राजस्थान में कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर का मेगा प्लान, 39 फूड पार्क और 10 एग्रो क्लस्टर्स बनेंगे, जमीन आवंटित

जयपुर. राजस्थान में कृषि उपज को खेत से सीधे बाजार और निर्यात से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है. मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने अधिकारियों को प्रदेश में प्रस्तावित एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स की फसल और क्षेत्रवार मैपिंग करने के निर्देश दिए हैं. इसके जरिए यह पता लगाया जाएगा कि किस इलाके में कौन सी फसल का उत्पादन ज्यादा है, वहां किस तरह की प्रोसेसिंग यूनिट लग सकती है और उसके लिए देश-विदेश में बाजार की कितनी संभावनाएं हैं. सरकार का उद्देश्य कृषि उपज को केवल कच्चे माल के तौर पर बेचने के बजाय उसकी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग कर किसानों को बेहतर कीमत दिलाना है.
मुख्य सचिव ने शासन सचिवालय में एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स के विकास को लेकर अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ चर्चा की. उन्होंने कहा कि क्लस्टर्स को केवल फसल उत्पादन और प्रसंस्करण तक सीमित नहीं रखा जाए. इनमें छंटाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज, परिवहन, आपूर्ति व्यवस्था, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ने की सुविधाएं भी विकसित की जाएं. इससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के साथ किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा.
39 फूड पार्क प्रस्तावित, 35 जगह जमीन आवंटित
राजस्थान फूड पार्क डेवलपमेंट पॉलिसी-2026 के तहत प्रदेश में 39 फूड पार्क प्रस्तावित किए गए हैं. इनमें से 35 स्थानों पर भूमि आवंटित की जा चुकी है. राज्य में फिलहाल 2 मेगा फूड पार्क, 4 एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स और 6 रीको/स्पाइस पार्क मौजूद हैं. इसके अलावा 1,500 से अधिक एग्रो-प्रोसेसिंग इकाइयां संचालित हैं. प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना यानी पीएमएफएमई के तहत 1,850 से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को भी सहायता दी गई है.
इन 10 फसलों पर रहेगा विशेष फोकस
सरकार 10 प्रमुख कृषि और बागवानी उत्पादों पर आधारित एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स विकसित करने की दिशा में काम कर रही है. इनमें मूंग, सरसों, सोयाबीन, किन्नू, अनार, अमरूद, संतरा, इसबगोल, जीरा और लहसुन शामिल हैं. इन फसलों के प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों और जिलों की मैपिंग की गई है. इससे उत्पादन वाले इलाकों में ही प्रसंस्करण सुविधाएं विकसित कर किसानों को स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध कराने की योजना है.
निवेश और निर्यात को भी बढ़ावा देने के प्लान
अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग शिखर अग्रवाल ने बताया कि बड़े कृषि प्रसंस्करण उद्योगों को राजस्थान में लाने के साथ कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन और निर्यात की संभावनाओं पर भी ध्यान देना जरूरी है. इसके लिए प्रमुख निर्यात योग्य उत्पादों और उनके संभावित बाजारों की पहचान की जाएगी. एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स को फूड पार्क और राज्य की औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन नीतियों से जोड़ा जाएगा. इससे निजी निवेश बढ़ने और राजस्थान के कृषि उत्पादों की देश-विदेश के बाजारों तक पहुंच मजबूत होने की उम्मीद है.
एफपीओ और छोटे उद्योगों को जोड़ने की है तैयारी
मुख्य सचिव ने नाबार्ड को प्रस्तावित क्लस्टर्स की आर्थिक संभावनाओं के साथ किसान उत्पादक संगठनों यानी एफपीओ की मैपिंग करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही स्टार्टअप, छोटे प्रसंस्करण उद्योग और निजी क्षेत्र को भी इस योजना से जोड़ने पर जोर दिया गया है. सरकार की विभिन्न योजनाओं को आपस में जोड़कर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने की योजना है. उद्यानिकी विभाग के अनुसार प्रस्तावित 10 क्लस्टर्स में से 7 राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के क्लस्टर विकास कार्यक्रम के लिए पात्र हैं. अमरूद, अनार और जीरा के तीन क्लस्टर्स के प्रस्ताव तैयार किए जा चुके हैं.
इसबगोल, किन्नू, लहसुन और संतरा के चार क्लस्टर्स को अगले चरण में प्रस्तावित किया जाएगा. वहीं सरसों, सोयाबीन और मूंग के क्लस्टर्स को फूड पार्क, निवेश समझौतों और राज्य सरकार की योजनाओं के जरिए आगे बढ़ाने की तैयारी है. सरकार का फोकस अब कृषि उपज की केवल पैदावार बढ़ाने के बजाय उसके प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, बाजार और निर्यात की पूरी व्यवस्था तैयार करने पर है. इससे किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य मिलने के साथ राजस्थान में कृषि आधारित उद्योगों और रोजगार के नए अवसर भी बढ़ सकते हैं.



