Agriculture: खीरे की खेती में नहीं होगा नुकसान! बारिश के मौसम में अपनाएं ये 7 जरूरी ऑर्गेनिक उपाय

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मानसून में खीरे की खेती से कमाना चाहते हैं मुनाफा? पहले जान लें ये जरूरी बातें
Last Updated:July 09, 2026, 07:54 IST
Monsoon Cucumber Cultivation Tips: अगर किसान मानसून में सब्जियों की खेती करना चाहते हैं तो ऑर्गेनिक खीरे की खेती बेहतर कमाई का जरिया बन सकती है. कृषि विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों का कहना है कि सही किस्म का चयन, बीज उपचार, जैविक खाद, मचान तकनीक और जल निकासी की उचित व्यवस्था अच्छी पैदावार की कुंजी है. बारिश में फसल को कीट और फफूंद से बचाने के लिए रासायनिक दवाओं की जगह नीम का तेल, जीवामृत और अन्य जैविक उपाय अपनाने से उत्पादन के साथ गुणवत्ता भी बेहतर रहती है.
मानसून के दौरान अगर आप भी सब्जियों की खेती करने की सोच रहे हैं, तो खीरे की ऑर्गेनिक खेती आपके लिए फायदेमंद हो सकती है. सिरोही जिले में कई किसान मानसून में सब्जियों और खास तौर पर खीरे की खेती करते हैं. प्रगतिशील किसान मोहनलाल डांगी ने बताया कि वह पिछले कुछ वर्षों से खीरे की खेती कर रहे है. खीरे की अच्छी फसल के लिए अच्छे जल निकासी वाली मिट्टी सबसे सही मानी जाती हैं. बारिश में मिट्टी में ज्यादा नमी की वजह से पौधों की जड़ों में सड़न और फंगस लगने का खतरा ज्यादा होता है. ऐसे में बुवाई से पहले खेत को अच्छी तरह तैयार करना और सिंचाई की सही व्यवस्था बहुत जरूरी है.
मानसून के मौसम में ज्यादा बारिश ह्यूमिडिटी और कीटों के प्रकोप को सहन करने में सही किस्म के खीरे का चयन भी जरूरी है. कृषि विज्ञान केंद्रों पर ऐसी विकसित किस्मों की जानकारी लेकर उनके पौधे या बीज प्राप्त किए जा सकते है. कृषि अनुसंधान संस्थान की ओर से विकसित स्वर्ण पूर्णा एक उन्नत किस्म मानी जाती है. इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है. इसके अलावा बाजार में उपलब्ध कई हाईब्रिड किस्में भी अच्छी पैदावार वाली मानी जाती है. बुवाई से पहले बीजों का सही जैविक उपचार जरूरी है.
खेती के दौरान खीरे के पौधों की जड़ों को बारिश में जलभराव से बचाने के लिए मेड़ या उठी हुई क्यारियां बनाना जरूरी है. खेत की दो-तीन बार गहरी जुताई के बाद ढाई से तीन फीट की दूरी पर मजबूत मेड़ तैयार करनी होती है. बारिश में खरपतवार को रोकने के लिए प्लास्टिक के मल्चिंग शीट बिछा कर बीजारोपण करना चाहिए. इससे पौधे के आसपास नमी कंट्रोल होती है और मिट्टी का तापमान भी सही बना रहता है.
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अगर आप नर्सरी में तैयार किए गए स्वस्थ पौधों को रोप थे है, तो मेड़ पर एक से डेढ़ फीट की दूरी पर रोपना चाहिए. बारिश के सीजन में खीरे की खेती के लिए मचान विधि काफी फायदेमंद होती है. बारिश में जमीन गीली रहती है. ऐसे में खीरे की बेलें के जमीन पर फैलने और पानी और मिट्टी लगने से फसल सड़ने का खतरा रहता हैं. ऐसे में बांस से मचान तैयार कर उसके सहार पौधे की बेल को बांधा जाता हैं. जिससे पौधा ऊपर की तरफ़ फैलता है. इससे पौधे पर लगने वाले खीरे को भरपूर धूप और हवा मिलती है.
फसल को खतरनाक कैमिकल युक्त खाद की जगह नेचुरल पोषक तत्व के रूप में ऑर्गेनिक खाद दी जा सकती है. मेड़ बनाते समय खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या केंचुआ खाद अच्छी तरह मिलाने से पौधे को लंबे समय तक पोषण मिलता रहता है. इसके अलावा हर 5-6 दिन में गाय के गोबर, गोमूत्र गुड और मिट्टी से तैयार जीवामृत भी देते रहना चाहिए. इससे पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
बारिश में खीरे की खेती में फ्रूट फ्लाई, रेड पम्पकिन बीटल जैसे कीट और बीमारियों का खतरा बना रहता है. इनसे बचाव के लिए केमिकल वाले कीटनाशक के बजाय नियमति समय में नीम के तेल का छिड़काव करते रहना चाहिए. इसके अलावा लहसुन, तीखी मिर्च, तंबाकू और नीम के पत्तों के अर्क से तैयार अर्क का छिड़काव भी कीटों को फसल से दूर रखता है.



