CM थलापति विजय ने क्यों रद्द किया ₹20000 करोड़ का प्रोजेक्ट? क्या है 12 गांवों से कनेक्शन, जानें

C. Joseph Vijay Another Promise: थलापति विजय ने बतौर मुख्यमंत्री तीन महीने का कार्यकाल पूरा कर लिए हैं. सीएम के तौर पर उनके काम-काज के तरीके को सराहा जा रहा है. इस बीच, उन्होंने चेन्नई के पास प्रस्तावित 20000 करोड़ रुपए के परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया है. यह प्रोजेक्ट कई वजहों से रद्द कर दिया गया. इन वजहों में पर्यावरण इशु और जनता-किसानों का जबरदस्त विरोध प्रदर्शन रहा है. थलापति विजय ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान इस प्रोजेक्ट को खत्म करने का वादा किया था. विजय ने तमिलनाडु विधानसभा में इस फैसले की अनाउंसमेंट की. उन्होंने प्रोजेक्ट को रद्द करते साफ कहा उनका सरकार औद्योगिक विकास का समर्थन करती है, लेकिन परंदूर में एयरपोर्ट बनाना स्वीकार्य नहीं है क्योंकि इससे लोगों और पर्यावरण को भारी नुकसान होगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कहा कि उनकी सरकार परंदूर में नया एयरपोर्ट बनाने के प्रोसेज को रोक देगी. इस प्रोजेक्ट से कृषि भूमि पर असर पड़ेगा. किसानों और स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित होगी. विजय ने कहा कि चेन्नई के मीनांबक्कम एयरपोर्ट (जिसे एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया चलाती है) की मौजूदा क्षमता सालाना 3 करोड़ (30 मिलियन) यात्रियों को संभालने की है. शहर की बढ़ती ज़रूरतों, औद्योगिक विकास और बढ़ते कार्गो ट्रांसपोर्ट को देखते हुए एक नए एयरपोर्ट की ज़रूरत थी. हालांकि, उन्होंने कहा कि नया एयरपोर्ट ऐसी जगह पर होना चाहिए जहां कृषि भूमि और रिहायशी इलाकों पर कम से कम असर पड़े.
सी. जोसेफ विजय ने बताया कि उन्होंने 20 जनवरी, 2025 को एगनापुरम और अन्य गांवों का दौरा किया था. परंदूर और आसपास के गांवों में प्रस्तावित एयरपोर्ट का विरोध कर रहे लोगों की शिकायतें सुनी थीं. किसान देश की रीढ़ हैं और उन्होंने अपनी कृषि भूमि को बचाने के लिए विरोध कर रहे लोगों के प्रति समर्थन व्यक्त किया. उन्होंने कहा, “मैं चेन्नई के परंदूर और आसपास के 12 गांवों में बनने वाले एयरपोर्ट का विरोध कर रहे लोगों के साथ मज़बूती से खड़ा हूं.”
परंदूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट क्यों रद्द किया गया
कृषि भूमि और आजीविका का नुकसानः परंदूर साइट के लिए घनी आबादी वाली और कृषि योग्य ज़मीन के बड़े हिस्से का अधिग्रहण करना ज़रूरी था. इससे आसपास के 12 गांवों के लोग प्रभावित होते. इस क्षेत्र में किसान धान की खेती के लिए बहुत ज़्यादा निर्भर हैं. वे एक साल से भी ज़्यादा समय से विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे. प्रोजेक्ट को रद्द करने से खेती पर आधारित रोजी-रोटी सुरक्षित रहेंगी और हज़ारों परिवारों को ज़बरदस्ती विस्थापित होने से बचाया जा सकेगा.
पर्यावरण को गंभीर खतरा और जल स्रोतः पर्यावरण से जुड़ी स्टडी और विशेषज्ञों की सलाह थी कि परंदूर की ज़मीन रनवे बनाने के लिए बिल्कुल भी सही नहीं थी, क्योंकि वहां बहुत सारे वेटलैंड और जरूरी जल स्रोत थेः
एयरपोर्ट बनाने से लगभग 33 जल स्रोत खत्म हो जाते, जिनमें ‘नेल वाई’ (Nel Y) नाम का 350 एकड़ का एक बहुत बड़ा जल स्रोत भी शामिल था.
इस जगह के लिए तय किए गए 4791 एकड़ में से आधे से ज्यादा (2,605 एकड़) हिस्से में जरूरी वेटलैंड थे.
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि पानी की निकासी के इन प्राकृतिक रास्तों को कवर करने से चेन्नई में शहरी बाढ़ की समस्या और गंभीर हो सकती है.
राजनीतिक वादे और लीडरशिप में बदलाव
इस ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की प्लानिंग और इसे आगे बढ़ाने का काम मूल रूप से एमके स्टालिन के लीड वाली DMK सरकार के समय हुआ था. तब थलापति विजय और उनकी पार्टी, ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) ने विरोध कर रहे किसानों का ज़ोरदार समर्थन किया था. इस प्रोजेक्ट को रद्द करने से ग्रामीणों और पर्यावरणविदों से किया गया चुनाव से पहले का एक मुख्य वादा पूरा होता है.
विपक्षी पार्टी DMK ने चेतावनी दी है कि राजनीतिक कारणों से परंदूर प्रोजेक्ट को छोड़ने से लंबे समय में आर्थिक नुकसान हो सकता है और पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश को बड़ी इंडस्ट्री मिल सकती हैं.
थलापति विजय अब आगे क्या करेंगे?
चेन्नई में बढ़ती ट्रैवल की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, विजय की सरकार दोतरफा रणनीति अपना रही है:
मीनमबक्कम में एक्सटेंशन: चेन्नई का मौजूदा मीनमबक्कम एयरपोर्ट अभी हर साल 3 करोड़ (30 मिलियन) यात्रियों को संभालता है. टर्मिनल 3 के पूरा होने से यह क्षमता 3.5 करोड़ (35 मिलियन) हो जाएगी, और बाद में टर्मिनल 5 के पूरा होने से हर साल 5.5 करोड़ (55 मिलियन) और यात्री जुड़ सकेंगे, जिससे शहर की कनेक्टिविटी बनी रहेगी जब तक कि कोई पक्का विकल्प तैयार नहीं हो जाता.
वैकल्पिक जगह की तलाश: विशेषज्ञों की टीमों ने पहले ही कुछ ऐसी वैकल्पिक जगहें चुन ली हैं जहां इंसानी बस्तियों और खेती की ज़मीन को कम से कम नुकसान पहुंचेगा. राज्य सरकार पूरी तकनीकी और पर्यावरणीय व्यवहार्यता स्टडी के बाद एक नई जगह तय करेगी जहां जनता का कोई विरोध न हो.



