श्रीलंका की पिचों पर क्यों नहीं बनते दोहरे शतक, सिर्फ 2 भारतीय कर पाए ये कारनामा, इस बार गिल-यशस्वी से उम्मीद क्यों?

नई दिल्ली. भविष्य के कई सुपर स्टार बल्लेबाजों के साथ भारतीय टीम श्रीलंका पहुंच चुकी है इस उम्मीद के साथ कि सालों पहले जो काम टीम के सीनियर खिलाड़ियों ने किया वो काम अब वो करके दिखाएंगे. हैरानी की बात ये है कि जिस सब कॉन्टिनेंट की पिच को बल्लेबाजी के लिए आसान माना जाता रहा है वहां भारत के सिर्फ दो बल्लेबाज दोहरा शतक लगा पाएं है.
भारत के महानतम बल्लेबाजों के इतिहास में भी अब तक केवल दो ही खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग, सचिन तेंदुलकर श्रीलंका की पिचों पर दोहरा शतक लगा पाएं है. तीसरे बल्लेबाज विराट कोहली है जो अपने मैदानों पर यह कारनामा दो बार कर सके हैं. श्रीलंकाई पिचों का धीमापन, वहां की उमस भरी गर्मी और उनका परंपरागत रूप से मजबूत स्पिन आक्रमण हमेशा भारतीय दिग्गजों की सबसे बड़ी परीक्षा लेता आया है लेकिन अब समय बदल रहा है, और भारतीय क्रिकेट की नई पीढ़ी इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार है.
श्रीलंका के खिलाफ क्यों मुश्किल है दोहरा शतक?
श्रीलंका के खिलाफ रन बनाना तकनीकी और मानसिक दोनों स्तरों पर बेहद कठिन माना जाता है. भारत के पास हमेशा से दुनिया की सबसे मजबूत बल्लेबाजी लाइन-अप रही है, फिर भी केवल तीन बल्लेबाज ही 200 का आंकड़ा छू पाए. मुथैया मुरलीधरन, रंगना हेराथ और अजंता मेंडिस जैसे गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों को हमेशा अपनी फिरकी के जाल में फंसाया.
आज भी श्रीलंकाई स्पिनर्स अपनी घरेलू पिचों पर बेहद खतरनाक साबित होते हैं. कोलंबो या गॉल की पिचें खेल के तीसरे और चौथे दिन इतनी टर्न होने लगती हैं कि वहां लंबी पारी खेलना लगभग असंभव हो जाता है. श्रीलंका की अत्यधिक उमस में 400 या 500 गेंदें खेलना किसी भी बल्लेबाज के स्टैमिना की असली परीक्षा होती है. मौजूदा टीम में यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल इस ऐतिहासिक क्लब में शामिल होने की रेस में सबसे आगे नजर आते हैं.
लंका के खिलाफ डंका बजाने वाले बल्लेबाज
विस्फोटक अंदाज में बल्लेबाजी करने के लिए पहचाने जाने वाले सहवाग ने श्रीलंका के खिलाफ 2009 में 293 रनों की पारी खेली थी. इसके आलावा उन्होंने 2008 में श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 201 रन बनाए थे. वो मैच गाले इंटरनेशनल स्टेडियम में हुआ था. पिछले साल टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके कोहली ने श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में 2 बार दोहरा शतक लगाया है. उन्होंने नवंबर, 2017 में नागपुर में खेले गए टेस्ट में 213 रन बनाए थे. इसके अगले ही टेस्ट में उन्होंने दूसरा दोहरा शतक लगा दिया था. दिसंबर, 2017 में दिल्ली में हुए टेस्ट में कोहली ने 243 रनों की शानदार पारी खेली थी. क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने जुलाई, 2010 में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में हुए टेस्ट में 203 रनों की शानदार पारी खेली थी, जिसमें उन्होंने 23 चौके और 1 छक्का जड़ा था. साफ है श्रीलंका में सिर्फ दो दोहरे शतक ही लग पाए है.
यशस्वी जायसवाल की आक्रामकता
इस समय भारत की तरफ से श्रीलंका के खिलाफ दोहरा शतक बनाने के सबसे बड़े दावेदार यशस्वी जायसवाल हैं. जायसवाल के पास वह सब कुछ है जो एक मैराथन पारी खेलने के लिए जरूरी होता है. यशस्वी ने अपने शुरुआती टेस्ट करियर में ही बैक-टू-बैक दोहरे शतक लगाकर यह साबित कर दिया है कि उन्हें बड़े स्कोर बनाना पसंद है. बाएं हाथ के इस बल्लेबाज के पास स्पिनरों के खिलाफ कदमों का बेहतरीन इस्तेमाल है, जो श्रीलंका में सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है, सहवाग की तरह जायसवाल भी खेल को बहुत तेजी से आगे बढ़ाते हैं, जिससे गेंदबाजों को सेट होने का मौका नहीं मिलता.
शुभमन गिल की क्लास और टाइमिंग
शुभमन गिल को भारतीय बल्लेबाजी का भविष्य माना जाता है. नंबर 4 पर पैर जमाने के बाद गिल के खेल में एक नई परिपक्वता आई है जो उन्हें इस रेस में जायसवाल के ठीक बगल में खड़ा करती है. गिल के पास क्रीज पर घंटों बिताने का धैर्य है. श्रीलंका जैसी टर्निंग पिचों पर जहां संयम की जरूरत होती है, गिल की तकनीक सबसे सटीक बैठती है. उपमहाद्वीप की पिचों पर कलाई के सहारे रन चुराना एक कला है, और गिल इसमें माहिर हैं. वह स्पिनरों को आसानी से गैप में खेलकर फील्डर्स को थका सकते हैं.
सहवाग, सचिन और कोहली के विशिष्ट क्लब में शामिल होना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए एक सपने जैसा होगा. जहां यशस्वी जायसवाल अपनी बेखौफ आक्रामकता के दम पर श्रीलंका के स्पिन जाल को ध्वस्त करने की क्षमता रखते हैं, वहीं शुभमन गिल अपनी क्लास और सॉलिड तकनीक से श्रीलंकाई गेंदबाजों को पस्त कर सकते हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी सीरीज में इन दोनों में से कौन सा युवा शेर श्रीलंका की धरती पर इतिहास लिखता है.



