Health

क्या आप भी रोज पीते हैं दूध? जान लें ये जरूरी बातें, इन हालातों में बन सकता है जहर

सतना. दूध को हमेशा से प्रकृति का संपूर्ण आहार माना जाता है. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर किसी की डाइट में इसका खास महत्व है लेकिन क्या हर बार दूध पीना सुरक्षित होता है. इसका जवाब है, नहीं. कई बार दुधारू पशु की बीमारी, इलाज के दौरान दी गई दवाएं या गलत तरीके से दूध निकालने की प्रक्रिया दूध को स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक बना सकती है. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि किन परिस्थितियों में गाय या भैंस का दूध पीना चाहिए और कब इससे दूरी बनाना ही समझदारी है.

सतना जिला पशु चिकित्सालय प्रभारी डॉ बृहस्पति भारती ने लोकल 18 को बताया कि पहले के समय में लोग अक्सर कच्चा दूध पी लिया करते थे लेकिन आज ऐसा करना सुरक्षित नहीं माना जाता. कई दुधारू पशुओं में ऐसी संक्रामक बीमारियां विकसित हो जाती हैं, जिनके बैक्टीरिया या अन्य सूक्ष्म जीव दूध में पहुंच सकते हैं, इसलिए दूध को हमेशा अच्छी तरह उबालकर ही पीना चाहिए. उबालने से कई हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है.

ऑक्सीटोसिन वाला दूध पहुंचा सकता है नुकसानविशेषज्ञ बताते हैं कि कई बार बछड़े की मौत के बाद पशु दूध देना कम या बंद कर देता है. ऐसे में कुछ लोग अवैध रूप से ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाकर दूध निकलवाने की कोशिश करते हैं. यह इंजेक्शन पूरी तरह प्रतिबंधित है, फिर भी कई जगह इसका इस्तेमाल किया जाता है. इंजेक्शन देने के तुरंत बाद निकाला गया दूध बिल्कुल नहीं पीना चाहिए क्योंकि इसमें दवा के रासायनिक अंश मौजूद हो सकते हैं. लंबे समय तक ऐसे दूध का सेवन करने से बच्चों में समय से पहले यौवन आने, पुरुषों में हार्मोनल असंतुलन और महिलाओं में गर्भाशय संबंधी समस्याओं या बांझपन का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा पेटदर्द, उल्टी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं.

बीमार पशु का दूध भी हो सकता है खतरनाकअगर दुधारू पशु थनैला, ब्रुसेलोसिस, टीबी या किसी अन्य गंभीर संक्रामक बीमारी से पीड़ित है, तो उसका दूध नहीं पीना चाहिए. ऐसी बीमारियों के बैक्टीरिया दूध के जरिए इंसानों तक पहुंच सकते हैं और संक्रमण फैलने का खतरा रहता है, इसलिए यदि पशु बीमार है, तो उसके दूध का उपयोग करने से पहले पशु चिकित्सक की सलाह जरूर लें.

इलाज के दौरान रखें विशेष सावधानीजब किसी दुधारू पशु का इलाज चल रहा हो और उसे एंटीबायोटिक या हार्मोनल दवाएं दी जा रही हों, तब कुछ दिनों तक उसका दूध नहीं पीना चाहिए. डॉ भारती के अनुसार, इन दवाओं के अंश दूध में आ जाते हैं, जो इंसानों के शरीर पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं, इसलिए इलाज पूरा होने के बाद पशु चिकित्सक द्वारा बताए गए विदड्रॉल पीरियड तक दूध का सेवन टालना ही बेहतर होता है.

खीस का दूध इंसानों के लिए नहीं होतापशु के बच्चा देने के बाद शुरुआती 5 से 7 दिनों तक निकलने वाला सामान्य दूध से अलग दूध जिसे खीस या कोलोस्ट्रम कहा जाता है, जिसमें प्रोटीन और रोग प्रतिरोधक तत्व बहुत अधिक मात्रा में होते हैं, जो नवजात बछड़े के लिए जरूरी होता है. यह दूध इंसानों के नियमित सेवन के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता और इसे बछड़े के लिए ही छोड़ देना चाहिए.

रेबीज के मामलों में भी बरतें सतर्कतायदि किसी गाय या भैंस को पागल कुत्ते ने काट लिया हो या उसमें रेबीज का संदेह हो, तो उसका कच्चा दूध बिल्कुल नहीं पीना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे दूध से वायरस के संपर्क का सैद्धांतिक जोखिम बना रहता है, खासकर यदि मुंह में छाले या शरीर पर खुले घाव हों. हालांकि अच्छी तरह उबाले गए या पाश्चुरीकृत दूध में रेबीज वायरस जीवित नहीं रहता क्योंकि यह ऊंचे तापमान में निष्क्रिय हो जाता है. फिर भी ऐसे मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj