Agriculture Tips: एक बार पौधे लगाने के बाद सालों तक होगी जबरदस्त कमाई, आंवला की खेती में इन बातों का रखें ध्यान

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एक बार पौधे लगाने पर जबरदस्त कमाई, आंवला की खेती में इन बातों का रखें ध्यान
Last Updated:July 10, 2026, 21:30 IST
Amla Ki Kheti : किसान पारंपरिक फसलों के बजाय आंवला की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं. यह कम रखरखाव, औषधीय गुणों और सालभर बाजार में मांग के कारण लाभदायक है. विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार पौधे लगाने के बाद कई वर्षों तक इससे अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है.आंवला की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या हल्की रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है.
जिले के किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ बागवानी की ओर भी तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं. अच्छी आमदनी और लंबे समय तक नियमित आय देने वाली फसलों में आंवला की खेती किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है. कम रखरखाव, औषधीय गुणों से भरपूर फल और बाजार में सालभर बनी रहने वाली मांग के कारण आंवला की खेती किसानों के लिए लाभदायक विकल्प साबित हो रही है.
विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार पौधे लगाने के बाद कई वर्षों तक इससे अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है.आंवला की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या हल्की रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. खेत में पानी का ठहराव नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे पौधों की जड़ें प्रभावित हो सकती हैं.
एक्सपर्ट के अनुसार आंवला की खेती के लिए पौधरोपण का सबसे अच्छा समय जुलाई से सितंबर तक का माना जाता है, जब पर्याप्त नमी उपलब्ध रहती है. किसान प्रमाणित नर्सरी से उन्नत किस्मों के पौधे ही खरीदें ताकि भविष्य में बेहतर उत्पादन मिल सके.
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पौधों की रोपाई सामान्यत भी 8×8 या 10×10 मीटर की दूरी पर की जाती है. गड्ढे तैयार करते समय उनमें गोबर की सड़ी हुई खाद और आवश्यक उर्वरक मिलाने से पौधों की शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है. शुरुआती वर्षों में समय-समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए. पौधों की नियमित छंटाई करने से शाखाओं का विकास बेहतर होता है और फल उत्पादन भी बढ़ता है.
विशेषज्ञों के अनुसार आंवला के पौधे तीसरे से चौथे वर्ष में फल देना शुरू कर देते हैं, जबकि सातवें से आठवें वर्ष तक पेड़ पूरी उत्पादन क्षमता पर पहुंच जाता है. एक विकसित पेड़ से औसतन 80 से 120 किलोग्राम तक फल प्राप्त हो सकते हैं. आंवला का उपयोग मुरब्बा, कैंडी, अचार, जूस, पाउडर, चूर्ण और आयुर्वेदिक दवाइयों में बड़े पैमाने पर होने के कारण इसकी बाजार में हमेशा मांग बनी रहती है.
यदि लागत की बात करें तो एक हेक्टेयर में आंवला का बाग लगाने पर पौधों, गड्ढों की तैयारी, खाद, सिंचाई और देखभाल सहित शुरुआती वर्षों में लगभग 1.50 से 2.50 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है. हालांकि इसके बाद रखरखाव की लागत अपेक्षाकृत कम रहती है. उत्पादन शुरू होने पर किसान प्रति हेक्टेयर हर वर्ष लगभग 4 से 8 लाख रुपये या इससे अधिक की आय अर्जित कर सकते है.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच अवश्य कराएं, प्रमाणित पौधे लगाएं और समय-समय पर कृषि विभाग या उद्यान विभाग के विशेषज्ञों से तकनीकी सलाह लेते रहें. वैज्ञानिक तरीके से की गई आंवला की खेती किसानों के लिए लंबे समय तक स्थायी और बेहतर आय का मजबूत माध्यम बन सकती है.



