Agriculture: कपास के लिए बेहद खतरनाक है गुलाबी सुंडी, कृषि एक्सपर्ट से जानें पहचान और रोकथाम के तरीके

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कपास के लिए बेहद खतरनाक है गुलाबी सुंडी, जानें पहचान और रोकथाम के उपाय
Last Updated:July 12, 2026, 09:45 IST
Cotton Pink Bollworm Controlling Tips: नागौर में इस बार अच्छी बारिश के चलते 62 हजार हेक्टेयर में कपास की खेती किसान कर रहे हैं. कपास की फसल में लगने वाला गुलाबी सुंडी बेहद खतरनाक रोग है. यह फसल को बूरी तरह से प्रभावित करता है. गुलाबी सुंडी की निगरानी और नियंत्रण के लिए फेरोमैन ट्रैप सबसे प्रभावी और पर्यावरण अनुकूल तकनीक है. बुवाई के 40 से 45 दिन बाद प्रति हेक्टेयर 15 से 20 फेरोमैन ट्रैप लगाए. एक ट्रैप की कीमत लगभग 50 से 60 रुपए होती है, जबकि प्रति बीघा कुल खर्च करीब 200 से 300 रुपए आता है.
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नागौर: इस बार मानसून की अच्छी बारिश के बाद नागौर जिले में किसानों की कपास की फसल शानदार स्थिति में नजर आ रही है, लेकिन बदलते मौसम ने अब नई चिंता खड़ी कर दी है. हवा में बढ़ी नमी और तापमान के उतार-चढ़ाव के बीच कपास की फसल पर गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवॉर्म) का प्रकोप शुरू हो गया है. कृषि विभाग ने विशेष रूप से मेड़ता और डेगाना क्षेत्र को संवेदनशील मानते हुए किसानों को समय रहते फेरोमैन ट्रैप लगाने की सलाह दी है, ताकि फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सके.
जिले में इस वर्ष करीब 62 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है, जो पिछले छह वर्षों के औसत से अधिक है. नागौर में कपास किसानों की प्रमुख नकदी फसल मानी जाती है. पिछले छह वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में औसतन 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती हुई और करीब 88 हजार मीट्रिक टन वार्षिक उत्पादन दर्ज किया गया. ऐसे में यदि गुलाबी सुंडी पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन और किसानों की आय दोनों प्रभावित हो सकती हैं.
70 से 80 प्रतिशत तक फसल को नुकसान
कृषि विभाग अधिकारी नागौर शंकरराम ने बताया कि गुलाबी सुंडी कपास की सबसे खतरनाक कीटों में शामिल है. इसकी मादा पतंगा फूलों और डेंडू (डोडे) पर अंडे देती है. अंडों से निकलने वाली सुंडी सीधे डेंडू के भीतर प्रवेश कर जाती है और अंदर ही अंदर बीज व रेशों को खाकर फसल को खोखला कर देती है. सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बाहर से डेंडू सामान्य दिखाई देता है, इसलिए शुरुआती अवस्था में इसका पता लगाना आसान नहीं होता. समय पर नियंत्रण नहीं होने पर यह कीट 70 से 80 प्रतिशत तक फसल को नुकसान पहुंचा सकती है.
बचाव के लिए ये तरीका अपनाएं किसान
कृषि विभाग अधिकारी के अनुसार गुलाबी सुंडी की निगरानी और नियंत्रण के लिए फेरोमैन ट्रैप सबसे प्रभावी और पर्यावरण अनुकूल तकनीक है. प्लास्टिक के इस विशेष ट्रैप में रासायनिक ल्योर लगाया जाता है, जिसकी गंध से नर पतंगे आकर्षित होकर ट्रैप में फंस जाते हैं. इससे उनका प्रजनन चक्र टूट जाता है और नई सुंडियों की संख्या तेजी से कम होती है. उन्होंने बताया कि बुवाई के 40 से 45 दिन बाद प्रति हेक्टेयर 15 से 20 फेरोमैन ट्रैप लगाए. एक ट्रैप की कीमत लगभग 50 से 60 रुपए होती है, जबकि प्रति बीघा कुल खर्च करीब 200 से 300 रुपए आता है. उनका कहना है कि शुरुआती सतर्कता और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान अपनी कपास की फसल को गुलाबी सुंडी से सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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