न 10 हजार स्टेप्स, न सप्लीमेंट्स… 42 साल की महिला ने बताईं फिट रहने की 9 सरल और असरदार आदतें

Fitness Habits: फिट रहने का मतलब सिर्फ जिम जाना नहीं फिटनेस को लेकर अक्सर हमारे दिमाग में एक तय तस्वीर होती है-हर दिन 10 हजार कदम, घंटों जिम में एक्सरसाइज और कई तरह के सप्लीमेंट्स, लेकिन क्या फिट रहने के लिए वाकई इतना सब करना जरूरी है? 42 साल की फिटनेस इंफ्लुएंसर ऐनी ने सोशल मीडिया पर अपनी डेली फिटनेस रूटीन शेयर करते हुए इस सोच को थोड़ा अलग नजरिए से देखने की कोशिश की है. उनका कहना है कि वह न तो रोज 10 हजार कदम चलती हैं और न ही किसी खास सप्लीमेंट पर निर्भर रहती हैं.
इसके बजाय वह अपनी डाइट, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, नींद के बीच खाने का अंतर और शरीर की प्रोग्रेस पर ध्यान देती हैं. उन्होंने अपनी ऐसी 9 आदतें बताई हैं, जिन्हें वह लंबे समय तक फिटनेस बनाए रखने के लिए फॉलो करती हैं. हालांकि, उनकी हर आदत हर व्यक्ति के लिए सही हो, यह जरूरी नहीं है. खासकर फास्टिंग और किसी भी तरह के सप्लीमेंट या डाइजेस्टिव प्रोडक्ट को अपनाने से पहले अपनी जरूरत समझना बेहतर है.
ऐनी की 9 फिटनेस आदतें
1. रात में 12 घंटे का फास्टिंग गैप
ऐनी के मुताबिक वह रात के खाने और अगले दिन के नाश्ते के बीच करीब 12 घंटे का अंतर रखती हैं. इसे ओवरनाइट फास्टिंग कहा जा सकता है. उनका मानना है कि इससे खाने की आदत को व्यवस्थित रखने में मदद मिलती है. हालांकि, फास्टिंग के फायदे हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं और इसे किसी बीमारी के इलाज के तौर पर नहीं देखना चाहिए.
2. वाइब्रेशन प्लेट और रेड लाइट थेरेपी
सुबह की दिनचर्या में वह करीब 15 मिनट वाइब्रेशन प्लेट का इस्तेमाल करती हैं. इसके साथ चेहरे पर रेड लाइट थेरेपी भी लेती हैं. उनका दावा है कि इससे शरीर में ब्लड फ्लो और मांसपेशियों की जकड़न से जुड़ी परेशानी में मदद मिलती है. इन तरीकों को लेकर उपलब्ध वैज्ञानिक सबूत अलग-अलग स्तर के हैं, इसलिए इन्हें फिटनेस का अनिवार्य हिस्सा मानना सही नहीं होगा.
3. दिन की शुरुआत नींबू पानी से
ऐनी सुबह उठकर करीब 500 से 600 मिलीलीटर गुनगुना नींबू पानी पीती हैं. इसका सबसे सीधा फायदा शरीर को पानी देना है. नींबू स्वाद और कुछ विटामिन C जरूर देता है, लेकिन केवल नींबू पानी को कोई खास डिटॉक्स ड्रिंक समझना जरूरी नहीं है.
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4. प्रोटीन और फाइबर पर ध्यान
वह रोज करीब 135 ग्राम प्रोटीन और कम से कम 35 ग्राम फाइबर लेने की बात कहती हैं. अपनी डाइट को व्यवस्थित रखने के लिए वह मोबाइल ऐप से खाने का रिकॉर्ड भी रखती हैं. आम लोगों के लिए प्रोटीन की सही मात्रा शरीर के वजन, उम्र और एक्टिविटी के हिसाब से अलग हो सकती है.
वर्कआउट से लेकर डाइट तक पूरा फोकस
5. हफ्ते में चार दिन वेट ट्रेनिंग
ऐनी अपनी फिटनेस रूटीन में वेट ट्रेनिंग को खास जगह देती हैं. वह हफ्ते में करीब चार बार स्ट्रेंथ वर्कआउट करती हैं और धीरे-धीरे वजन बढ़ाने पर ध्यान देती हैं. एक ही एक्सरसाइज को सही तकनीक के साथ लगातार करना भी प्रोग्रेस का हिस्सा हो सकता है. हर दिन नई एक्सरसाइज करना जरूरी नहीं.
6. कम शुगर और कम प्रोसेस्ड फूड
उनकी डाइट में शुगर कम रखने और पैकेट वाले प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाने पर जोर रहता है. वह होल फूड्स यानी दाल, सब्जियां, फल, अनाज, अंडे या अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देती हैं. ग्लूटेन को कम करना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है, जब तक कोई खास मेडिकल वजह न हो.
7. 2,000 से ज्यादा कैलोरी का सेवन
एक दिलचस्प बात यह है कि वह बहुत कम खाने के बजाय अपनी कैलोरी और मैक्रोज पर नजर रखती हैं. उन्होंने बताया कि वह रोज 2,000 से ज्यादा कैलोरी लेती हैं. उनका लक्ष्य पर्याप्त ऊर्जा और मसल्स को सपोर्ट करने वाला पोषण पाना है. यही वजह है कि फिटनेस का मतलब हमेशा कम खाना नहीं होता.
8. खाने के साथ डाइजेस्टिव एंजाइम्स
ऐनी ने खाने के साथ डाइजेस्टिव एंजाइम्स लेने और बिटर्स का इस्तेमाल करने की बात भी कही है. उनका मानना है कि इससे पाचन बेहतर रहता है और ब्लोटिंग कम हो सकती है. हालांकि, स्वस्थ व्यक्ति को नियमित रूप से ऐसे प्रोडक्ट लेने की जरूरत हो, यह जरूरी नहीं है.
9. शरीर की प्रोग्रेस पर नजर
वह अपनी बॉडी प्रोग्रेस को भी ट्रैक करती हैं. इसके लिए घर पर इस्तेमाल होने वाली बॉडी कंपोजिशन मशीन का इस्तेमाल करती हैं. इससे वजन के अलावा शरीर में फैट और मसल्स जैसे आंकड़ों का अंदाजा लगाया जा सकता है. हालांकि, घरेलू मशीनों के आंकड़ों को हमेशा बिल्कुल सटीक मेडिकल रिपोर्ट नहीं मानना चाहिए.
फिटनेस में सबसे जरूरी है निरंतरता
ऐनी की रूटीन से एक बात साफ समझ आती है कि फिटनेस का कोई एक फॉर्मूला नहीं होता. किसी के लिए 10 हजार कदम आसान हो सकते हैं तो किसी के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग ज्यादा उपयोगी हो सकती है. असल फर्क रोज की एक्टिविटी, संतुलित खाना, पर्याप्त नींद और लंबे समय तक बनी रहने वाली अच्छी आदतों से पड़ता है. इसलिए सोशल मीडिया पर दिखने वाली किसी भी फिटनेस रूटीन को ज्यों का त्यों अपनाने के बजाय अपनी उम्र, शरीर और जरूरत के हिसाब से बदलाव करना ज्यादा समझदारी है.



