400 फ्रूट बैट ने बीकानेर में डाला डेरा, हरियाणा-पंजाब से आते है हर साल, जानें क्यों बदलते हैं ठिकाना

Last Updated:September 12, 2026, 12:42 IST
Fruit Bat Migration: मानसून के बाद बीकानेर में प्रवासी फ्रूट बैट यानी फलाहारी चमगादड़ों ने डेरा डाल लिया है. शहर के टॉय ट्रेन पार्क के पेड़ों पर करीब 400 फ्रूट बैट्स देखी जा रही हैं. दिन में ये पेड़ों की शाखाओं से उल्टी लटकी रहती हैं और शाम होते ही भोजन की तलाश में उड़ान भरती हैं. जूलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. प्रताप सिंह के अनुसार, ये अगस्त के अंतिम दिनों में बीकानेर पहुंचती हैं और दिसंबर तक यहां रहती हैं. ज्यादा ठंड शुरू होने पर ये अपेक्षाकृत गर्म इलाकों की ओर लौट जाती हैं. माना जा रहा है कि इनका संबंध हरियाणा और पंजाब के क्षेत्रों से हो सकता है, हालांकि इनके मूल स्थान और प्रवास मार्ग की वैज्ञानिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. पिछले वर्षों में इनकी संख्या लगातार बढ़ी है. फ्रूट बैट्स फल और फूल खाने के साथ परागण और बीज फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
बीकानेर. मानसून के बाद बीकानेर में इन दिनों बड़ी संख्या में प्रवासी फ्रूट बैट यानी फलाहारी चमगादड़ों ने डेरा डाल रखा है. शहर के टॉय ट्रेन पार्क में लगे पेड़ों पर करीब 400 फ्रूट बैट्स देखी जा रही हैं. दिन के समय ये चमगादड़ पेड़ों की शाखाओं पर उल्टी लटकी रहती हैं, जबकि शाम होते ही भोजन की तलाश में उड़ान भरती हैं. खास बात यह है कि पिछले कई वर्षों से इनकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. जूलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. प्रताप सिंह ने बताया कि बीकानेर में मानसून के बाद अगस्त के अंतिम दिनों से फ्रूट बैट्स का आना शुरू हो जाता है. इसके बाद ये दिसंबर तक शहर में रहती हैं.
रेगिस्तानी क्षेत्र में ज्यादा सर्दी पड़ने के साथ ही इनका यहां से लौटना शुरू हो जाता है. अधिक ठंड इनके अनुकूल नहीं होने के कारण ये सर्दियों के दौरान बीकानेर से अपेक्षाकृत कम ठंडे इलाकों की ओर चली जाती हैं. उन्होंने बताया कि इन फ्रूट बैट्स के मूल स्थान और प्रवास मार्ग को लेकर अभी पूरी तरह आधिकारिक और वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. इस विषय पर विस्तृत अध्ययन किए जाने की आवश्यकता है. हालांकि उपलब्ध जानकारी और इनके व्यवहार के आधार पर माना जा रहा है कि ये चमगादड़ हरियाणा और पंजाब के क्षेत्रों से बीकानेर आती हैं. इन दोनों राज्यों में फ्रूट बैट्स की संख्या काफी अधिक बताई जाती है.
इस वजह से बार-बार बदलना पड़ा ठिकाना
प्रो. सिंह ने बताया कि फ्रूट बैट्स पिछले कई वर्षों से बीकानेर में प्रवास के लिए आ रही हैं. शुरुआत में इनका ठिकाना कलेक्ट्रेट के पास स्थित एक बड़ा पेड़ था. कुछ समय बाद ये सूरसागर के पास एक पेड़ पर रहने लगीं. वहां लोगों की आवाजाही अधिक होने और इनके काफी करीब पहुंचने के कारण चमगादड़ों को बार-बार भगाया जाने लगा. लगातार व्यवधान के कारण उन्होंने अपना ठिकाना बदल लिया और अब टॉय ट्रेन पार्क के पेड़ों पर रहने लगी हैं.
उन्होंने बताया कि चमगादड़ शांत वातावरण में रहना पसंद करती हैं. बार-बार परेशान करने, पेड़ों के आसपास अधिक शोर होने अथवा दूसरी गतिविधियों से व्यवधान पैदा होने पर ये अपनी जगह बदल लेती हैं. वर्तमान में टॉय ट्रेन पार्क के पेड़ों पर करीब 400 फ्रूट बैट्स मौजूद हैं. पिछले वर्षों के आंकड़ों से तुलना की जाए तो हर साल इनकी संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.
एक बार में 40 किलोमीटर तक भर सकती है उड़ान
फ्रूट बैट्स मुख्य रूप से फल और फूल खाती हैं. भोजन की तलाश में ये अपने ठिकाने से काफी दूर तक उड़ान भर सकती हैं. प्रो. प्रताप सिंह के अनुसार, ये चमगादड़ एक बार में लगातार 30 से 40 किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम है. सामान्यतः ये मकानों से करीब तीन से चार फुट अधिक ऊंचाई पर उड़ती दिखाई देती हैं. उन्होंने बताया कि फ्रूट बैट्स पौधों के परागण और बीजों के फैलाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. फल खाते समय इनके माध्यम से बीज एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचते हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से पौधों के विस्तार में मदद मिलती है. बीकानेर में हर साल इनकी बढ़ती संख्या और बदलते प्रवास स्थलों को देखते हुए इनके व्यवहार, मूल स्थान और प्रवास मार्ग पर वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत महसूस की जा रही है.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Bikaner,Rajasthan
First Published :
September 12, 2026, 12:42 IST



