World

Russia Air Defence System: Tor, Pantsir, Buk, S-300 और S-400: NATO की प्रॉक्सी वॉर ने रूस को कैसे बनाया एयर डिफेंस का सुपर पावर

Last Updated:August 20, 2026, 07:39 IST

Russia Air Defence System: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी एयर डिफेंस को लेकर स्पुतनिक ने बड़ा दावा किया है. सैन्य विश्लेषक अलेक्जेंडर मिखाइलोव के मुताबिक NATO देशों से यूक्रेन को मिले ड्रोन और मिसाइलों ने रूस को अपने एयर डिफेंस रणनीति को तेजी से विकसित करने पर मजबूर किया. रूस ने रडार, कमांड नेटवर्क, FPV और इंटरसेप्टर ड्रोन, Tor, Pantsir, Buk, S-300 और S-400 जैसे कई स्तरों वाली एयर डिफेंस सिस्टम तैयार की है. इस रणनीति में छोटे और सस्ते ड्रोन के खिलाफ महंगे इंटरसेप्टर खर्च करने से बचने पर जोर है. विश्लेषक ने रूस की एयर डिफेंस क्षमता को दुनिया में सबसे प्रभावी बताया है, हालांकि यह रूसी पक्ष का दावा है.

ख़बरें फटाफट

Tor से S-400 तक, NATO की प्रॉक्सी वॉर से कैसे रूस बन गया एयर डिफेंस सुपर पावर?Zoomरूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच रूस ने मल्टी-लेयर एयर डिफेंस तैयार किया है. (फाइल फोटो Reuters)

नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन की जंग को चार साल से ज्यादा वक्त हो चुका है. इस दौरान आसमान भी युद्ध का बड़ा मैदान बन गया है. शुरुआत में जिस रूस को ड्रोन और मिसाइल हमलों से परेशान करने की कोशिश की गई, अब उसी रूस की एयर डिफेंस क्षमता को लेकर बड़ा दावा सामने आया है. रूसी मीडिया स्पुतनिक से बातचीत में सैन्य विश्लेषक अलेक्जेंडर मिखाइलोव ने कहा है कि यूक्रेन को NATO देशों से लगातार मिल रही नई और ज्यादा खतरनाक तकनीक ने रूस को अपनी हवाई सुरक्षा व्यवस्था तेजी से बदलने पर मजबूर किया. उनके मुताबिक, Bayraktar ड्रोन से लेकर छोटे FPV ड्रोन, क्रूज मिसाइल और ATACMS जैसी मिसाइलों तक का सामना करते हुए रूस ने एक ऐसा मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम तैयार किया है, जिसे वह दुनिया का सबसे प्रभावी सिस्टम बता रहे हैं.

इस दावे की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें सिर्फ बड़े मिसाइल सिस्टम की कहानी नहीं है. युद्ध ने रूस को यह सिखाया कि हर खतरे पर महंगी मिसाइल दागना समझदारी नहीं है. सामने अगर सस्ता ड्रोन है तो उसे रोकने के लिए भी सस्ता और तेज विकल्प चाहिए. इसी सोच के साथ रडार, कमांड पोस्ट, FPV और इंटरसेप्टर ड्रोन, मोबाइल फायरिंग ग्रुप, MANPADS, Tor और Pantsir जैसे सिस्टम से लेकर Buk, S-300 और S-400 तक को एक साथ इस्तेमाल करने की रणनीति विकसित की गई है. यानी रूस का फोकस अब सिर्फ हथियारों पर नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को एक साथ चलाने पर है.

रूसी एयर डिफेंस की पहली परत रडार और कमांड नेटवर्क है. (Reuters)

युद्ध ने रूस की एयर डिफेंस रणनीति को कैसे बदला?

स्पुतनिक के मुताबिक रूसी एयर डिफेंस की पहली परत रडार और कमांड नेटवर्क है. रडार हवा में आने वाले खतरे को पहचानते हैं और उसकी जानकारी कमांड पोस्ट तक पहुंचाते हैं. इसके बाद खतरे की प्रकृति देखकर तय किया जाता है कि उसे किस हथियार या यूनिट से रोका जाए. यही व्यवस्था रूस को छोटे ड्रोन और बड़े मिसाइल हमलों के बीच अंतर करने में मदद करती है.
इसके बाद कम लागत वाले FPV और इंटरसेप्टर ड्रोन छोटे विस्फोटक ड्रोन तथा डिकॉय को निशाना बनाने में इस्तेमाल किए जा सकते हैं. बड़े और ज्यादा खतरनाक ड्रोन के लिए मोबाइल फायर ग्रुप तथा MANPADS जैसे विकल्प सामने आते हैं. Tor और Pantsir जैसे सिस्टम इस नेटवर्क को और मजबूत करते हैं.

सस्ते ड्रोन के सामने महंगी मिसाइल खर्च करना सबसे बड़ा खतरा

इस पूरे मॉडल में सबसे महत्वपूर्ण बात थ्रेट प्रायोरिटाइजेशन है. यूक्रेन बड़ी संख्या में सस्ते ड्रोन भेजकर एयर डिफेंस को थकाने की कोशिश कर सकता है. अगर हर छोटे ड्रोन को रोकने के लिए महंगा इंटरसेप्टर इस्तेमाल किया जाए तो डिफेंस सिस्टम की मिसाइलें तेजी से खत्म हो सकती हैं. इसलिए रूस ने खतरे के हिसाब से हथियार चुनने पर जोर दिया है. छोटे लक्ष्य के लिए सस्ते विकल्प और गंभीर खतरे के लिए बड़े एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल इसी रणनीति का हिस्सा है.

ATACMS से क्रूज मिसाइल तक, बड़ी चुनौती के लिए S-300 और S-400

जब खतरा बैलिस्टिक या क्रूज मिसाइल का हो तो मुकाबला कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाता है. स्पुतनिक के विश्लेषण में Neptune, Flamingo और ATACMS जैसी मिसाइलों का जिक्र किया गया है. ऐसे खतरों के खिलाफ रूस Buk, S-300 और जरूरत पड़ने पर S-400 जैसे मध्यम और लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम पर भरोसा करता है. S-400 की भूमिका खास तौर पर ऊंचाई और दूरी वाले लक्ष्यों के खिलाफ महत्वपूर्ण बताई जाती है. हालांकि किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह अभेद्य मानना सही नहीं होगा.

रूस का दावा कितना बड़ा है?

अलेक्जेंडर मिखाइलोव ने रूस की एयर डिफेंस कैपेसिटी को दुनिया में सबसे बेहतर बताया है. उनका तर्क है कि पिछले साढ़े चार सालों में जिस स्तर पर रूसी एयर डिफेंस यूनिट्स को लगातार अलग-अलग प्रकार के हवाई टारगेट्स का सामना करना पड़ा है, वैसा अनुभव हाल के किसी दूसरे युद्ध में नहीं मिला. मिखाइलोव के मुताबिक अगली चुनौती और ज्यादा जटिल हो सकती है. उनका कहना है कि आने वाले दस सालों में रूस को लेजर हथियारों, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम और नए काइनेटिक इंटरसेप्शन सिस्टम पर काम करना होगा. ड्रोन युद्ध ने एयर डिफेंस की तस्वीर बदल दी है. अब मुकाबला केवल मिसाइल बनाम मिसाइल नहीं रहा, बल्कि सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, ड्रोन और मिसाइलों के पूरे नेटवर्क का हो गया है.

About the AuthorSumit KumarSenior Sub Editor

सुमित कुमार हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…

और पढ़ेंFirst Published :

August 20, 2026, 07:29 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj