सोने का भाव क्या है? 1.10 या 1.60 लाख रुपये, पार्षद प्रत्याशियों ने बताए अलग-अलग भाव

जयपुर. सोने के भाव किसी से छिपे नहीं हैं. पिछले कुछ दिनों में सोने की कीमतों में जो तेज उछाल आया, उससे आम आदमी के होश उड़ गए थे. अभी भी बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है. लेकिन निकाय चुनाव के शपथ-पत्रों में सोने के भाव को लेकर एक दिलचस्प और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है. जयपुर नगर निगम चुनाव में प्रत्याशियों ने अपने शपथ-पत्रों में सोने (जूलरी) की कीमत 1.10 लाख रुपये प्रति तोला से लेकर 1.60 लाख रुपये प्रति तोला तक अलग-अलग बताई है. इसी आधार पर उन्होंने अपनी चल-अचल संपत्ति की गणना भी की है. भास्कर ने कई प्रत्याशियों के शपथ-पत्रों की जांच की तो यह विसंगति साफ नजर आई.
शपथ-पत्रों में प्रत्याशी न सिर्फ एक-दूसरे से आमने-सामने हैं, बल्कि उनके दस्तावेजों में सोने का भाव भी एक-दूसरे से मुकाबला करता दिख रहा है. किसी ने एक तोला सोने की कीमत 1.10 लाख रुपये दर्ज की, तो किसी ने 1.60 लाख रुपये. कुछ ने 1.40 लाख, 1.44 लाख, 1.47 लाख, 1.50 लाख और 1.55 लाख रुपये प्रति तोला भी लिखा है. प्रत्याशी बदलते ही एक तोले के भाव में 50 हजार रुपये तक का अंतर आ गया है. यह अंतर इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि बाजार में सोने के भाव लगभग एक जैसे होते हैं, लेकिन शपथ-पत्रों में हर प्रत्याशी ने अपना-अपना हिसाब लगा लिया.
भाजपा प्रत्याशियों के शपथ-पत्रों में सोने के भाव में काफी अंतर
दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा प्रत्याशियों के शपथ-पत्रों में सोने के भाव में काफी अंतर है. वार्ड 9 की मंजू अग्रवाल ने 20 तोला सोना दिखाया है, जिसकी कुल कीमत 32 लाख रुपये बताई गई. यानी प्रति तोला 1.60 लाख रुपये. वार्ड 6 की स्नेहलता साबू ने 5 तोला सोना 7 लाख रुपये में दर्ज किया, जो प्रति तोला 1.40 लाख रुपये बैठता है. वार्ड 19 के शाहनवाज ने 2.5 तोला के लिए 3.50 लाख रुपये (1.40 लाख प्रति तोला) लिखा. वार्ड 110 की ज्योति खंडेलवाल ने 45 तोला सोना 65 लाख रुपये में दिखाया, जो प्रति तोला करीब 1.44 लाख रुपये है. वार्ड 21 के अजय सिंह चौहान ने 1.5 तोला के लिए 2 लाख रुपये (1.33 लाख प्रति तोला) और वार्ड 42 के अशोक रावतानी ने 3.5 तोला के लिए 5.14 लाख रुपये (1.47 लाख प्रति तोला) दर्ज किए.
कांग्रेस प्रत्याशियों के द्वारा दिए गए रेट में भी दिखी अंतर
कांग्रेस प्रत्याशियों में भी यही विविधता दिखी. वार्ड 4 की कविता ने 2 तोला सोना 2.20 लाख रुपये में बताया, यानी प्रति तोला सिर्फ 1.10 लाख रुपये. वार्ड 18 की वंदिता शर्मा ने 4 तोला के लिए 6 लाख रुपये (1.50 लाख प्रति तोला) लिखा. वार्ड 110 की सुनीता मेठी ने सबसे ज्यादा 70 तोला सोना 105 लाख रुपये में दिखाया, जो प्रति तोला 1.50 लाख रुपये बैठता है. वार्ड 85 के महेंद्र पाल ने 10 तोला के लिए 16.30 लाख रुपये (1.63 लाख प्रति तोला) दर्ज किए. वार्ड 53 के राजीव चौधरी ने 4.5 तोला के लिए 6 लाख रुपये (1.33 लाख) और वार्ड 60 के रामफूल ने 2.5 तोला के लिए 4 लाख रुपये (1.60 लाख प्रति तोला) बताए.
निर्दलीय प्रत्याशियों के शपथ-पत्रों में भी अलग-अलग भाव
निर्दलीय प्रत्याशियों के शपथ-पत्रों में भी अलग-अलग भाव नजर आए. वार्ड 15 के पंकज गोयल ने आधा तोला सोना 75 हजार रुपये में दिखाया, जो प्रति तोला 1.50 लाख रुपये है. वार्ड 101 के मनोज मुद्गल ने 5 तोला के लिए 7.50 लाख रुपये (1.50 लाख) और वार्ड 54 के राजेंद्र पटेल ने 1.8 तोला के लिए 2.79 लाख रुपये (1.55 लाख प्रति तोला) दर्ज किए.
प्रत्याशियों ने अपने-अपने हिसाब से लिखी सोने की कीमत
दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट के आंकड़ों से साफ है कि प्रत्याशियों ने सोने की कीमत अपने-अपने हिसाब से लिखी है. बाजार में फॉर्म भरने के अंतिम दिन 31 अगस्त के आसपास सोना स्टैंडर्ड करीब 1,59,000 रुपये प्रति तोला और सोना जूलरी करीब 1,45,500 रुपये प्रति तोला के आसपास था. इसके बावजूद शपथ-पत्रों में 1.10 लाख से 1.63 लाख रुपये तक का अंतर देखने को मिला. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संपत्ति की घोषणा में सही बाजार मूल्य दर्ज करना जरूरी होता है, लेकिन व्यवहार में कई बार अनुमान या पुराने भाव लिख दिए जाते हैं.
चुनाव आयोग और मतदाताओं के बन गया दिलचस्प पहलू
यह विसंगति चुनाव आयोग और मतदाताओं दोनों के लिए दिलचस्प है. शपथ-पत्र संपत्ति की पारदर्शिता के लिए भरे जाते हैं, लेकिन जब एक ही शहर में एक ही समय पर सोने के भाव इतने अलग-अलग बताए जाएं तो सवाल उठना स्वाभाविक है. प्रत्याशी न सिर्फ चुनावी मैदान में, बल्कि अपने दस्तावेजों में भी सोने के भाव को लेकर अलग-अलग रास्ते अपना रहे हैं. मतदाता अब इन आंकड़ों को भी ध्यान से देख सकते हैं कि उनके वार्ड के प्रत्याशी ने सोने की कीमत कितनी बताई है और वह बाजार के मौजूदा भाव से कितनी मेल खाती है.



