रोडवेज बसों की फायर सेफ्टी का बड़ा रियलिटी चेक! जानिए कितनी बसों में हैं सुरक्षा इंतजाम और कहां मिली कमी

Last Updated:June 24, 2026, 16:06 IST
Roadways Bus Fire Safety: जयपुर में रोडवेज बसों की फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर किए गए रियलिटी चेक में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं. जांच में पाया गया कि अधिकांश रोडवेज बसों में फायर एक्सटिनग्यूशर की व्यवस्था उपलब्ध है, जिससे आपात स्थिति में आग पर शुरुआती स्तर पर काबू पाया जा सकता है. हालांकि कुछ पुरानी और कंडम घोषित बसों में फायर एक्सटिनग्यूशर नहीं लगे होने की बात भी सामने आई है. रोडवेज प्रशासन के अनुसार ड्राइवरों और कंडक्टरों को नियमित रूप से फायर सेफ्टी प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. वहीं नई बसों में आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम भी इंस्टॉल किए गए हैं. परिवहन मंत्री ने रोडवेज की सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है.
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जयपुर. प्रदेश के कोचिंग सेंटर्स में फायर सेफ्टी सिस्टम पर हुए कड़े एक्शन के बाद अब सरकारी महकमों में भी हड़कंप मचा हुआ है. लखनऊ में हुए दर्दनाक कोचिंग हादसे और हाल ही में किशनगढ़ में रोडवेज बस में लगी भीषण आग की घटना के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है. इसी कड़ी में राजस्थान रोडवेज की बसों का ‘रियल्टी चेक’ किया गया, जिसमें सुरक्षा को लेकर कई अहम और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं.
न्यूज़18 की टीम ने जब प्रदेश के सबसे बड़े बस टर्मिनल सिंधी कैंप पहुंचकर ग्राउंड रियल्टी चेक किया, तो स्थिति मिली-जुली नजर आई. जांच में सामने आया कि रोडवेज की सभी नई बसों में फायर एक्सटिनग्यूशर (अग्निशामक यंत्र) अनिवार्य रूप से इंस्टॉल किए गए हैं, जो किसी भी आपातकालीन स्थिति में आग पर काबू पाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. इसके विपरीत, रोडवेज की पुरानी और कंडम हो चुकी बसों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं मिले. इन खटारा बसों में आग से निपटने का कोई उपाय नहीं है, जो यात्रियों के सफर पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है.
परिवहन मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने जताया संतोषइस पूरे मामले पर परिवहन मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विभाग यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और ज्यादातर बसों में फायर सेफ्टी सिस्टम सुचारू रूप से काम कर रहा है. पुरानी बसों में कमियों को स्वीकार करते हुए परिवहन मंत्री ने कहा- ‘जिन पुरानी बसों में फायर सेफ्टी सिस्टम नहीं है, उन्हें जल्द ही रोडवेज के बेड़े से बाहर (कंडम घोषित) कर दिया जाएगा. यात्रियों की जान के साथ कोई समझौता नहीं होगा.’
स्टाफ को दी जा रही है स्पेशल ट्रेनिंगसिंधी कैंप के डिपो मैनेजर राकेश राय ने बताया कि केवल उपकरण लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि उनका सही समय पर इस्तेमाल होना भी जरूरी है. इसके लिए रोडवेज प्रशासन द्वारा ड्राइवरों और कंडक्टरों को समय-समय पर फायर सेफ्टी की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना या शॉर्ट सर्किट के समय वे तुरंत सूझबूझ से आग पर काबू पा सकें.
सुरक्षा उपकरणों की कमी को दूर करना अभी भी बड़ी चुनौतीकई पुरानी और कंडम बसों में अग्निशामक यंत्रों का अभाव पाया गया. रोडवेज प्रशासन का दावा है कि चालक और परिचालकों को नियमित रूप से फायर सेफ्टी, आपदा प्रबंधन और आग बुझाने का प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. परिवहन मंत्री ने भी मौजूदा सुरक्षा व्यवस्थाओं पर संतोष जताया है, हालांकि पुरानी बसों में सुरक्षा उपकरणों की कमी को दूर करना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है. कोचिंग हादसों से सबक लेते हुए रोडवेज का यह रियल्टी चेक समय की मांग है.
About the AuthorJagriti Dubey
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
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