डांगावास हत्याकांड पर जयपुर में उबाल, पीड़ित परिवार ने पूछा- 40 आरोपी बरी तो फिर 5 दलितों के कातिल कौन?

जयपुर. राजस्थान के नागौर जिले के डांगावास गांव में 11 साल पहले हुए पांच दलितों के सामूहिक हत्याकांड का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है. मामले में 40 आरोपियों के बरी होने के खिलाफ जयपुर में दलित समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया और न्याय की मांग उठाई. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर सभी 40 आरोपी निर्दोष हैं तो फिर 14 मई 2015 को पांच दलितों की बेरहमी से हत्या आखिर किसने की? समुदाय ने मांग की है कि सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करे और मामले की दोबारा कानूनी लड़ाई लड़ी जाए. डांगावास की घटना जमीन विवाद से शुरू हुई थी और देखते ही देखते हिंसा में बदल गई थी. आरोप था कि बड़ी संख्या में लोगों ने हमला किया और ट्रैक्टर से लोगों को कुचला गया.
घटना में पांच दलितों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे. करीब 11 साल बाद अदालत से सभी 40 आरोपियों के बरी होने के बाद पीड़ित परिवारों की पीड़ा और सवाल एक बार फिर सामने आए हैं. डांगावास मामले में आरोपियों के बरी होने के विरोध में जयपुर में दलित समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अदालत के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि पांच लोगों की हत्या के लिए जिम्मेदार कौन था. उन्होंने मामले में जांच एजेंसी की ओर से हाईकोर्ट में अपील किए जाने की मांग की. प्रदर्शन के दौरान पीड़ित परिवारों के सदस्यों ने घटना से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए. उनका कहना है कि उन्होंने घटना के आरोपियों की पहचान की थी और मुकदमे के दौरान उनके खिलाफ गवाही भी दी, इसके बावजूद सभी आरोपियों का बरी होना उनके लिए समझ से परे है.
पिता की आंखों के सामने हुई थी हत्या
डांगावास हत्याकांड के पीड़ित परिवार से जुड़े गोविंद मेघवाल 11 साल से इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं. गोविंद के अनुसार, उनके पिता पांचाराम भी इस घटना में मारे गए थे. गोविंद का कहना है कि हमले में करीब 250 लोग शामिल थे और जिन 40 लोगों को आरोपी बनाया गया, उनके खिलाफ परिवार की ओर से गवाही दी गई थी. गोविंद ने कहा कि आरोपियों की पहचान करने के बावजूद सभी का बरी हो जाना परिवार के लिए बेहद परेशान करने वाला है. उन्होंने कहा कि अब परिवार हाईकोर्ट में अपील की दिशा में आगे बढ़ेगा और न्याय की लड़ाई जारी रखेगा.
मेरी आंखों के सामने पिता को ट्रैक्टर से कुचला
पांचाराम के दूसरे बेटे किशनाराम उस समय मौके पर मौजूद थे. उन्होंने बताया कि उनकी आंखों के सामने हमला हुआ. उनके मुताबिक, हमलावरों ने लाठियों से मारपीट की और ट्रैक्टर से लोगों को कुचल दिया. इस हमले में उनके पिता समेत परिवार के अन्य लोगों की मौत हो गई. किशनाराम खुद भी हमले में घायल हुए थे. उनका कहना है कि घटना को 11 साल बीत चुके हैं, लेकिन उन्हें आज भी उस दिन की पूरी घटना याद है. उन्होंने कहा कि मुझे आज भी सभी की पहचान याद है. मेरी आंखों के सामने मेरे पिता को मार दिया गया, फिर आरोपियों को बरी कर दिया गया. अब सवाल यही है कि कातिल कौन है?
23 बीघा जमीन को लेकर था विवाद
डांगावास में यह पूरा विवाद करीब 23 बीघा जमीन को लेकर शुरू हुआ था. दोनों पक्ष जमीन पर अपना अधिकार बताते थे. लंबे समय से चल रहा विवाद 14 मई 2015 को उस समय हिंसक हो गया, जब दोनों पक्षों के बीच पंचायत के दौरान तनाव बढ़ गया. आरोप है कि इसके बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे और हमला किया गया. ट्रैक्टर से कुचलने और लाठी-डंडों से मारपीट के आरोप भी लगाए गए. घटना के बाद गांव में तनाव फैल गया था और पुलिस-प्रशासन ने हालात संभालने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई थी.
पीड़ित परिवार का सवाल अब भी कायम
मामले की जांच के बाद 40 लोगों को आरोपी बनाया गया था. मामले में सीबीआई जांच भी हुई. इसके बाद विशेष एससी-एसटी अदालत ने सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया. अदालत के फैसले के बाद अब पीड़ित परिवार और दलित समुदाय फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की मांग कर रहे हैं. 11 साल बाद भी डांगावास के पीड़ित परिवारों के सामने वही सवाल खड़ा है कि अगर 40 आरोपी दोषी नहीं हैं, तो पांच दलितों की हत्या किसने की? परिवारों का कहना है कि न्याय की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक उन्हें इस सवाल का जवाब नहीं मिल जाता.



