Success Story: रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर, फिर भी नहीं मानी हार; झुंझुनूं की लक्ष्मी बनीं टीम इंडिया की उपकप्तान

Last Updated:August 13, 2026, 11:37 IST
Lakshmi Shekhawat Success Story: झुंझुनूं के झाझड़ गांव की लक्ष्मी शेखावत हांगकांग में आयोजित एशियन नेटबॉल चैंपियनशिप-2026 में भारतीय टीम की उपकप्तान बनी हैं. वे राजस्थान से चुनी गईं एकमात्र खिलाड़ी हैं. स्कूल के दिनों में हुए सड़क हादसे में रीढ़ की हड्डी (L-1, L-2) में गंभीर फ्रैक्चर होने के बावजूद उन्होंने योग और जिम के दम पर मैदान में सफल वापसी की. उनके भाई स्वराज सिंह के मार्गदर्शन और लक्ष्मी के अटूट हौसले ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है.
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Lakshmi Shekhawat Success Story: कहते हैं कि अगर इंसान में कुछ कर गुजरने का जुनून हो, तो वह अपनी मेहनत और अटूट इरादों से हर कठिन मुकाम को हासिल कर सकता है. इस कहावत को झुंझुनूं जिले की बेटी लक्ष्मी शेखावत ने सच कर दिखाया है. एक भयानक सड़क हादसे और रीढ़ की हड्डी में गंभीर फ्रैक्चर का सामना करने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और आज वे भारतीय नेटबॉल टीम की उपकप्तान के रूप में देश का नाम रोशन कर रही हैं.
लक्ष्मी शेखावत झुंझुनूं जिले के झाझड़ गांव की रहने वाली हैं. वे 6 से 15 अगस्त 2026 तक हांगकांग में आयोजित हो रही एशियन नेटबॉल चैंपियनशिप-2026 में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. इस प्रतियोगिता में वे राजस्थान से चुनी गईं एकमात्र खिलाड़ी हैं. उनके बेहतरीन खेल प्रदर्शन और कुशल नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें टीम इंडिया के उपकप्तान की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है.
सड़क हादसे में टूटी रीढ़ की हड्डी, योग और जिम से की वापसीलक्ष्मी का खेल का सफर चुनौतियों से भरा रहा है. स्कूल के दिनों में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी के L-1 और L-2 हिस्से में गंभीर फ्रैक्चर हो गया था. उस समय डॉक्टरों और परिस्थितियों को देखकर खेल के मैदान में वापसी करना लगभग असंभव सा लगने लगा था. लंबे समय तक चले इलाज के दौरान शरीर को हिलाना-डुलना भी बेहद मुश्किल था. लेकिन लक्ष्मी ने अपनी इच्छाशक्ति नहीं खोई. डॉक्टरी इलाज के साथ-साथ उन्होंने नियमित योग और जिम के जरिए अपने शरीर को फिर से मजबूत बनाया और दोबारा नेटबॉल कोर्ट पर कदम रखा.
भाई स्वराज सिंह बने मार्गदर्शक और संबललक्ष्मी की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके बड़े भाई और उप जिला शिक्षा अधिकारी (ADEO) स्वराज सिंह का अहम योगदान रहा है. उन्होंने बचपन से ही लक्ष्मी की अच्छी लंबाई और एथलेटिक फिटनेस को देखकर नेटबॉल खेलने के लिए प्रेरित किया था. हादसे के बाद जब लक्ष्मी मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुकी थीं, तब भी उनके भाई ने उनका हौसला बनाए रखा और मैदान में लौटने के लिए लगातार प्रेरित किया.
दूसरी बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिखेरा जलवायह दूसरा मौका है जब लक्ष्मी अंतरराष्ट्रीय नेटबॉल चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. इससे पहले भी वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने खेल का लोहा मनवा चुकी हैं. लक्ष्मी की यह सफलता आज देश की लाखों बेटियों और महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है. उनका मानना है कि अगर बेटियों को सही अवसर और परिवार का सहयोग मिले, तो वे हर क्षेत्र में सफलता की नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jhunjhunu,Jhunjhunu,Rajasthan
First Published :
August 13, 2026, 11:37 IST



