नोएडा का AQI रेड जोन में, गर्भवती महिलाओं को ज्यादा खतरा, भूलकर भी न करना गलती

नोएडा. दिल्ली से सटे नोएडा में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है. शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 350 से 400 के पार पहुंच रहा है, जो रेड जोन की श्रेणी में आता है. दीपावली से पहले ही हवा की गुणवत्ता खराब होने के कारण डॉक्टर ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं. नोएडा की डॉ. मीरा पाठक लोकल 18 से बताती हैं कि प्रदूषित हवा में मौजूद केमिकल प्रदूषक सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर खून में मिल सकते हैं. ये शरीर की कोशिकाओं पर सीधा जहरीला प्रभाव डालने के साथ हार्मोनल संतुलन भी बिगाड़ते हैं. 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग, पांच साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और डायबिटीज, हार्ट डिजीज, अस्थमा या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है.
हर रोज इन चीजों का सेवन जरूरी
डॉ. मीरा पाठक बताती हैं कि प्रदूषण के स्तर को देखते हुए लोगों को अपनी दिनचर्या में बदलाव करना चाहिए. हाई रिस्क ग्रुप के लोग AQI 100 के पार पहुंचने पर बाहरी एक्टिविटीज सीमित कर दें और 200 के पार होने पर बाहर निकलने से बचें. सामान्य लोगों को AQI 200 पार होने पर आउटडोर एक्टिविटी कम करनी चाहिए और 300 के पार होने पर बाहर जाना टालना चाहिए. जरूरी काम से बाहर निकलने पर N95 या अच्छी फिटिंग वाला मास्क इस्तेमाल करें. शरीर को हाइड्रेट रखें और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें. घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल कर सकते हैं. डॉ. मीरा ने स्नेक प्लांट, मनी प्लांट और बॉटल पाम जैसे पौधे लगाने की भी सलाह दी. खानपान में हल्दी वाला दूध, टमाटर, अमरूद, आंवला, संतरा और हरी सब्जियों जैसे एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी खाद्य पदार्थ शामिल करने को कहा. गुड़ का सेवन जरूर करें.
दिवाली पर बाहर की मिठाई खाने से बचें
त्योहारों के दौरान खानपान को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत है. डॉ. मीरा पाठक ने बताया कि दीपावली पर मिठाइयों की मांग बढ़ने से उनमें मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐसे में घर पर बनी मिठाइयां ही खाएं. बाजार से मिठाई खरीदते समय ऐसी दुकान चुनें जहां क्वालिटी वाली हो. प्रदूषण कम करने के लिए सामुदायिक स्तर पर भी प्रयास जरूरी हैं. पटाखे कम से कम जलाएं, क्योंकि ग्रीन पटाखे भी AQI बढ़ाते हैं. घरों के आसपास पानी का छिड़काव करें और कूड़े में आग न लगाएं और न किसी को लगाने दें. अगरबत्ती और धूपबत्ती का इस्तेमाल कम करें. धूम्रपान करने वाले लोग इस दौरान स्मोकिंग कम करें या संभव हो तो पूरी तरह बंद कर दें.
जरा भी लापरवाही पड़ सकती है भारी
गर्भवती महिलाओं के लिए प्रदूषण नुकसानदायक हो सकता है. डॉक्टर के अनुसार, हवा में मौजूद प्रदूषक प्लेसेंटल बैरियर को पार करके गर्भ में पल रहे बच्चे को भी प्रभावित कर सकते हैं. प्रदूषण के कारण गर्भवती महिलाओं को सिरदर्द, ब्रेन फॉग, याददाश्त में परेशानी, चिड़चिड़ापन, नाक बहना, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण हो सकते हैं. ऐसे समय में महिलाओं को नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर भी जांचते रहना चाहिए, क्योंकि प्रदूषित वातावरण में बीपी बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है.
प्रेग्नेंट महिलाएं बाहर न निकलें
डॉ. मीरा बताती हैं कि गर्भावस्था की पहली तिमाही में प्रदूषण के संपर्क में आने से रक्तस्राव और गर्भपात का जोखिम बढ़ सकता है. दूसरी और तीसरी तिमाही में समय से पहले प्रसव होने की आशंका रहती है. प्रदूषण रक्त कोशिकाओं और रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकता है, जिससे गर्भ में पल रहे बच्चे तक पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती. इसका असर बच्चे के विकास पर पड़ता है और गर्भ में उसका विकास संभलकर नहीं हो पाता साथ ही फीटल डिस्ट्रेस का खतरा भी बढ़ सकता है. ऐसे में गर्भवती महिलाओं को AQI बढ़ने पर घर के अंदर रहें, अनावश्यक बाहर निकलने से बचने और किसी भी परेशानी पर डॉक्टर से संपर्क जरूर करें.



