मोहन भागवत ने याद किया 1996 का वो खौफनाक हादसा, जब आसमान में टकराए थे दो पैसेंजर प्लेन, चली गई थीं 349 जानें

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मोहन भागवत ने याद किया 1996 का हादसा, आसमान में टकराए 2 प्लेन, 349 मौतें
Last Updated:August 30, 2026, 21:56 IST
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में 1996 के चरखी दादरी के उस विमान हादसे को याद किया है, जिसमें हवा में दो पैसेंजर प्लेन टकरा गए थे. इस हादसे में सभी 349 लोगों की मौत हो गई थी. उन्होंने बताया कि हादसे के बाद आरएसएस स्वयंसेवक राहत कार्य के लिए मौके पर पहुंचे थे. जानिए दुनिया के सबसे भीषण मिड-एयर कोलिजन में शामिल इस हादसे की पूरी कहानी, दोनों विमानों की उड़ान, टक्कर की वजह और कम्युनिकेशन में हुई उस बड़ी गलती के बारे में जिसने सैकड़ों जिंदगियां खत्म कर दीं.आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 30 साल पहले हुए चरखी दादरी प्लेन क्रैश का जिक्र किया है.
नई दिल्ली. यह घटना आज से करीब 30 साल पहले की है. उस रात रोज की तरह हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे तमाम पैसेंजर प्लेन अपने-अपने डेस्टिनेशंस के लिए आगे बढ़ रहे थे. इस बीच, किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनटों बाद आसमान में ऐसा खौफनाक हादसा होने वाला है, जिसे दुनिया के शायद ही कभी भुला पाए. 12 नवंबर 1996 की रात हरियाणा के चरखी दादरी के ऊपर दो पैसेंजर प्लेन हवा में ही आपस में टकरा गए. टक्कर इतनी भयानक थी कि दोनों प्लेन टूटकर जमीन पर आ गिरे. इस एयरक्रैश में 349 लोगों की जान गई थी. दोनों प्लेन में सवार कोई भी शख्स जिंदा नहीं बचा था.
करीब 30 साल बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इस दर्दनाक हादसे को याद किया है. रविवार को न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि हादसे के बाद आरएसएस के वॉलंटियर्स राहत कार्य के लिए मौके पर पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले ज्यादातर यात्री मुस्लिम थे, लेकिन उस वक्त मदद के लिए पहुंचे स्वयंसेवकों के मन में यह सवाल कभी नहीं आया कि पीड़ित किस धर्म या समुदाय से हैं. उन्होंने कहा किहमने उस समय यह नहीं सोचा कि ये मुस्लिम हैं.
भागवत के अनुसार, आरएसएस के स्वयंसेवक ऐसे मौकों पर बिना किसी राजनीतिक फायदे या बदले की उम्मीद के काम करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि संगठन अपने ऐसे राहत कार्यों का ज्यादा प्रचार नहीं करता, क्योंकि मदद के बदले किसी चीज की उम्मीद नहीं रखी जाती है.
उस रात आखिर आसमान में क्या हुआ था?
12 नवंबर 1996 को दो प्लेन दिल्ली के पास एक ही एयरस्पेस में उड़ रहे थे. पहला प्लेन था सऊदी अरेबियन एयरलाइंस का बोइंग 747, जो सऊदी अरब के जेद्दा से दिल्ली आ रहा था. इस प्लेन में कुल 312 लोग सवार थे.
वहीं, दूसरी तरफ कजाखस्तान एयरलाइंस का इल्यूशिन आईएल-76 प्लेन दिल्ली से कजाखस्तान के चिमकेंट के लिए उड़ान भर चुका था. इसमें 37 लोग सवार थे. दोनों विमानों में कुल 349 लोग थे.
दिल्ली से करीब 100 किमी पश्चिम में हरियाणा के चरखी दादरी के ऊपर दोनों प्लेन एक ही एयरस्पेस में पहुंच गए. दअरसल, कजाखस्तान के प्लेन को करीब 15000 फीट की ऊंचाई बनाए रखने का निर्देश दिया गया था.
लेकिन प्लेन तय ऊंचाई से नीचे आने लगा. इसी दौरान दूसरी दिशा से आ रहा सऊदी एयरलाइंस का बोइंग भी उसी एयरस्पेस से गुजर रहा था. जब कजाख प्लेन लगभग 14,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचा, तब दोनों प्लेन एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए. इसके बाद जो हुआ, वह बेहद डरावना था.
अचानक दोनों प्लेन हवा में ही आपस में टकरा गए. टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों प्लेन का कंट्रोल खत्म हो गया. प्लेन के बड़े-बड़े हिस्से हवा में टूटकर अलग हो गए और फिर आग व मलबे के साथ जमीन पर गिरने लगे.
चरखी दादरी और आसपास के इलाके में चारों तरफ तबाही का मंजर था. दोनों विमानों में मौजूद सभी 349 लोगों की मौत हो गई. कोई भी इस हादसे में बच नहीं सका.
हरियाणा के चरखी दादरी में हुए इस हादसे में दोनों विमान में मौजूद सभी 349 लोगों की मौत हो गई थी. (फाइल फोटो)
एक कम्युनिकेशन गैप ने बढ़ा दी थी मुश्किल
हादसे की जांच में सामने आया कि इस दुर्घटना के पीछे सबसे बड़ी वजह कम्युनिकेशन की दिक्कत थी. कजाखस्तान के प्लेन के क्रू को अंग्रेजी भाषा में कम्युनिकेशन करने में परेशानी थी. एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से मिलने वाले कुछ मैसेज सीधे पायलट तक पहुंचने के बजाय एक रेडियो ऑपरेटर के जरिए पहुंच रहे थे. यहीं से ऊंचाई यानी एल्टीट्यूड इंस्ट्रक्शंस को लेकर कन्फ्यूजन पैदा हुआ. जांच में पाया गया कि कजाख प्लेन को जिस ऊंचाई पर बने रहना था, वह उससे नीचे आता चला गया.
दूसरी तरफ सऊदी एयरलाइंस का प्लेन भी उसी एयरस्पेस से गुजर रहा था. दोनों प्लेन के बीच दूरी इतनी कम हो गई कि उन्हें संभलने या रास्ता बदलने का मौका नहीं मिला. और फिर कुछ सेकंड में दो बड़े पैसेंजर प्लेन आसमान में टकरा गए. चरखी दादरी का यह एयरक्रैश सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की एविएशन हिस्ट्री के सबसे दर्दनाक हादसों में दर्ज हो गया. इस घटना ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल, पायलट कम्युनिकेशन और हवा में विमानों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने के सिस्टम पर भी बड़े सवाल खड़े किए.
About the AuthorAnoop Kumar MishraAssistant Editor
Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…
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August 30, 2026, 21:54 IST



