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राजस्थान की इस पहाड़ी में छिपा है प्रकृति का अनोखा रहस्य! यहां रुद्राक्ष स्वरूप में एक साथ विराजते हैं शिव-पार्वती

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राजस्थान का रहस्यमयी शिवधाम, जहां रुद्राक्ष स्वरूप में विराजते हैं शिव-पार्वती

Last Updated:August 04, 2026, 12:14 IST

Rudraksha Shiva Temple Jhunjhunu: राजस्थान के झुंझुनूं जिले के गुढ़ागौड़जी स्थित प्राचीन शिवधाम अपनी अनोखी मान्यताओं और प्राकृतिक शिव-पार्वती स्वरूप के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है. यहां किसी शिल्पकार ने मूर्ति नहीं बनाई, बल्कि चट्टानों के बीच प्राकृतिक रूप से उभरे रुद्राक्ष स्वरूप की पूजा होती है. 182 सीढ़ियां चढ़कर गुफा तक पहुंचना अपने आप में रोमांचक अनुभव है. सावन में यहां हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते हैं. मान्यता है कि यहां जोड़े से जलाभिषेक करने पर वैवाहिक और प्रेम संबंधों में मजबूती आती है.

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झुंझुनूं: क्या आपने कभी ऐसा शिवधाम देखा है, जहां किसी मूर्ति की स्थापना नहीं की गई हो. स्वयं प्रकृति ने ही भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य स्वरूप गढ़ दिया हो. क्या ऐसी जगह की कल्पना की जा सकती है, जहां सैकड़ों वर्षों से चट्टानों के बीच उभरे प्राकृतिक रुद्राक्ष स्वरूप को लोग साक्षात शिव-पार्वती का रूप मानकर पूजा करते हों. राजस्थान के झुंझुनूं जिले के गुढ़ागौड़जी कस्बे में स्थित शिवधाम इन्हीं रहस्यों और आस्था का संगम है. यहां पहुंचने वाला हर श्रद्धालु सिर्फ दर्शन ही नहीं करता, बल्कि प्रकृति की उस अद्भुत कारीगरी को भी निहारता है.

त्रिवेणी घाट के किनारे 142 फीट ऊंची पहाड़ी पर प्राकृतिक गुफा के भीतर यह प्राचीन शिवधाम मौजूद है. यह जगह वर्षों से श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है. मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां भगवान शिव और माता पार्वती का स्वरूप है. यह स्वरूप शिल्पकार ने नहीं तराशा, बल्कि चट्टानों के बीच प्राकृतिक रूप से रुद्राक्ष जैसी आकृति में खुद उभरा है. मंदिरों के पुजारियों का कहना है कि इस तरह का प्राकृतिक शिव-पार्वती स्वरूप कहीं और देखने को नहीं मिलता.

इस शिवधाम तक पहुंचना किसी एडवेंचर से कम नहीं

इस शिवधाम तक पहुंचना भी किसी एडवेंचर से कम नहीं है. श्रद्धालुओं को पहले पहाड़ी पर बनी 182 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है. रास्ते में चारों ओर फैली प्राकृतिक चट्टानें और ऊपर से दिखाई देने वाला मनोरम दृश्य मन को अलग ही अहसास देता है. गुफा के भीतर दिन के समय भी घना अंधेरा रहता है. बिना दीपक या रोशनी के भगवान शिव और माता पार्वती के इस रुद्राक्ष स्वरूप के दर्शन करना मुश्किल है. जैसे-जैसे श्रद्धालु गुफा के अंदर जाते हैं वैसे-वैसे वातावरण भी शान्त होने लगता है और कोई आवाज नहीं आती. केवल भक्तों के चलने की आवाज सुनाई देती है.

पारदर्शी सुरक्षा शिला से रखा गया है सुरक्षित

मंदिर के पुजारियों ने बताया कि समय के साथ लगातार जलाभिषेक और प्राकृतिक क्षरण के कारण यहां मौजूद स्वयंभू स्वरूप धीरे-धीरे घिसने लगा था. तब एक अनोखा निर्णय लिया. स्वरूप पर किसी प्रकार का रंग-रोगन या निर्माण कराने की बजाय उसे पारदर्शी सुरक्षा शिला आवरण से सुरक्षित कर दिया गया. इससे प्राकृतिक स्वरूप भी सुरक्षित रहा और श्रद्धालु आज भी बिना किसी नुकसान के जलाभिषेक कर अपनी आस्था व्यक्त कर रहे हैं.

राजा अजीत सिंह ने कराया था कुंड और धूणा का निर्माण

मंदिर का इतिहास भी उतना ही दिलचस्प है. मंदिर के पुजारी भोलादास के अनुसार खेतड़ी रियासत के तत्कालीन नरेश अजीत सिंह ने यहां सबसे पहले कुंड और धूणा का निर्माण करवाया था. इसके बाद स्थानीय भामाशाहों और ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर का लगातार विकास होता रहा. आज भी यहां होने वाले अधिकांश निर्माण और व्यवस्थाएं जनसहयोग से संचालित होती हैं. पहाड़ी की तलहटी में द्वारिकाधीश गोसेवा गोशाला भी संचालित होती है. यहां बेसहारा देसी गायों की सेवा और संरक्षण किया जाता है.

रुद्राक्ष स्वरूप पर जलाभिषेक करने से नहीं टूटती जोड़ी

इस शिवधाम की एक और विशेष पहचान यहां के पुजारी भोलादास की साधना है. उन्होंने विश्व शांति की कामना के लिए वर्ष 2006 से 2024 तक लगातार 18 वर्षों तक कठोर अग्नि तपस्या की थी. हर वर्ष गंगादशमी पर यहां विशाल प्रसाद वितरण किया जाता है. वहीं, सावन माह में यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है. इस दौरान जलाभिषेक के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. मान्यता है कि इस शिवधाम में जोड़े से पति-पत्नी या प्रेमी प्रेमिका भगवान शिव और माता पार्वती के इस रुद्राक्ष स्वरूप पर जलाभिषेक करते हैं तो उनकी जोड़ी कभी नहीं टूटती है.

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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Location :

Jhunjhunu,Rajasthan

First Published :

August 04, 2026, 12:14 IST

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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