Duranta Benefits : धूल रोकती हैं पत्तियां, सालभर हरा-भरा…दुरांटा का पौधा इन रोगों भी रामबाण, क्या इसका फल खा सकते हैं?

Last Updated:September 08, 2026, 22:00 IST
Duranta Plant Benefits : खाली पड़ी जमीनों और सड़क किनारे आसानी से मिलने वाले दुरांटा के पौधे को अक्सर सजावटी माना लिया जाता है. लोक चिकित्सा में यह कई समस्याओं में सदियों से उपयोग होता आया है. हालांकि इसके फल विषैले होते हैं. लोकल 18 से गोंडा के वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि यह पौधा कम देखभाल में तेजी से बढ़ता है और पूरे साल हरा-भरा रहता है. इसकी घनी शाखाएं प्राकृतिक हेज का काम करती हैं, इसलिए यह सुंदरता के साथ सुरक्षा भी देता है. इसकी घनी पत्तियां धूल को रोकने में सहायक होती हैं. बरसात और सर्दियों में इस पर बैंगनी या हल्के नीले रंग के फूल खिलते हैं. फूल झड़ने के बाद लंबे गुच्छों में छोटे गोल पीले फल लगते हैं, जो मोतियों की तरह दिखाई देते हैं.
घरों, मंदिरों, पार्कों और सड़कों के किनारे एक ऐसा पौधा आसानी से देखने को मिल जाता है, जिस पर गुच्छों में छोटे-छोटे पीले फल लटकते हैं. इस पौधे का नाम दुरांटा (Duranta erecta) है. अधिकतर लोग इसे केवल सजावटी पौधा मानते हैं, लेकिन आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में इसकी पत्तियों का उपयोग कई सामान्य समस्याओं में किया जाता रहा है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसे किसी बीमारी की प्रमाणित दवा नहीं माना जाना चाहिए.
लोकल 18 से गोंडा के वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि हमारे यहां दुरांटा के पौधे बड़ी संख्या में लगाए गए हैं. लोग इसे अपने घरों की बाउंड्री, बगीचों, विद्यालयों, सरकारी कार्यालयों और मंदिर परिसरों में लगाते हैं. यह कम देखभाल में तेजी से बढ़ता है और पूरे साल हरा-भरा रहता है. इसकी घनी शाखाएं प्राकृतिक हेज का काम करती हैं, इसलिए यह सुंदरता के साथ सुरक्षा भी देता है.
जमुना प्रसाद यादव बताते है कि दुरांटा एक सदाबहार झाड़ीदार पौधा है, जिसकी ऊंचाई 4 से 8 फीट तक हो सकती है. इसकी पत्तियां छोटी, चिकनी और गहरे हरे रंग की होती हैं. बरसात और सर्दियों के मौसम में इस पर बैंगनी या हल्के नीले रंग के फूल खिलते हैं. फूल झड़ने के बाद लंबे गुच्छों में छोटे गोल पीले फल लगते हैं, जो मोतियों की तरह दिखाई देते हैं.
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वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि लोक मान्यताओं के अनुसार दुरांटा की ताजी पत्तियों को पीसकर लेप बनाया जाता है. इस लेप को खुजली, हल्की जलन और छोटे घावों पर लगाया जाता रहा है. माना जाता है कि इससे त्वचा को ठंडक मिलती है और आराम महसूस होता है. लेकिन अगर घाव गहरा हो या संक्रमण हो, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
वैद्य जमुना प्रसाद यादव के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में कुछ लोग इसकी पत्तियों का लेप हल्की सूजन और दर्द वाली जगह पर लगाते हैं. कीट के काटने पर भी इसका घरेलू उपयोग किया जाता है. हालांकि यह केवल पारंपरिक अनुभव है, इसलिए इसे चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं समझना चाहिए.
दुरांटा केवल सुंदरता ही नहीं बढ़ाता, बल्कि हरियाली बढ़ाने में भी मदद करता है. इसकी घनी पत्तियां धूल को रोकने में सहायक होती हैं. यही कारण है कि गोंडा के कई पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर यह पौधा लगाया गया है. इसके फूल तितलियों और मधुमक्खियों को भी आकर्षित करते हैं, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है.
वैद्य जमुना प्रसाद यादव का कहना है कि दुरांटा के औषधीय उपयोग का उल्लेख लोक चिकित्सा में मिलता है, लेकिन इसका सेवन बिना सलाह के नहीं करना चाहिए. इसके पीले फल विषैले माने जाते हैं. इन्हें खाने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और अन्य पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए बच्चों और पालतू जानवरों को इसके फलों से दूर रखना चाहिए.
आयुर्वेद विशेषज्ञ जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि किसी भी पौधे का उपयोग उसकी सही पहचान और उचित मात्रा के साथ ही करना चाहिए. केवल लोक मान्यताओं के आधार पर किसी गंभीर बीमारी का इलाज करना सुरक्षित नहीं है. अगर त्वचा, सूजन या किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या से परेशानी हो, तो योग्य चिकित्सक की सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प है.
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September 08, 2026, 22:00 IST



