Health

Cough care tips : सुबह की जकड़न, सीने में सीटी की आवाज…जानिए कब सामान्य है खांसी, कब बन सकती है TB?

फरीदाबाद. मौसम बदलते ही बहुत से लोगों को खांसी, गले में खराश और जुकाम की शिकायत होने लगती है. कई बार यह परेशानी कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन अगर खांसी बार-बार हो रही है या लगातार बनी हुई है, तो इसे सिर्फ मौसम का असर मानकर छोड़ना ठीक नहीं है. खांसी एलर्जी, वायरल इंफेक्शन या अस्थमा की वजह से हो सकती है. कुछ मामलों में यही खांसी टीबी या फेफड़ों की गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि सामान्य खांसी और चिंता वाली खांसी में फर्क कैसे किया जाए. लोकल 18 से अमृता हॉस्पिटल (फरीदाबाद) में फेफड़ों के विशेषज्ञ डॉ. अर्जुन खन्ना बताते हैं कि सामान्य जुकाम, गले में खराश या हल्के इंफेक्शन की वजह से होने वाली खांसी अक्सर चार से पांच दिन में कम होने लगती है. अगर खांसी इससे ज्यादा समय तक रहती है, साथ में बुखार आता है, पीला बलगम निकलता है या खांसी के साथ खून आता है, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए.

कैसे पहचाने एलर्जी और अस्थमा की खांसी 

डॉ. अर्जुन खन्ना बताते हैं कि एलर्जी, अस्थमा और इंफेक्शन की खांसी कई बार एक जैसी लग सकती है, लेकिन कुछ बातों से इनके बीच फर्क समझा जा सकता है. इंफेक्शन की वजह से होने वाली खांसी अक्सर बुखार और शरीर में कमजोरी के साथ आती है. एलर्जी और अस्थमा में छाती से सीटी जैसी आवाज आ सकती है. मौसम बदलने पर खांसी बढ़ना भी इसका संकेत हो सकता है. सुबह उठने के बाद खांसी होना, धूल मिट्टी के संपर्क में आने पर खांसी शुरू होना, झाड़ू लगने के बाद परेशानी बढ़ना या तेज परफ्यूम और डियो की गंध से खांसी आना एलर्जी या अस्थमा से जुड़ा हो सकता है.

दो हफ्ते की खांसी में ये जांच जरूरी

डॉ. अर्जुन खन्ना बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को दो हफ्ते से ज्यादा समय तक खांसी रहती है, तो टीबी की जांच कराना जरूरी हो जाता है. लंबे समय तक चलने वाली खांसी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे मामलों में डॉक्टर छाती का एक्स-रे और बलगम की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं. फेफड़ों के कैंसर में भी लंबे समय तक खांसी रह सकती है, खासकर उन लोगों में जिनमें स्मोकिंग की पुरानी आदत रही हो या प्रदूषण का ज्यादा एक्सपोजर रहा हो. खांसी के साथ खून आना, वजन कम होना और लगातार कमजोरी जैसे लक्षण हों तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए.

हर खांसी में एंटीबायोटिक सही नहीं

डॉ. अर्जुन खन्ना के मुताबिक, हर खांसी में एंटीबायोटिक लेने की जरूरत नहीं होती है. बहुत से लोग खांसी और जुकाम होते ही मेडिकल स्टोर से अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक खरीदकर खाना शुरू कर देते हैं. ज्यादातर खांसी और जुकाम वायरल इंफेक्शन या एलर्जी की वजह से होते हैं, जिनमें एंटीबायोटिक का फायदा नहीं होता है. बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से शरीर में दवाओं के खिलाफ रजिस्टेंस बढ़ सकता है. इसलिए डॉ. अर्जुन खन्ना बताते हैं कि डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक नहीं लेनी चाहिए.

बच्चों और बड़ों की खांसी में क्या अंतर

डॉ. अर्जुन खन्ना बताते हैं कि बच्चों और बड़ों में खांसी के कारण अलग हो सकते हैं. बच्चों में खांसी का सबसे आम कारण इंफेक्शन हो सकता है. एलर्जी और अस्थमा की वजह से भी बच्चों को बार-बार खांसी हो सकती है. बड़ों में टीबी, फेफड़ों का कैंसर, फेफड़ों की सिकुड़न और ILD जैसी बीमारियां भी कारण बन सकती हैं. हालांकि कुछ कारण बच्चों और बड़ों दोनों में एक जैसे हो सकते हैं. मरीज की उम्र, लक्षण और पुरानी बीमारी की जानकारी देखकर ही सही कारण का पता लगाया जा सकता है.

कौन सी जांच ज्यादा जरूरी 

डॉ. अर्जुन खन्ना बताते हैं कि हर मरीज में एक जैसी जांच कराने की जरूरत नहीं होती है. मरीज की उम्र, खांसी कितने समय से है, खांसी कितनी ज्यादा है और साथ में कौन से लक्षण हैं, इसके आधार पर जांच तय की जाती है. सामान्य मामलों में छाती का एक्स-रे और बलगम की जांच की जा सकती है. अगर वजन तेजी से कम हो रहा है, तेज बुखार है या खांसी ज्यादा गंभीर है, तो सीटी स्कैन और फेफड़ों की ताकत की जांच भी कराई जा सकती है. जरूरत के हिसाब से डॉक्टर आगे की जांच तय करते हैं.

ये लोग तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

डॉ. अर्जुन खन्ना बताते हैं कि खांसी के साथ खून आना, तेज बुखार होना, लगातार वजन कम होना, सांस लेने में परेशानी होना या खांसी का लगातार बढ़ते जाना चेतावनी के संकेत हो सकते हैं. अगर खांसी इतनी तेज हो जाए कि चक्कर आने लगे या खांसते समय पेशाब छूट जाए, तब भी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. बच्चों में बार-बार होने वाली खांसी, सांस फूलना या रात में लगातार खांसी भी जांच की वजह हो सकती है. डॉ. अर्जुन खन्ना बताते हैं कि समय पर कारण पता चल जाए तो इलाज आसान हो सकता है.

इनहेलर को लेकर सबसे बड़ा मिथक

डॉ. अर्जुन के मुताबिक, लोगों के बीच सबसे बड़ा मिथक यह है कि इनहेलर या खींचने वाली दवा की आदत पड़ जाती है और फिर इसे पूरी जिंदगी लेना पड़ता है. ऐसा जरूरी नहीं है. अगर किसी मरीज को अस्थमा या सांस की परेशानी है और डॉक्टर ने इनहेलर दिया है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसका इस्तेमाल करना सुरक्षित है. दवा को डर की वजह से बंद करने के बजाय बीमारी को समझना ज्यादा जरूरी है. बार-बार होने वाली खांसी को सामान्य मानने के बजाय उसके कारण का पता लगाना ही सबसे सही तरीका है.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj