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जुलाई में नर्सरी तैयार करने का सही समय, एक्सपर्ट ने बताए जरूरी उपाय

Last Updated:July 08, 2026, 18:13 IST

Agriculture Tips: बारिश का मौसम मिर्च, बैंगन और फूलगोभी की नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बीज उपचार, ऊंची क्यारियां, शेड नेट, नाइलॉन जाली और उचित जल निकासी जैसी तकनीकों को अपनाकर किसान पौधों को रोगों और कीटों से बचाते हुए बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन हासिल कर सकते हैं.

नागौर. बारिश का मौसम सब्जियों की खेती करने वाले बेहद अनुकूल माना जाता है. इस समय यदि पौधशाला सही तरीके से तैयार की जाए तो मिर्च, बैंगन और सितंबर में रोपाई के लिए तैयार होने वाली फूलगोभी की फसल बेहतर उत्पादन देती है. इस मौसम में खास तौर पर पौध तैयार करते समय बीज उपचार, पौधशाला का चयन और कीट-रोग प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. इन बातों का ध्यान रखकर किसान बाद में होने वाले नुकसान से काफी हद तक बच सकते हैं.एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह ने बताया कि जुलाई का महीना मिर्च, बैंगन और फूलगोभी की शुरुआती किस्मों की नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे उपयुक्त समय है. किसानों को पौधशाला ऐसी जगह बनानी चाहिए जहां पानी का ठहराव न हो और मिट्टी भुरभुरी व उपजाऊ हो. उन्होंने बताया कि लगातार बारिश के कारण जलभराव होने पर पौध गलने लगती है, इसलिए क्यारियां जमीन से 15 से 20 सेंटीमीटर ऊंची बनानी चाहिए. इससे अतिरिक्त पानी आसानी से निकल जाता है और पौध स्वस्थ रहती है.

चारों ओर नाइलॉन की महीन जाली लगाए इसके अलावा तेज धूप और लगातार बारिश से नाजुक पौधों को बचाने के लिए पौधशाला के ऊपर करीब 6.5 फीट की ऊंचाई पर शेड नेट लगाना लाभदायक रहता है. इससे तापमान संतुलित रहता है और पौधों की बढ़वार बेहतर होती है. साथ ही पौधशाला के चारों ओर नाइलॉन की महीन जाली लगाने से सफेद मक्खी, माहू और थ्रिप्स जैसे कीट अंदर नहीं पहुंच पाते. यही कीट कई खतरनाक विषाणुजनित रोग फैलाते हैं, जिससे पूरी नर्सरी प्रभावित हो सकती है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट ने बताया कि बीज बोने से पहले उनका उपचार करना सबसे जरूरी कदम माना जाता है. ऐसे में बीजों को प्रति किलोग्राम बीज पर 2 ग्राम केप्टान या 3 ग्राम थीरम जैसे फफूंदनाशी से उपचारित करके ही बोना चाहिए. इससे डैंपिंग ऑफ, जड़ गलन और अन्य फफूंदजनित रोगों का खतरा काफी कम हो जाता है. उपचारित बीजों का अंकुरण बेहतर होता है और पौधे अधिक मजबूत बनते हैं. वहीं, पौधशाला में समय-समय पर हल्की सिंचाई करनी चाहिए. अधिक पानी देने से फफूंद का प्रकोप बढ़ सकता है, जबकि नमी की कमी होने पर अंकुरण प्रभावित होता है.

खरपतवार को नियमित रूप से हटाए किसान इस बात का भी ध्यान रखें कि वे खरपतवार को नियमित रूप से हटाते रहें, ताकि पौधों को पर्याप्त पोषण मिल सके. यदि किसी पौधे में रोग के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत निकालकर अलग कर दें. इससे संक्रमण अन्य पौधों तक न फैले. ऐसे में यदि किसान नर्सरी तैयार करते समय बीज उपचार, शेड नेट, नाइलॉन जाली, जल निकासी और नियमित देखभाल जैसी तकनीकों को अपनाएं तो मिर्च, बैंगन और फूलगोभी की फसल में बेहतर उत्पादन के साथ गुणवत्ता भी बढ़ेगी.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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