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कभी तालियों की गूंज से गुलजार था उदयपुर का स्वप्न लोक टॉकीज, आज बन गया यादों की विरासत

Last Updated:July 10, 2026, 21:55 IST

Udaipur Swapan Lok Talkies : उदयपुर का ऐतिहासिक स्वप्न लोक टॉकीज, जो 1970 के दशक में शुरू हुआ था, अब मल्टीप्लेक्स के दौर में बंद हो गया है. यह कभी शहर के मनोरंजन का केंद्र था. स्वप्न लोक टॉकीज की सबसे बड़ी पहचान उसका विशाल पोस्टर बोर्ड था, जहां नई फिल्मों के बड़े-बड़े पोस्टर लगाए जाते थे. शहर से गुजरने वाला लगभग हर व्यक्ति इन पोस्टरों पर एक नजर जरूर डालता था.

उदयपुर. झीलों की नगरी उदयपुर अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ फिल्मी दुनिया से भी गहरा जुड़ाव रखता है. शहर में कई चर्चित बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है. देव आनंद की ‘गाइड’ और सुनील दत्त की ‘नीलकमल’ जैसी फिल्मों ने उदयपुर की खूबसूरती को बड़े पर्दे पर दुनिया के सामने पेश किया. वहीं, इस शहर के सिनेमाघरों ने भी सिनेमा प्रेमियों की कई पीढ़ियों की यादों को संजोया है. इन्हीं में से एक था हाथीपोल मार्ग स्थित स्वप्न लोक टॉकीज.

वर्ष 1970 के दशक में शुरू हुआ स्वप्न लोक टॉकीज उस समय उदयपुर के प्रमुख सिनेमाघरों में गिना जाता था. बताया जाता है कि इसके लिए तत्कालीन महाराणा द्वारा भूमि उपलब्ध कराई गई थी. उस दौर में मनोरंजन के साधन सीमित थे, इसलिए नई फिल्म रिलीज होते ही यहां दर्शकों की लंबी कतारें लग जाती थीं. टिकट खिड़की पर घंटों इंतजार करना आम बात थी और हाउसफुल का बोर्ड अक्सर देखने को मिलता था. परिवारों, युवाओं और फिल्म प्रेमियों के लिए यह सिर्फ एक सिनेमाघर नहीं, बल्कि मनोरंजन का प्रमुख केंद्र हुआ करता था.

विशाल पोस्टर बोर्ड था खास पहचानस्वप्न लोक टॉकीज की सबसे बड़ी पहचान उसका विशाल पोस्टर बोर्ड था, जहां नई फिल्मों के बड़े-बड़े पोस्टर लगाए जाते थे. शहर से गुजरने वाला लगभग हर व्यक्ति इन पोस्टरों पर एक नजर जरूर डालता था. फिल्म शुरू होने से पहले और इंटरवल के दौरान परिसर में रहने वाली चहल-पहल उस दौर की खास पहचान मानी जाती थी.

मल्टीप्लेक्स के दौर में थम गया सफरसमय के साथ तकनीक बदली और मल्टीप्लेक्स संस्कृति ने पारंपरिक सिनेमाघरों की जगह लेनी शुरू कर दी. इसका असर स्वप्न लोक टॉकीज पर भी पड़ा. धीरे-धीरे यहां फिल्मों का प्रदर्शन बंद हो गया. बाद के वर्षों में इस परिसर में राजस्थानी लोक संस्कृति और लोक धरोहर से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे, लेकिन यह सिलसिला भी ज्यादा समय तक नहीं चल पाया.

आज भी संजोए हुए है सुनहरे दौर की यादेंआज स्वप्न लोक टॉकीज की इमारत शांत खड़ी है. कभी दर्शकों की तालियों और सीटियों से गूंजने वाला यह परिसर अब बीते दौर की यादों का साक्षी बन चुका है. हालांकि टॉकीज के बाहर लगा पुराना पोस्टर बोर्ड आज भी उस सुनहरे दौर की कहानी बयां करता है, जब नई फिल्म लगने की खबर पूरे शहर में उत्साह का माहौल बना देती थी.

उदयपुर की सिनेमाई विरासत का अहम हिस्साउदयपुर में आज भी बड़े स्तर पर फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग होती है, लेकिन स्वप्न लोक टॉकीज शहर के उस दौर की याद दिलाता है, जब एक फिल्म देखना अपने आप में एक उत्सव माना जाता था. यह इमारत आज भी उदयपुर की सिनेमाई विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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Udaipur,Rajasthan

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