याददाश्त कमजोर होने और फोकस घटने की असली वजह क्या है? जानिए स्ट्रेस हर सेकेंड आपके दिमाग को कैसे बदल रहा है…

Last Updated:September 12, 2026, 10:16 IST
Chronic Stress Effects On Brain : लंबे समय तक रहने वाला तनाव (Chronic Stress) सिर्फ मानसिक थकान नहीं देता, बल्कि दिमाग के सेल्स को भी अंदर से बदल देता है. जानिए कैसे लगातार स्ट्रेस आपकी याददाश्त को कमजोर और फोकस को कम कर रहा है.
Chronic Stress Effects On Brain : भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव यानी स्ट्रेस अब हर दूसरे व्यक्ति की कहानी बन चुका है. सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, ऑफिस के टार्गेट, ट्रैफिक जाम और अनगिनत डेडलाइन के बीच हम लगातार दबाव में जीते हैं. थोड़ी मात्रा में तनाव सेहत के लिए सामान्य है क्योंकि यह शरीर को तुरंत खतरों से निपटने के लिए तैयार करता है, जिसे ‘फाइट-या-फ्लाइट’ रिस्पॉन्स कहा जाता है.(Canva)
कब खतरनाक बन जाता है तनाव? – लेकिन जब यही तनाव कुछ दिनों या हफ्तों तक सीमित न रहकर महीनों तक बना रहता है, तो यह क्रोनिक स्ट्रेस (Chronic Stress) का रूप ले लेता है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (Harvard Medical School) की एक रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक रहने वाला यह मानसिक दबाव न सिर्फ हमें अंदर से थकाता है, बल्कि हमारे शरीर और दिमाग की कार्यप्रणाली को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है.(Canva)
शरीर पर चौतरफा हमला- जब शरीर लंबे समय तक दबाव में रहता है, तो कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन्स का स्तर लगातार बढ़ा रहता है. एड्रेनालाईन दिल की धड़कन तेज करता है, जबकि कोर्टिसोल शरीर को अलर्ट रखता है. हालांकि यह सिस्टम थोड़े समय के लिए मददगार है, लेकिन इनका जरूरत से ज्यादा स्रावित होना मांसपेशियों में जकड़न, सिरदर्द और इम्युनिटी कमजोर होने जैसी समस्याओं को जन्म देता है.(Canva)
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रातों की नींद और स्ट्रेस का दुष्चक्र- तनाव और नींद का सीधा और गहरा संबंध है. हाई कोर्टिसोल लेवल की वजह से रात को समय पर नींद नहीं आती और अगली सुबह अधूरी नींद के साथ उठने पर स्ट्रेस और ज्यादा बढ़ जाता है. यह एक ऐसा खतरनाक चक्र बन जाता है जिससे बाहर निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है और पूरा शरीर थकान महसूस करने लगता है. (Canva)
दिमाग के फैसले लेने की क्षमता पर असर- तनाव का सबसे गहरा और डरावना असर हमारे दिमाग पर पड़ता है. दिमाग के आगे के हिस्से में मौजूद ‘प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स’ (Prefrontal Cortex) हमारे फैसले लेने और सेल्फ-कंट्रोल को संभालता है. क्रोनिक स्ट्रेस के कारण इस हिस्से का आयतन धीरे-धीरे कम होने लगता है, जिससे किसी भी जरूरी काम में फोकस करना बेहद कठिन हो जाता है.(Canva)
डर और याददाश्त कमजोर होना- इसके अलावा, दिमाग का ‘अमिग्डाला’ नामक हिस्सा जो डर और भावनाओं को नियंत्रित करता है, तनाव के कारण अत्यधिक सक्रिय हो जाता है. वहीं, नई चीजें सीखने और यादें सहेजने वाले क्षेत्र यानी ‘हिप्पोकैम्पस’ की कोशिकाएं स्ट्रेस हॉर्मोन्स के कारण क्षतिग्रस्त होने लगती हैं. मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के विशेषज्ञों के मुताबिक, यही वजह है कि लगातार तनाव में रहने वाले लोगों की याददाश्त तेजी से कमजोर होने लगती है. (Canva)
हैप्पी हॉर्मोन्स का गिरता स्तर- हमारे दिमाग में कुछ खास केमिकल्स होते हैं जो हमारे मूड को अच्छा रखते हैं. लंबे समय तक तनाव रहने पर ‘सेरोटोनिन’ (फील-गुड हॉर्मोन) का स्तर गिरने लगता है, जिससे उदासी और चिड़चिड़ापन बढ़ता है. इसके साथ ही, खुशी और प्रेरणा देने वाला ‘डोपामिन’ सिस्टम भी सुस्त पड़ जाता है, जिससे रोजमर्रा के काम भी बोझ लगने लगते हैं और किसी चीज में आनंद नहीं आता.(Canva)
दिमाग के अंदर सूजन और घटती न्यूरोप्लास्टिसिटी- तनाव सिर्फ मानसिक नहीं बल्कि शारीरिक स्तर पर भी दिमाग को नुकसान पहुंचाता है. यह दिमाग के भीतर सूजन (Brain Inflammation) पैदा कर देता है, जिससे न्यूरॉन्स के बीच का आपसी संपर्क कमजोर हो जाता है. साथ ही, दिमाग की नई चीजें सीखने और खुद को ढालने की क्षमता यानी ‘न्यूरोप्लास्टिसिटी’ भी काफी हद तक कम हो जाती है. (Canva)
बचाव और बेहतर जीवन की कुंजी- लगातार तनाव सिर्फ एक मानसिक समस्या नहीं है, बल्कि यह हमारे दिमाग की मूल संरचना को अंदर से बदल रहा है. फोकस की कमी और चीजों को भूलना इस बात का संकेत है कि आपका दिमाग बहुत अधिक दबाव में है. अपने मानसिक स्वास्थ्य को बचाने के लिए यह जरूरी है कि हम समय पर आराम करें, योग-मेडिटेशन अपनाएं और जरूरत पड़ने पर एक्सपर्ट की सलाह लें, ताकि तनाव हमारे जीवन पर हावी न हो सके.(Canva)
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September 12, 2026, 10:16 IST



