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राजस्थान से गुजरात तक छाई आबू सौंफ-440, ऊंझा मंडी की सौंफ को GI टैग, जानें क्यों खास है यहां की सौंफ

Last Updated:August 11, 2026, 19:04 IST

Unjha Fennel GI Tag: गुजरात की ऊंझा मंडी की सौंफ को जीआई टैग मिलने से इसकी खास पहचान और मजबूत हुई है. ऊंझा मंडी सौंफ के बड़े कारोबार के लिए जानी जाती है, जहां सिरोही की आबू सौंफ-440 किस्म समेत करीब 90 प्रतिशत सौंफ बिकने की जानकारी सामने आई है. आबू सौंफ-440 को अपनी गुणवत्ता और विशेष खूबियों के कारण बाजार में महत्वपूर्ण माना जाता है. जीआई टैग मिलने से क्षेत्रीय उत्पाद की पहचान को बढ़ावा मिलने और किसानों व कारोबारियों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है. ऊंझा मंडी में राजस्थान समेत अन्य क्षेत्रों से भी बड़ी मात्रा में सौंफ पहुंचती है, जिससे यह देश के प्रमुख सौंफ व्यापार केंद्रों में शामिल है.

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सिरोही : गुजरात में एशिया की सबसे बड़ी मसाला मंडी ऊंझा मंडी में बिकने वाली सौंफ को ज्योग्राफिकल इंडिकेशन्स (जीआई) टैग मिला है. इस मंडी में सिरोही की प्रसिद्ध और प्रीमियम क्वालिटी सौंफ की किस्म माने जाने वाली ‘आबू सौंफ 440‘ के अलावा जिले की करीब 90 प्रतिशत सौंफ बिकने के लिए जाती है. इसकी बड़ी वजह ऊंझा मंडी में मिलने वाले अच्छे दाम और जिले में कोई मसाला मंडी नहीं होना है. सौंफ उत्पादन के लिए जिले का नाम देशभर में प्रसिद्ध है. यहां की जलवायु सौंफ के लिए काफी अच्छी मानी जाती है. ऐसे में जिले की सौंफ की पहचान को अब गुजरात की ऊंझा मंडी में जीआई टैग के रूप में पहचान मिली है.

जिले के प्रगतिशील बायोटेक किसान इशाक अली के अनुसार जिले में करीब 8 हजार हेक्टेयर में सौंफ की खेती होती है. जिसमें करीब 20 हजार टन सौंफ का उत्पादन होता है. जिले की 90 प्रतिशत सौंफ बिकने के लिए ऊंझा मंडी ही जाती है. यहां की आबू सौंफ 440 को पीपीवी एंड एफआर अधिनियम 2001 में पंजीकृत किस्म के रूप में शामिल किया गया हैं. ये किस्म उन्होंने करीब 32 वर्ष की मेहनत के बाद कई ग्रेडिंग के बाद तैयार की हैं. इसकी विश्वविद्यालयों में 3 साल ट्रायल के बाद किस्म के खास गुणों की पुष्टि भी की जा चुकी है. उन्होंने अपने फार्म पर 100 तरह के सौंफ के जिंस का जिंस बैंक भी स्थापित किया है. जिले के किसानों का कहना है कि अगर सरकार सौंफ के लिए जिले में मंडी स्थापित करती, तो जीआई टैग की यह पहचान राजस्थान और जिले को मिल सकती है.

ये है जीआई टैग मिलने का मतलबभौगोलिक संकेतक अधिनियम 1999 में किसी उत्पाद को जीआई टैग तब दिया जाता है, जब उसकी भौगोलिक पहचान को पक्का किया जाता है. जो उत्पाद किसी खास जगह पर बनते या उगाए जाते है. वहीं ऊंझा मंडी केवल एक बिक्री का स्थान है. यहां सिरोही की आबू सौंफ के अलावा कई स्थानों से सौंफ बिकने के लिए आती है. यहां बिकने वाली बेस्ट क्वालिटी की सौंफ में आबू सौंफ को शामिल किया जाता है.

जोधपुर एसएबीसी के डायरेक्टर भी उठा चुके सवालजोधपुर के संस्थान साउथ एशिया बायोटेक्नोलोजी सेंटर एसएबीसी के निदेशक ने भी ऊंझा मंडी को मिले इस टैग को लेकर सवाल किए है. जिसमें सौंफ के ओरिजनल और प्राइमरी प्रोडक्शन स्थान, राजस्थान की सौंफ के मुकाबले ज्यादा वेपोराजेबल ऑयल और क्रूड फाइबर की मात्रा और टेस्टिंग में सेंपल का ओथोराइजेशन और वर्किंग प्रोसेस के वैज्ञानिक आधार को लेकर सवाल किए गए है.

About the AuthorJagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

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Sirohi,Rajasthan

First Published :

August 11, 2026, 19:04 IST

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