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टेस्ट में सबसे ज्यादा शतक जड़ने वाले दुनिया के 5 विकेटकीपर , 18 साल से कायम है विश्व कीर्तिमान

नई दिल्ली. क्रिकेट की रेड बॉल वाली दुनिया में विकेटकीपर की भूमिका हमेशा सबसे थकाऊ और चुनौतीपूर्ण मानी गई है. घंटों स्टंप्स के पीछे झुकना, तेज गेंदबाजों की गेंदें पकड़ना और फिर बल्लेबाजी के लिए उतरकर मैच बचाना या बनाना यह हर किसी के बस की बात नहीं होती. लेकिन टेस्ट इतिहास में कुछ ऐसे अद्भुत खिलाड़ी आए हैं जिन्होंने न केवल स्टंप्स के पीछे शानदार प्रदर्शन किया, बल्कि बल्ले से ऐसे शतक जड़े कि बल्लेबाज़ी की पूरी परिभाषा ही बदल दी.

ऑस्ट्रेलिया के एडम गिलक्रिस्ट (Adam Gilchrist) को इस लिस्ट में सबसे टॉप पर देखकर किसी को हैरानी नहीं होती. 1999 से 2008 के बीच, जब ऑस्ट्रेलियाई टीम का दुनिया पर एकतरफा राज था, तब गिलक्रिस्ट उनके सबसे खतरनाक हथियार थे. सातवें नंबर पर आकर जिस तरह से वह विरोधी गेंदबाजों पर हमला बोलते थे, उसने टेस्ट क्रिकेट का मिजाज बदल दिया.गिलक्रिस्ट ने अपने करियर में खेले 96 टेस्ट मैचों की 137 पारियों में 47.60 की औसत से 5,570 रन बनाए. उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में बतौर विकेटकीपर सबसे ज्यादा 17 शतक ठोकने का सर्वकालिक रिकॉर्ड दर्ज है. केवल शतक ही नहीं, उनके बल्ले से 26 अर्धशतक भी निकले और उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 204 रन रहा. गिलक्रिस्ट की क्रीज पर मौजूदगी ही विरोधी कप्तानों की नींद उड़ाने के लिए काफी होती थी.

दुनिया के इन पांच विकेटकीपर ने टेस्ट में सबसे ज्यादा शतक जमाए.

जिम्बाब्वे का अकेला योद्धा एंडी फ्लावरअगर गिलक्रिस्ट के पास एक मजबूत और विश्व विजेता टीम का साथ था, तो जिम्बाब्वे के एंडी फ्लावर (Andy Flower) की कहानी एकदम अलग और प्रेरणादायक थी. 1992 से 2002 तक, एंडी फ्लावर ने अपनी टीम के बैटिंग ऑर्डर का पूरा भार अकेले अपने कंधों पर उठाया. महज 55 टेस्ट मैचों की 100 पारियों में फ्लावर ने 12 शतक और 23 अर्धशतक जमाए. इस दौरान उन्होंने 53.70 की बेहद शानदार औसत से 4,404 रन बनाए, जो एक विकेटकीपर-बल्लेबाज के लिए सपने जैसा आंकड़ा है. उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 232 रन रहा. तकनीक, धैर्य और मानसिक मजबूती के मामले में एंडी फ्लावर का कोई मुकाबला नहीं था. वह अक्सर अपनी टीम को अकेले दम पर हार के मुंह से बाहर निकालते थे.

क्लासिक दौर का नायाब सितारा लेस्ली एम्सआज से लगभग एक सदी पहले, जब क्रिकेट का ढांचा बेहद अलग था, तब इंग्लैंड के लेस्ली एम्स ने विकेटकीपर-बल्लेबाज की भूमिका को नई पहचान दी थी. 1929 से 1939 के बीच, एम्स ने 44 टेस्ट मैचों की 67 पारियों में 8 शतक जड़े. 43.40 की बेहतरीन औसत से 2,387 रन बनाने वाले एम्स उस दौर में किसी अजूबे से कम नहीं थे. उनका सर्वोच्च स्कोर 149 रन रहा. जिस दौर में विकेटकीपरों से सिर्फ कैच पकड़ने की उम्मीद की जाती थी, उस ज़माने में एम्स ने 8 शतक और 7 अर्धशतक बनाकर यह साबित किया कि स्टंप्स के पीछे रहने वाला खिलाड़ी भी टीम का मुख्य बल्लेबाज हो सकता है.

मॉडर्न क्रिकेट का सबसे बड़ा एक्स-फैक्टर ऋषभ पंतभारत के ऋषभ पंत (Rishabh Pant) ने 2018 में अपने करियर की शुरुआत की और बहुत ही कम समय में टेस्ट क्रिकेट में अपना एक अलग जलवा कायम कर लिया. इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे कठिन विदेशी दौरों पर जाबांज़ पारियां खेलकर पंत ने साबित किया कि उनके अंदर मैच का पासा पलटने का अनोखा हुनर है. पंत ने 52 टेस्ट मैचों की 90 पारियों में 43.82 की औसत से 3,725 रन बनाए हैं. उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में बतौर विकेटकीपर 8 शतक और 21 अर्धशतक दर्ज हो चुके हैं, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 159 रन है. एम्स के 8 शतकों की बराबरी करने वाले पंत आज के दौर के सबसे मनोरंजक और प्रभावकारी विकेटकीपर-बल्लेबाज बन चुके हैं. उनकी आक्रामक शैली और निडर अंदाज़ को देखकर लगता है कि आने वाले समय में वह इस सूची में और ऊपर जाएंगे.

मिस्टर 360 एबी डिविलियर्स का बहुमुखी अवतारदक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स (Ab De Villiers) को वैसे तो उनकी सर्वगुण संपन्न बल्लेबाज़ी के लिए जाना जाता है, लेकिन जब-जब टीम को जरूरत पड़ी, उन्होंने दस्ताने संभालकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया. बतौर विकेटकीपर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के लिए 24 टेस्ट मैच खेले और 39 पारियों में 57.41 की अविश्वसनीय औसत से 2,067 रन बटोरे. इतने कम मैचों में भी उन्होंने बतौर कीपर 7 शतक और 7 अर्धशतक जड़ दिए, जिसमें उनका उच्चतम स्कोर 169 रन रहा. डिविलियर्स ने दिखाया कि अगर प्रतिभा और समर्पण हो, तो दोहरी भूमिका भी शतकों की झड़ी लगाने से नहीं रोक सकती.

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