पुराना गांवहाल ही में बांध से पानी छोड़े जाने और भीषण गर्मी के कारण कृष्णा नदी का जलस्तर काफी नीचे पहुंच गया. इसके बाद पानी के भीतर छिपा पुराना वेल्लाटूरु गांव एक बार फिर दिखाई देने लगा. जैसे-जैसे पानी कम हुआ, नदी के बीचों-बीच डूबे हुए घरों की छतें, पक्के मकानों के ढांचे, खिड़कियां और पानी की टंकियां साफ नजर आने लगीं. यह दृश्य किसी हालिया तबाही का नहीं, बल्कि विकास की कीमत चुकाने वाले एक ऐतिहासिक गांव की कहानी बयां करता है.

यादों से जुड़ा भावुक पलनदी के इस हिस्से में आज गहरा सन्नाटा पसरा हुआ है, जहां कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं और चौपालें सजती थीं. जिन लोगों ने वर्षों पहले अपने गांव को पानी में डूबते देखा था, उनके लिए यह पल बेहद भावुक है. कई लोग नावों के जरिए दूर से अपने पुराने घरों को निहार रहे हैं, जो कभी उनकी पहचान और जीवन का हिस्सा हुआ करते थे.

भूवैज्ञानिकों के लिए भी बना अध्ययन का विषयभूवैज्ञानिकों और स्थानीय जानकारों के अनुसार, यह घटना इस बात का उदाहरण है कि मजबूत कंक्रीट के ढांचे पानी के भीतर भी दशकों तक सुरक्षित रह सकते हैं. कृष्णा नदी का यह बदला हुआ रूप केवल एक डूबे हुए गांव की तस्वीर नहीं दिखाता, बल्कि यह विस्थापित समाज के संघर्ष और उनकी स्मृतियों की भी गवाही देता है. यह दृश्य एक बार फिर याद दिलाता है कि इंसान चाहे कहीं भी बस जाए, उसकी जड़ें हमेशा अपनी मिट्टी से जुड़ी रहती हैं.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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