सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी क्यों बनाया गया? पढ़ें इसके पीछे की बीजेपी की A To Z रणनीति

Last Updated:August 20, 2026, 16:13 IST
BJP leader Satish Poonia News. ‘तूं हार से मत डर, हार तो जीत की सीढ़ी है, हर ठोकर में मंजिल की एक सीख छिपी है, आज जिस वक्त ने तुझे हराया है, कल वही वक्त तुझे जीताएगा’. शब्दों में ‘फर्श से अर्श’ तक का सफर कराने वाली यह पंक्तियां बीजेपी अध्यक्ष नीतिन नबीन की टीम का अहम हिस्सा बने सतीश पूनिया पर एकदम सटीक बैठती है. राजस्थान के छोटे से जिले के चूरू के सादुलपुर ने निकले सतीश पूनिया आज बीजेपी में बड़े नेता की भूमिका में आ चुके हैं. वे अब केवल राजस्थान के नेता नहीं रह गए हैं बल्कि उनकी भूमिका पार्टी में देश के पटल पर छा गई है. सतीश पूनिया पूर्व में राजस्थान भाजपा युवा मोर्चा और राजस्थान बीजेपी दोनों की कमान संभाल चुके हैं.
जयपुर. साल 2023 में जयपुर के आमेर से विधायक का चुनाव हारने वाले सतीश पूनिया आज भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ‘डिसीजन बॉडी’ का हिस्सा बन गए हैं. वे राजस्थान की सीमाओं को लांघते हुए नॉर्थ इंडिया में पार्टी में जाट समाज का बड़ा चेहरा बन चुके हैं. भाजपा ने पूनिया की संगठनात्मक क्षमता का दोहन करने के लिए उनको एक के बाद एक चार जिम्मेदारियां सौंपी दी है. छात्र काल से एबीवीपी के जरिये राजनीति में कदम रखने वाले सतीश पूनिया ने भले ही खुद अपने राजनीतिक करियर में विधायक का एक ही चुनाव जीता है लेकिन वे उन्होंने पार्टी को चुनाव जीताए बहुत हैं. पूनिया की इसी खासियत ने उनको पार्टी के ‘लाडला नेता’ बना दिया है.
यही वजह है कि बीजेपी ने पूनिया को विधानसभा चुनाव में हार के बाद के बावजूद पहले हरियाणा का प्रभारी, फिर राज्यसभा सांसद और फिर पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया. उससे भी ऊपर अब उनको पार्टी के लिए चुनौती बने पंजाब राज्य को हासिल करने के लिए वहां का प्रभार सौंप दिया. पूनिया का छात्रकाल में एबीवीपी से शुरू हुआ सफर अब पार्टी के निर्णायक मंडल का तक पहुंच चुका है. राजस्थान भाजपा युवा मोर्चा और राजस्थान बीजेपी दोनों की कमान संभाल चुके पूनिया आज बड़े मुकाम पर पहुंच गए हैं. राजनीतिक विश्लेषक उनकी इस भूमिका के पीछे के कई बड़े कारण गिनाते हैं.



