घर के आसपास दिखने वाली हर बेल गिलोय नहीं, यहां असली गिलोय के पहचान से लेकर जानिए सेवन का तरीका

Last Updated:August 28, 2026, 09:34 IST
गिलोय को आयुर्वेद में गुडूची और अमृता के नाम से भी जाना जाता है. बदलते मौसम में बुखार और सर्दी-जुकाम जैसी परेशानियों के दौरान लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. हालांकि हर हरी बेल गिलोय नहीं होती, इसलिए इस्तेमाल से पहले इसकी सही पहचान जरूरी है. आयुष चिकित्सा अधिकारी के मुताबिक गिलोय का सेवन व्यक्ति की उम्र और स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह से करना बेहतर है.
गिलोय आयुर्वेद में बेहद खास मानी जाने वाली जड़ी बूटी है. इसे अमृता भी कहा जाता है यानी अमृत के समान पुराने समय से ही बुखार, सर्दी खांसी और शरीर में होने वाली दूसरी परेशानियों में इसके इस्तेमाल का जिक्र मिलता है. इसकी बेल के तने और पत्तियों का पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है. यही वजह है कि बदलते मौसम में जब बुखार और सर्दी खांसी परेशान करती है तब भी लोग गिलोय को याद करते हैं.
आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल के मुताबिक बुखार में गिलोय का इस्तेमाल आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता रहा है. खासकर वायरल फीवर के दौरान लोग गिलोय के तने से बने काढ़े या बाजार में मिलने वाले गिलोय जूस का सेवन करते हैं. इसे लेने का सही तरीका और मात्रा व्यक्ति की उम्र और हालत पर निर्भर करती है. इसलिए आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से लेना बेहतर है.
घर के आसपास या पेड़ों पर चढ़ी हर हरी बेल गिलोय नहीं होती. असली गिलोय पहचानने के लिए इसकी पत्तियों और तने को ध्यान से देखें. इसकी पत्तियां आमतौर पर दिल के आकार की होती हैं जबकि तना हरा और थोड़ा मोटा दिखाई देता है. तने पर छोटे छोटे गोल उभार नहीं होते. गिलोय अक्सर दूसरे पेड़ों के सहारे ऊपर चढ़ती है. अगर घर या बाजार से मिली बेल की पहचान को लेकर जरा भी शक हो तो बिना इस्तेमाल किए किसी जानकार या आयुष चिकित्सक से इसकी पुष्टि जरूर कर लें.
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गिलोय कोई आज की खोजी हुई जड़ी बूटी नहीं है. आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल हजारों साल से होता आ रहा है. इसे गुडूची और अमृता जैसे नामों से भी जाना जाता है. इसकी खास बात यह है कि औषधीय इस्तेमाल में सिर्फ इसकी पत्तियां ही नहीं बल्कि बेल और तने का भी उपयोग किया जाता है. यही वजह है कि गिलोय आज भी आयुर्वेदिक चिकित्सा में खास जगह रखती है.
अगर आप डॉक्टर की सलाह से गिलोय का सेवन कर रहे हैं तो इसके कई फायदे मिल सकते हैं आयुर्वेद में इसे पाचन से जुड़ी परेशानी, बुखार, शरीर में सूजन और जोड़ों से जुड़ी दिक्कतों में इस्तेमाल किया जाता है. गिलोय को शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सपोर्ट करने वाली जड़ी बूटी के तौर पर भी जाना जाता है. कुछ लोग इसे ब्लड शुगर और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्या में भी लेते हैं.
बाजार से गिलोय खरीद रहे हैं तो पैकेट उठाकर सीधे घर न ले आएं. सबसे पहले देखें कि उसमें गिलोय का कौन सा रूप दिया गया है जैसे चूर्ण, सूखी बेल या कोई तैयार उत्पाद पैकिंग पर सामग्री, मात्रा, बैच नंबर और इस्तेमाल की जानकारी जरूर पढ़ें खुली हुई गिलोय लेने के बजाय भरोसेमंद जगह से पैक किया हुआ उत्पाद लेना बेहतर रहता है. अगर आप पहली बार इस्तेमाल कर रहे हैं तो अपनी जरूरत के हिसाब से कौन सा रूप लेना है यह आयुष चिकित्सक से सलाह ले सकते हैं.
अगर आप गिलोय को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सोच रहे हैं तो डॉक्टर से तीन बातें जरूर पूछें. पहली इसे कितनी मात्रा में लेना है दूसरी काढ़ा, चूर्ण या किसी दूसरे रूप में लेना बेहतर रहेगा तीसरी इसे कितने समय तक इस्तेमाल करना है हर व्यक्ति के लिए इन तीनों सवालों का जवाब अलग हो सकता है. खासकर अगर पहले से कोई दवा चल रही है या कोई स्वास्थ्य समस्या है तो गिलोय शुरू करने से पहले डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर दें.
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August 28, 2026, 09:32 IST



