‘ऐसे तो प्रमोशन ही नहीं मिलेगा…’ CAPF एक्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे 34 अफसर, SC ने केंद्र से मांगा जवाब

सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) एक्ट, 2026 की संवैधानिक वैधता अब सुप्रीम कोर्ट की कसौटी पर है. सर्वोच्च अदालत ने इस कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और जवाब दाखिल करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को होगी.
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच 34 CAPF अधिकारियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि नया कानून सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को निष्प्रभावी करने के उद्देश्य से लाया गया है, जिसमें CAPF के वरिष्ठ पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति (Deputation) को चरणबद्ध तरीके से कम करने का निर्देश दिया गया था.
याचिका में क्या कहा गया है?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि संसद को कानून में पूर्व प्रभाव से संशोधन करने का अधिकार जरूर है, लेकिन वह केवल नया कानून बनाकर किसी न्यायिक फैसले को बेअसर नहीं कर सकती. अगर अदालत के फैसले को बदलना है तो पहले उस फैसले के आधारभूत कानूनी कारणों को दूर करना होगा.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधीनियम, 2026 का उद्देश्य केवल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रभाव को समाप्त करना है. ऐसा करना संविधान में निहित शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के विपरीत है.
2025 में सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
23 मई 2025 को संजय प्रकाश बनाम भारत संघ मामले में जस्टिस एएस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने बड़ा फैसला सुनाया था. अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि सीएपीएफ काडर में सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (SAG) तक IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति वाले पदों को दो वर्षों के भीतर चरणबद्ध तरीके से कम किया जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि CAPF सेवाओं को ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप-ए सर्विसेज़ (OGAS) का हिस्सा माना जाना चाहिए. इस फैसले के बाद सीएपीएफ अधिकारियों के लिए वरिष्ठ पदों पर पदोन्नति का रास्ता खुलने की उम्मीद बढ़ी थी.
नए सीएपीएफ एक्ट में क्या प्रावधान है?
याचिका के मुताबिक, संसद से पारित नए सीएपीएफ एक्ट में यह व्यवस्था की गई है कि किसी भी अदालत के फैसले के बावजूद केंद्र सरकार भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति और सेवा शर्तों से जुड़े नियम तय कर सकेगी.
इस कानून के तहत इंस्पेक्टर जनरल (IG) स्तर के 50% पद IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से भरे जाएंगे. वहीं अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) स्तर के कम से कम 67% पद IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित रहेंगे. इसके अलावा स्पेशल डीजी और डीजी स्तर के सभी पद IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से ही भरे जाएंगे.
याचिकाकर्ताओं की मांग क्या है?
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से इस अधीनियम को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है. उनका कहना है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का उल्लंघन करता है और न्यायपालिका तथा विधायिका के बीच शक्तियों के संतुलन को भी प्रभावित करता है.
अब सभी की नजर 20 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर होगी, जब केंद्र सरकार इस कानून का पक्ष सुप्रीम कोर्ट के सामने रखेगी.



