पीढ़ियों से नहीं बदला रंगों का ये राज, पाली के रंगरेज आज भी इसी देसी तरीके से रंगते हैं लहरिया

Last Updated:August 27, 2026, 19:40 IST
Pali Hindi News: पाली का रंगरेज समाज आज भी पीढ़ियों पुरानी पारंपरिक रंगाई कला को संजोए हुए है. आधुनिक मशीनों के दौर में यहां सिगड़ी और भगोले की मदद से पक्के रंग तैयार किए जाते हैं. इन्हीं रंगों से साफे, चुनरी और लहरिया को आकर्षक रूप दिया जाता है. मेहनत, हुनर और परंपरा से जुड़ी यह कला राजस्थान की समृद्ध संस्कृति की पहचान है, जो आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है.
आज भी उदयपुरिया मार्केट मैं जिंदा है इनकी पहचान चाहे देश के बड़े-बड़े शहरों में होने वाली शादियां हों या फिर सांस्कृतिक इवेंट्स, पाली के इन रंगरेजों को साफा पहनाई और खास रंगाई के लिए विशेष रूप से बुलाया जाता है. आज भी उदयपुरिया बाजार की पहचान इन्हीं कारीगरों के पक्के रंगों और हुनर से जिंदा है.
सिगड़ी पर भगोला चढ़ाकर पारंपरिक तरीके से रंग तैयार करने की यह कला इन कारीगरों को विरासत में मिली है. भले ही समय बदलने के साथ अब इस बाजार में गिने-चुने परिवार ही इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन इनके हुनर की चमक आज भी वैसी ही है.
पाली के रंगरेजों का जादू सिर्फ नए साफ़ों या कपड़ों तक सीमित नहीं है. पुराने, बेरंग या फीके पड़ चुके कपड़ों को दोबारा नया जैसा रूप देना इनकी बहुत बड़ी विशेषता है. अपने विशेष रंग मिश्रण और हुनर के दम पर ये कारीगर पुराने कपड़ों को इस तरह रंगते हैं कि वे बिल्कुल नए कपड़े की तरह खिल उठते हैं. इनका यह हुनर देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में रहने वाले प्रवासियों तक प्रसिद्ध है.
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समय बदलने के साथ उदयपुरिया बाजार में अब गिने-चुने परिवार ही इस पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े हैं, लेकिन उनके हुनर की मांग में कोई कमी नहीं आई है. देश के बड़े-बड़े महानगरों में होने वाली हाई-प्रोफाइल शादियां हों, सांस्कृतिक उत्सव हों या शाही आयोजन, पाली के इन रंगरेजों को विशेष रूप से साफा बांधने और खास रंगाई के लिए बुलाया जाता है. रंगरेज समाज की सबसे बड़ी खासियत इनकी पारंपरिक रंगाई विधि है. आज के आधुनिक दौर में भी यहां के कारीगर लोहे या मिट्टी की सिगड़ी (अंगीठी) पर बड़ा भगोला चढ़ाकर प्राकृतिक व पक्के रंगों को तैयार करते हैं. सिगड़ी की हल्की आंच पर सही तापमान और सही अनुपात में रंगों को पकाना ही इनका असली राज़ है. यही वजह है कि यहां तैयार किए गए रंगों की चमक और स्थायित्व की बात ही अलग होती है.
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August 27, 2026, 19:40 IST



