Gallbladder Stone: पेट के दाहिने हिस्से में बार-बार दर्द? हो सकती है पित्त की पथरी, जानें लक्षण और इलाज

Last Updated:August 29, 2026, 15:42 IST
जौनपुर: पेट दर्द या अपच को कई बार लोग गैस की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अगर पेट के ऊपरी हिस्से, खासकर दाहिनी ओर बार-बार दर्द हो रहा है तो इसकी वजह पित्त की थैली यानी गॉलब्लैडर में पथरी भी हो सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, समय पर जांच और सही चिकित्सकीय सलाह जरूरी है, क्योंकि कुछ मामलों में पथरी पित्त की नली को प्रभावित कर गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकती है.
जौनपुर: बदलती जीवनशैली, खान-पान में अनियमितता और ज्यादा तला-भुना या वसायुक्त भोजन कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है. इन्हीं में पित्त की थैली यानी गॉलब्लैडर में पथरी भी शामिल है. कई बार लोग पेट दर्द, गैस या अपच को सामान्य परेशानी समझकर खुद से दर्द की दवा ले लेते हैं. इससे दर्द कुछ समय के लिए कम हो सकता है, लेकिन बीमारी की असली वजह बनी रह सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, बार-बार ऐसे लक्षण दिखाई दें तो समय पर जांच कराना जरूरी है.
वासुदेव हॉस्पिटल के डायरेक्टर और लैप्रोस्कोपिक जनरल सर्जन डॉ. विकास कुमार यादव के मुताबिक, गॉलब्लैडर में पथरी बनने का एक प्रमुख कारण पित्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल और बाइल साल्ट का असंतुलन हो सकता है. कुछ मरीजों में पिगमेंट स्टोन भी बनते हैं. पथरी छोटी हो या बड़ी, उसके लक्षण और इलाज की जरूरत व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है.
गॉलब्लैडर स्टोन में कई लोगों को तला-भुना या अधिक वसायुक्त भोजन करने के बाद अपच, पेट में भारीपन या दर्द की शिकायत हो सकती है. पेट के ऊपरी हिस्से में, खासकर दाहिनी ओर अचानक तेज दर्द होना भी इसका एक संभावित संकेत है. कुछ मामलों में खांसने, छींकने या गहरी सांस लेने पर दर्द बढ़ सकता है. अगर पथरी पित्त की नली में चली जाए और रास्ता बाधित करे तो पीलिया जैसी जटिलता हो सकती है. इसलिए बार-बार होने वाले पेट दर्द को केवल गैस या बदहजमी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
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डॉ. यादव के मुताबिक, बार-बार दर्द होने पर केवल पेनकिलर लेकर समस्या को टालना सही तरीका नहीं है. दर्द की दवा कुछ समय के लिए लक्षण कम कर सकती है, लेकिन इससे पथरी खत्म नहीं होती. अगर पथरी कॉमन बाइल डक्ट में फंस जाए तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. कुछ मामलों में पैंक्रियाटिक डक्ट प्रभावित होने पर पैंक्रियाटाइटिस जैसी गंभीर समस्या भी हो सकती है. तेज पेट दर्द के साथ उल्टी, बुखार या पीलिया जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है.
डॉ. विकास यादव ने बताया कि गॉलब्लैडर में पथरी की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड प्रमुख जांचों में शामिल है. अगर बार-बार पेट दर्द, अपच या अन्य संबंधित लक्षण हो रहे हैं तो डॉक्टर से परामर्श लेकर जांच करानी चाहिए. पथरी की पुष्टि होने के बाद इलाज का तरीका मरीज के लक्षण, पथरी की स्थिति और संभावित जटिलताओं के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं. हर मरीज में तुरंत सर्जरी की जरूरत हो, यह जरूरी नहीं है.
जिन मरीजों में पित्त की थैली की पथरी के कारण बार-बार लक्षण या जटिलताएं हो रही हों, उनमें डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं. डॉ. यादव के मुताबिक, लैप्रोस्कोपिक सर्जरी गॉलब्लैडर स्टोन के इलाज में आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली प्रक्रिया है. इसके अलावा खान-पान में भी सावधानी बरतना जरूरी है. तले-भुने और अधिक वसायुक्त भोजन को सीमित करने की सलाह दी जाती है. हालांकि, डाइट और इलाज की सलाह मरीज की व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार डॉक्टर से लेना बेहतर है.
अगर पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में बार-बार दर्द हो, खाने के बाद परेशानी बढ़े, उल्टी या बुखार आए अथवा आंखों और त्वचा में पीलापन नजर आए तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करें. पेनकिलर केवल दर्द को कुछ समय के लिए कम कर सकती है, पित्त की पथरी का इलाज नहीं करती. समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह लेने से स्थिति का सही आकलन किया जा सकता है और संभावित जटिलताओं से बचने में मदद मिल सकती है.
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August 29, 2026, 15:42 IST



