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डिप्रेशन से जूझ रहे थे कैलाश खेर, एक फैसले ने बना दिया सूफी संगीत का सुपरस्टार, फिर 700 से ज्यादा गानों के बने बादशाह

Last Updated:July 07, 2026, 05:01 IST



अपनी सूफियाना आवाज और अलग अंदाज के लिए मशहूर गायक कैलाश खेर आज करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करते हैं. लेकिन उनकी जिंदगी का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा. एक समय ऐसा भी आया था, जब बिजनेस में भारी नुकसान होने के बाद वह गहरे डिप्रेशन में चले गए थे. हालात इतने खराब हो गए थे कि उनके मन में जिंदगी खत्म करने तक का ख्याल आने लगा था. हालांकि, संगीत और आध्यात्म ने उन्हें इस मुश्किल दौर से बाहर निकलने की ताकत दी.

नई दिल्ली. 7 जुलाई 1973 को उत्तर प्रदेश के मेरठ में जन्मे कैलाश खेर बचपन से ही संगीत के माहौल में पले-बढ़े. उनके पिता मेहर सिंह खेर लोक गायक थे. यही वजह रही कि कम उम्र से ही उनका रुझान संगीत की ओर हो गया. हालांकि, उन्होंने शुरुआत में संगीत के बजाय कारोबार में किस्मत आजमाने का फैसला किया.

अपने एक दोस्त के साथ मिलकर कैलाश खेर ने हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट का बिजनेस शुरू किया. उन्हें उम्मीद थी कि कारोबार में सफलता मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बिजनेस पूरी तरह से फेल हो गया और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. इस असफलता का असर उनकी मानसिक स्थिति पर भी पड़ा और वह डिप्रेशन में चले गए. उन्होंने खुद को पूरी तरह टूटता हुआ महसूस किया.

कठिन समय में कैलाश खेर ने खुद को संभालने की कोशिश की और कुछ समय के लिए ऋषिकेश चले गए. वहां उन्होंने गंगा किनारे साधु-संतों के बीच समय बिताया. भजन, कीर्तन और आध्यात्मिक माहौल ने उन्हें नई ऊर्जा दी. इसी दौरान उन्होंने फैसला किया कि अब वह पूरी तरह संगीत को ही अपना जीवन बनाएंगे.

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साल 2001 में कैलाश खेर मुंबई पहुंचे और अपने संगीत करियर की नई शुरुआत की. शुरुआती दिनों में उन्होंने विज्ञापनों के लिए जिंगल्स गाए और छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स पर काम किया. धीरे-धीरे उनकी आवाज लोगों तक पहुंचने लगी और उन्हें फिल्मों में गाने का मौका मिला.

कैलाश खेर को पहला बड़ा ब्रेक फिल्म ‘अंदाज’ के गाने ‘रब्बा इश्क ना होवे’ से मिला. इसके बाद ‘अल्लाह के बंदे हंस दे’ ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई. यह गाना इतना लोकप्रिय हुआ कि कैलाश खेर रातों-रात स्टार बन गए. इसके बाद उन्होंने ‘तेरी दीवानी’, ‘सैयां’, ‘बम लहरी’ और ‘जय जयकारा’ जैसे कई सुपरहिट गाने गाए.

कैलाश खेर ने ‘कैलासा’ नाम से अपना बैंड भी बनाया, जिसने सूफी और लोक संगीत को नए अंदाज में लोगों तक पहुंचाया. उन्होंने हिंदी समेत 20 से ज्यादा भाषाओं में 700 से अधिक गानों को अपनी आवाज दी है. संगीत की दुनिया में उनके योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया. इसके अलावा उन्हें फिल्मफेयर समेत कई बड़े पुरस्कार भी मिल चुके हैं.

कैलाश खेर की कहानी इस बात का उदाहरण है कि मुश्किल हालात चाहे कितने भी बड़े क्यों न हों, अगर हौसला और जुनून कायम रहे तो जिंदगी दोबारा नई शुरुआत करने का मौका जरूर देती है.

कैलाश खेर ने सिर्फ बॉलीवुड में ही नहीं, बल्कि भक्ति, सूफी और लोक संगीत की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बनाई है. उन्होंने ‘कैलासा’ बैंड की स्थापना की और देश-विदेश में हजारों लाइव कॉन्सर्ट किए. उनकी दमदार आवाज में गाए गए ‘तेरी दीवानी’, ‘सैयां’, ‘अल्लाह के बंदे’, ‘बम लहरी’ और ‘जय जयकारा’ जैसे गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं.

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