Ajab Gajab: कमलों की चादर में सजी मीरा नगरी, मेड़ता के ऐतिहासिक तालाबों में खिले सफेद और गुलाबी कमल

Last Updated:July 11, 2026, 11:01 IST
Ajab Gajab: राजस्थान की मीरा नगरी मेड़ता इन दिनों सफेद और गुलाबी कमलों की अनुपम छटा से महक उठी है. ऐतिहासिक तालाबों में खिले हजारों कमल न सिर्फ पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित कर रहे हैं, बल्कि इको-टूरिज्म, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विरासत को भी नई पहचान दे रहे हैं.
राजस्थान की मीरा नगरी इन दिनों एक अलग ही प्राकृतिक सौंदर्य से सराबोर नजर आ रही है. शहर के ऐतिहासिक राव दूदा सागर, विष्णु सरोवर, लक्ष्मी कुंड और डांगोलाई तालाब सफेद और गुलाबी कमलों से पूरी तरह सज उठे हैं. पानी की सतह पर फैली हरी-भरी पत्तियों के बीच खिले कमल ऐसे प्रतीत होते हैं मानो प्रकृति ने खुद इन जलाशयों को रंगों की चादर ओढ़ा दी हो. सुबह और शाम के समय यहां का नजारा पर्यटकों, फोटोग्राफरों और प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता.
कमलों से सजे इन तालाबों ने मेड़ता की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊर्जा दी है. सदियों पुराने ये जलाशय पहले से ही शहर की विरासत का अहम हिस्सा रहे हैं, लेकिन इस मौसम में खिले हजारों कमल इनके आकर्षण को कई गुना बढ़ा रहे हैं. स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचकर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे हैं, जबकि बाहर से आने वाले पर्यटक इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पा रहे.
कमल केवल सुंदरता का प्रतीक ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का भी अभिन्न हिस्सा माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं में इसे पवित्रता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक बताया गया है. यही वजह है कि मेड़ता के इन तालाबों में खिले सफेद और गुलाबी कमल प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को भी जीवंत करते नजर आते हैं. यह दृश्य स्थानीय विरासत को नई पहचान देने का काम कर रहा है.
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प्राकृतिक सुंदरता के साथ यह क्षेत्र पर्यटन की अपार संभावनाएं भी समेटे हुए है. पर्यटन विशेषज्ञ नरेंद्र सिंह जसनगर का मानना है कि यदि मेड़ता और आसपास के कमल से सजे तालाबों को एक इको-टूरिज्म सर्किट के रूप में विकसित किया जाए तो यह प्रदेश के प्रमुख प्रकृति पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है. इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, छोटे कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी.
विशेषज्ञों का कहना है कि इन तालाबों के संरक्षण, नियमित साफ-सफाई, बेहतर पहुंच मार्ग, बैठने की व्यवस्था और पर्यटक सुविधाओं का विकास किया जाए, तो यह स्थान देशभर के प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बन सकता है. साथ ही पक्षियों, जलीय वनस्पतियों और कमल की प्राकृतिक दुनिया को देखने का अवसर भी पर्यटकों को मिलेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी.
मीरा की भक्ति नगरी मेड़ता आज केवल अपनी ऐतिहासिक धरोहर और धार्मिक पहचान के लिए ही नहीं, बल्कि कमलों से सजे इन मनमोहक तालाबों के कारण भी चर्चा में है. सफेद और गुलाबी कमलों की अनुपम छटा यह संदेश देती है कि यदि प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण किया जाए तो वे पर्यटन, पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था तीनों के लिए वरदान साबित हो सकते हैं. यही वजह है कि इन दिनों मेड़ता के तालाब हर आने वाले पर्यटक के दिल में अपनी अलग छाप छोड़ रहे हैं.
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