Gwar Crop Pest Attack | ग्वार में रस चूसक कीटों का प्रकोप | Gwar ki fasal ko kaise bachayen

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ग्वार की फसल को चट कर रहे रस चूसक कीट, एक्सपर्ट ने बताया बचाव का तरीका
Last Updated:August 26, 2026, 08:50 IST
Gwar Crop Pest Attack: मौसम में उतार-चढ़ाव के चलते ग्वार फली की फसल पर सफेद मक्खी, माहू और थ्रिप्स जैसे रस चूसक कीटों का खतरा बढ़ गया है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह के अनुसार, ये कीट पौधों का रस चूसकर फलियों के उत्पादन को प्रभावित करते हैं. फसल बचाव के लिए किसानों को इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL का छिड़काव साफ मौसम में करने, खेत में खरपतवार नियंत्रण रखने और पीले चिपचिपे ट्रैप का उपयोग करने की सलाह दी गई है. अत्यधिक या बिना जरूरत कीटनाशक प्रयोग से बचने को कहा गया है.
बारिश और मौसम में उतार-चढ़ाव के दौरान ग्वार फली की फसल में रस चूसक कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है. ऐसे में किसानों को फसल की नियमित निगरानी करते रहना चाहिए. खासतौर पर पत्तियों की निचली सतह, कोमल शाखाओं और नई बढ़वार पर ध्यान देना जरूरी है. रस चूसक कीट पौधे का रस चूसकर उसकी बढ़वार को कमजोर कर देते हैं. इसके कारण फूल और फलियों की संख्या प्रभावित हो सकती है और फसल का उत्पादन भी कम हो सकता है.
ग्वार की फसल में सफेद मक्खी, माहू और थ्रिप्स जैसे रस चूसक कीटों का प्रकोप अधिक देखने को मिलता है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह के अनुसार, ये छोटे कीट अक्सर पत्तियों की निचली सतह पर छिपे रहते हैं, जिससे शुरुआती दौर में इनकी पहचान करना मुश्किल हो सकता है. प्रकोप बढ़ने पर पत्तियां पीली पड़ने, सिकुड़ने और पौधों की बढ़वार प्रभावित होने जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं. ऐसे में किसानों को सप्ताह में कम से कम दो बार खेत का निरीक्षण करना चाहिए और कीटों की शुरुआती पहचान होते ही उचित नियंत्रण उपाय अपनाने चाहिए.
रस चूसक कीटों के नियंत्रण के लिए साफ मौसम में इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल का छिड़काव किया जा सकता है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के अनुसार, इसकी 200 मिलीलीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है. हालांकि किसानों को किसी भी कीटनाशक का प्रयोग फसल, कीट की स्थिति और स्थानीय कृषि विभाग की स्वीकृत अनुशंसा के अनुसार ही करना चाहिए. ICAR की खरीफ फसल संबंधी सलाह में भी कुछ फसलों में सफेद मक्खी, माहू और थ्रिप्स जैसे रस चूसक कीटों के प्रबंधन के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल के उपयोग का उल्लेख किया गया है.
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बारिश के मौसम में कीटनाशी का छिड़काव करते समय मौसम का विशेष ध्यान रखना चाहिए. बारिश की संभावना होने पर छिड़काव करने से बचें, क्योंकि बारिश होने पर दवा पत्तियों से धुल सकती है और कीट नियंत्रण का प्रभाव कम हो सकता है. मौसम साफ होने पर ही कीटनाशी का छिड़काव करना बेहतर रहता है. छिड़काव के दौरान दवा का घोल पत्तियों की ऊपरी और निचली दोनों सतहों तक पहुंचना जरूरी है. पर्याप्त पानी और उचित नोजल का इस्तेमाल करने से दवा का कवरेज बेहतर हो सकता है.
बिना जरूरत बार-बार कीटनाशी का इस्तेमाल करने से किसानों को बचना चाहिए. रस चूसक कीटों का प्रकोप दिखाई देने पर ही अनुशंसित कीटनाशी का प्रयोग करें और निर्धारित मात्रा से अधिक दवा का छिड़काव न करें. एक ही रसायन का बार-बार इस्तेमाल करने से कीटों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए जरूरत पड़ने पर अलग-अलग प्रभाव-प्रणाली वाले कीटनाशियों का उपयोग करना बेहतर रहता है. किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ICAR की सलाह के अनुसार कीटनाशियों का जरूरत से ज्यादा या कई दवाओं का एक साथ प्रयोग करने से बचना चाहिए.
खरपतवारों को नियंत्रित करने से भी ग्वार की फसल में रस चूसक कीटों का दबाव कम किया जा सकता है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह के अनुसार, किसानों को खेत और मेड़ पर अनावश्यक खरपतवारों को बढ़ने नहीं देना चाहिए, क्योंकि कई कीट वैकल्पिक पौधों पर पनपने के बाद मुख्य फसल तक पहुंच सकते हैं. इसके साथ ही संक्रमित या ज्यादा प्रभावित पत्तियों को समय रहते हटाकर नष्ट कर देना चाहिए. अगर खेत में कीटों का प्रकोप कम है तो किसान पीले चिपचिपे ट्रैप जैसे निगरानी उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे शुरुआती स्तर पर रस चूसक कीटों की पहचान करने और उनके प्रकोप को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.
First Published :
August 26, 2026, 08:50 IST



