Monsoon Health Tips : बरसात की संजीवनी है ये वाली मिर्च, लक्ष्मण की तरह आ जाएगा मूर्छित तन में ताकत

Last Updated:August 19, 2026, 21:28 IST
Black Pepper Benefits : काली मिर्च हमारी सेहत के लिए हमेशा से रामबाण रही है. बरसात के मौसम में इसका उपयोग हमें सर्दी-जुकाम और पाचन संबंधी दिक्कतों से राहत दिलाता है. बारिश में कई रोगों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में सावधान बरतना जरूरी है. बरसात में भीगने से गला बैठना, नाक बंद होना और हल्की खांसी जैसी परेशानियां आम हैं. लोकल 18 से बलिया की आयुष चिकित्सक डॉ. वंदना तिवारी बताती हैं कि ऐसे में शहद के साथ थोड़ी पिसी काली मिर्च लेना बेहद लाभकारी है. डॉ. वंदना के मुताबिक, काली मिर्च को मेटाबॉलिज्म तेज करने और वजन घटाने वाला मसाला भी माना जाता है, लेकिन इसे फैट बर्निंग का जादुई उपाय नहीं मानना चाहिए.
डॉ. वंदना तिवारी बताती हैं कि काली मिर्च में मौजूद पिपरीन और कई एंटीऑक्सीडेंट यौगिक शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव से निपटने में मदद करते हैं. बरसात में संक्रमण का जोखिम बढ़ने पर संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और साफ-सफाई के साथ मसालों का उचित सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है. काली मिर्च के सही सेवन से इम्युनिटी भी बढ़ता है.
डॉ. वंदना के मुताबिक, बरसात में भीगने या मौसम बदलाव के दौरान गला बैठना, नाक बंद होना और हल्की खांसी जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं. ऐसे में गर्म पेय में थोड़ी काली मिर्च मिलाने से गले में गर्माहट महसूस होती है. अदरक और तुलसी वाली चाय में इसको चुटकी भर डालने से स्वाद भी बढ़ता है और शरीर को आराम भी मिलता है.
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, काली मिर्च की तीखी गर्माहट गले में जमा कफ के दौरान आराम दे सकती है. शहद के साथ थोड़ी पिसी काली मिर्च लेना पारंपरिक घरेलू नुस्खे के रूप में भी बेहद लाभकारी है. हालांकि शहद एक साल से कम उम्र के बच्चों को न दें. लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या तेज बुखार हो, तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें.
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डॉ. वंदना बताती हैं कि मौसम में परिवर्तन के दौरान खान-पान बिगड़ने से गैस, भारीपन और अपच जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. इसलिए सीमित मात्रा में ही काली मिर्च भोजन में शामिल करें. इससे पाचन प्रक्रिया भी सही रहता है. इसका पिपरीन यौगिक कुछ पोषक तत्वों और यौगिकों के अवशोषण को डिस्टर्ब कर सकता है. इसलिए इसे दाल, सब्जी, सूप या सलाद में स्वादानुसार ही डालना चाहिए.
डॉ. वंदना के मुताबिक, काली मिर्च को मेटाबॉलिज्म तेज करने और वजन घटाने वाला मसाला भी माना जाता है, लेकिन इसे फैट बर्निंग का जादुई उपाय नहीं मानना चाहिए. वजन नियंत्रित करने के लिए संतुलित कैलोरी, पौष्टिक भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है. काली मिर्च इन आदतों के साथ भोजन को स्वादिष्ट बनाने वाला उपयोगी मसाला है.
डॉ. वंदना बताती हैं कि काली मिर्च में सक्रिय यौगिक पिपरीन पाया है, जो बहुत ही गुणकारी होता है. यह जोड़ों के दर्द या सूजन का में भी लाभकारी हो सकता है. हालांकि अगर आप पहले से ही कोई रोग या गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं, तो बगैर चिकित्सक की राय लिए इसका सेवन न करें. इसके सेवन में सावधानी भी बहुत जरूरी है.
डॉ. वंदना कहती हैं कि काली मिर्च फायदेमंद है, लेकिन ज्यादा खाने पर हानि भी हो सकता है. मानसून में काली मिर्च को कई तरह से भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है. गर्म चाय या काढ़े में एक छोटी चुटकी, सूप पर ताजी पिसी काली मिर्च, दाल-सब्जी में हल्का छिड़काव या गुनगुने पेय में थोड़ा सा उपयोग किया जा सकता है. घर की ताजी पिसी काली मिर्च हर तरह से बेहतर होती है.
डॉ. वंदना बताती हैं कि काली मिर्च अधिक मात्रा से सेवन करने से कुछ लोगों के पेट में जलन, एसिडिटी या गैस की समस्या हो सकती है, इसलिए सावधानीपूर्वक सेवन करें. मानसून में इसे रोजाना भरपूर खाने के बजाय भोजन में स्वादानुसार सीमित मात्रा में शामिल करना सुरक्षित है. अगर काली मिर्च का प्रयोग आयुर्वेद एक्सपर्ट की सलाह से किया जाए, तो कई अद्भुत फायदे मिल सकते हैं.
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August 19, 2026, 21:28 IST



