Jhunjhunu News: पांडवों के अस्त्र गलने से पड़ा लोहार्गल नाम, जानिए 24 कोसी परिक्रमा की पूरी कहानी

Last Updated:September 05, 2026, 11:47 IST
शेखावाटी के प्रसिद्ध लोहार्गल धाम में आज से 24 कोसी परिक्रमा की शुरुआत होगी. ठाकुरजी की पालकी के पारंपरिक स्वागत के बाद सूर्यकुंड से श्रद्धालु पवित्र पदयात्रा पर निकलेंगे. अरावली की पहाड़ियों के बीच होने वाली इस परिक्रमा में कई प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल हैं. वहीं, 11 सितंबर को मुख्य मेला और शाही स्नान होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है.
शेखावाटी के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल लोहार्गल धाम में शनिवार यानी आज से आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा. आज यहां वर्षों पुरानी परंपरा के तहत यहां 24 कोसी परिक्रमा विधिवत रूप से शुरू होगी. भगवान श्री ठाकुरजी की पालकी की अगवानी के बाद साधु-संत पवित्र सूर्यकुंड से श्रद्धालुओं की पदयात्रा को रवाना करेंगे. परिक्रमा में शामिल होने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का लोहार्गल पहुंचना शुरू हो गया है.
लोहार्गल पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस बार भी 24 कोसी परिक्रमा सबसे बड़ा धार्मिक आकर्षण रहेगी. इससे पहले खंडेला स्थित चारोड़ा धाम से भगवान श्री ठाकुरजी की मुख्य पालकी बाबा घनश्याम दास के सानिध्य में रवाना हुई. श्रद्धालु और साधु-संत पालकी के साथ धार्मिक यात्रा में शामिल हुए. यह पालकी शनिवार को लोहार्गल धाम पहुंचेगी, जहां परंपरागत रूप से उसका स्वागत किया जाएगा. इसके बाद सूर्यकुंड से परिक्रमा की विधिवत शुरुआत होगी.
24 कोसी परिक्रमा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि शेखावाटी की प्राचीन तीर्थ परंपरा और लोक आस्था से जुड़ा बड़ा आयोजन है. लोहार्गल से शुरू होने वाली यह परिक्रमा किरोड़ी, शाकंभरी, नागकुंड, टपकेश्वर, शोभावती और खोरीकुंड सहित कई प्रमुख धार्मिक स्थलों से होकर गुजरती है. अरावली की पहाड़ियों के बीच श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हुए इन पवित्र स्थानों पर पहुंचते हैं. रास्ते में भजन-कीर्तन और धार्मिक जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है.
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लोहार्गल धाम की सबसे चर्चित धार्मिक मान्यता महाभारत काल से जुड़ी हुई है. चारोड़ा धाम के महंत बाबा घनश्याम दास के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव आत्मग्लानि से मुक्ति पाने के लिए विभिन्न तीर्थों की यात्रा कर रहे थे इसी दौरान वे लोहार्गल पहुंचे. मान्यता है कि यहां सूर्यकुंड में स्नान करने के दौरान उनके लोहे के अस्त्र-शस्त्र गल गए. इसी घटना के कारण इस स्थान का नाम लोहार्गल पड़ा और इसे पापों से मुक्ति दिलाने वाला पवित्र तीर्थ माना जाने लगा.
अरावली पर्वतमाला की पहाड़ियों के बीच स्थित लोहार्गल प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का अनोखा मेल है. यह क्षेत्र सात पवित्र जलधाराओं और अनेक प्राचीन तीर्थस्थलों से जुड़ा हुआ माना जाता है. यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु सूर्यकुंड में स्नान करने के साथ आसपास के धार्मिक स्थलों के दर्शन भी करते हैं. मान्यता के अनुसार, इस पवित्र क्षेत्र की परिक्रमा करने और कुंड में स्नान करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और धार्मिक दृष्टि से इसे विशेष फलदायी माना जाता है.
24 कोसी परिक्रमा शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ेगी. इस धार्मिक आयोजन का मुख्य आकर्षण भाद्रपद अमावस्या के दिन होने वाला मेला और सूर्यकुंड का शाही स्नान रहेगा. इस बार मुख्य मेला और शाही स्नान 11 सितंबर को होगा. इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लोहार्गल पहुंचेंगे. सूर्यकुंड में पवित्र स्नान के बाद श्रद्धालु परिक्रमा की धार्मिक परंपरा को पूर्ण करेंगे और भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करने की कामना करेंगे.
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September 05, 2026, 11:47 IST



