राजस्थान में स्कूलों की बदहाली का सच, 3767 भवन जर्जर, 2047 में टॉयलेट नहीं, 75% को मरम्मत की जरूरत

जयपुर. राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बदहाली को लेकर सामने आई एक सरकारी सर्वे रिपोर्ट ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. न्यूज18 इंडिया के पास मौजूद इस सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 64,484 सरकारी स्कूल भवनों में से 3,767 भवन जर्जर हालत में हैं. इनमें से सरकार ने अब तक 2,558 स्कूल भवनों को ही जर्जर घोषित किया है, जबकि करीब 1,210 भवनों को अभी जर्जर घोषित किया जाना बाकी है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि 41,178 स्कूल भवनों यानी करीब 75 फीसदी भवनों को बड़ी मरम्मत की जरूरत है.
समय रहते इन भवनों की मरम्मत नहीं हुई तो आने वाले समय में इनकी हालत और खराब हो सकती है. इतना ही नहीं, प्रदेश में 611 स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपना भवन तक नहीं है. हालात सिर्फ स्कूल भवनों तक सीमित नहीं हैं. सरकारी सर्वे में 5,40,127 कक्षा-कक्षों में से केवल 2,36,441 कक्षा-कक्ष ही सुरक्षित पाए गए. यानी आधे से भी कम कक्षा-कक्षों को पूरी तरह सुरक्षित माना गया. ऐसे में प्रदेश के हजारों सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा के लिए जरूरी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
जयपुर में स्कूल की दीवारों में दरारें
जयपुर के पास रामपुरा में तबेले में चल रही सरकारी स्कूल की समस्या सामने आ चुकी है. यहां स्कूल की नई बिल्डिंग का निर्माण 1 सितंबर से शुरू होने की बात कही गई है. लेकिन यह प्रदेश का अकेला मामला नहीं है. जयपुर के जवाहर नगर स्थित टीला नंबर 5 की सरकारी स्कूल में भी भवन की हालत खराब है. स्कूल के ग्राउंड फ्लोर में पानी भरने के कारण कमरों की स्थिति जर्जर हो गई है. इन कमरों पर ताले लगा दिए गए हैं और पहली मंजिल के एक कमरे में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है. भवन की दीवारों में जगह-जगह दरारें हैं. इसके बावजूद यह भवन अभी तक सरकारी रिकॉर्ड में जर्जर घोषित नहीं किया गया है.
सर्वे में 3767 भवन जर्जर मिले
राजस्थान सरकार ने पिछले साल अगस्त में स्कूल भवनों की स्थिति को लेकर सर्वे कराया था. इसमें 3,767 स्कूल भवन जर्जर पाए गए. इनमें से 2,558 भवनों को सरकार ने जर्जर घोषित किया है. करीब 1,210 भवन अभी जर्जर घोषित होने का इंतजार कर रहे हैं. सरकारी नियमों के अनुसार किसी स्कूल भवन को जर्जर घोषित किए जाने के बाद ही वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जा सकता है. ऐसे में सर्वे में जर्जर पाए गए लेकिन अभी तक घोषित नहीं किए गए भवनों में बच्चों के पढ़ने पर सवाल उठ रहे हैं.
झालावाड़ में सबसे ज्यादा जर्जर स्कूल
जिलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो झालावाड़ में सबसे ज्यादा 327 स्कूल भवन जर्जर पाए गए हैं, लेकिन इनमें से केवल 19 भवनों को ही अब तक जर्जर घोषित किया गया है. प्रतापगढ़ में 276 भवन जर्जर मिले, जिनमें से 86 को जर्जर घोषित किया गया. जयपुर में 142 स्कूल भवन जर्जर पाए गए, लेकिन सरकार ने अभी तक सिर्फ 32 भवनों को जर्जर घोषित किया है.
2047 स्कूलों में शौचालय नहीं
सरकार ने विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली के सवाल के जवाब में बताया कि प्रदेश के 2,047 सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय की सुविधा नहीं है. वहीं 1,049 स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं है. यानी कई स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के साथ बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है.
सरकार का 12,500 करोड़ का रोडमैप
सरकार का कहना है कि सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के लिए अगले तीन साल का करीब 12,500 करोड़ रुपये का रोडमैप तैयार किया गया है. इसमें स्कूल भवनों की मरम्मत और नए भवनों का निर्माण शामिल है. सरकार ने विधायक निधि का 20 फीसदी हिस्सा स्कूलों पर खर्च करने का फैसला भी किया है. इसके अलावा 3,587 नए स्कूल भवन बनाने की योजना बताई गई है.
आधे से कम कक्षा-कक्ष सुरक्षित
सर्वे में सरकारी स्कूलों के 5,40,127 कक्षा-कक्षों की स्थिति का भी आकलन किया गया. इनमें केवल 2,36,441 कक्षा-कक्षों को सुरक्षित माना गया. वहीं 45,365 कक्षा-कक्षों में मरम्मत की जरूरत बताई गई. हैरानी की बात यह है कि इनमें से सिर्फ 4,187 कक्षा-कक्षों में मरम्मत कार्य की स्वीकृति मिली है. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सर्वे में सामने आई कमियों को दूर करने और बच्चों को सुरक्षित स्कूल भवन उपलब्ध कराने का काम कितनी तेजी से होता है.



