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Al Nino Effect Electricity Alert: तो क्या ठप हो जाएगी बिजली, अल नीनो के खौफ के बीच हरकत में क्यों आया पावर मिनिस्ट्री

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ठप हो जाएगी बिजली? अल नीनो के खौफ के बीच हरकत में क्यों आया पावर मिनिस्ट्री

Last Updated:July 10, 2026, 11:44 IST

Al Nino Effect Electricity Alert: अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने बिजली क्षेत्र की तैयारियां तेज कर दी हैं. पावर मंत्रालय जल्द विस्तृत एडवाइजरी जारी करेगा, इसमें थर्मल पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला, पानी उपलब्धता, ट्रांसमिशन नेटवर्क की सुरक्षा और सोलर एनर्जी के अधिक इस्तेमाल जैसे निर्देश शामिल होंगे. सरकार को आशंका है कि यदि मानसून कमजोर पड़ता है तो हाइड्रो और विंड पावर उत्पादन प्रभावित हो सकता है. ऐसे में बिजली संकट से बचने के लिए पहले से व्यापक तैयारी की जा रही है, ताकि देशभर में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके.

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ठप हो जाएगी बिजली? अल नीनो के खौफ के बीच हरकत में क्यों आया पावर मिनिस्ट्रीZoomअल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए पावर मंत्रालय बिजली संकट रोकने की तैयारी में जुटा है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: मानसून भले ही इस समय देश में किसानों से लेकर आम आदमी को राहत दे रहा है. हालांकि अब मानसून राहत से ज्यादा आफत बन गया है. लेकिन इससे पहले अल नीनो के कारण मानसून ने खूब तरसाया था. यहां तक कि वैज्ञानिकों ने सूखे की भी चेतावनी दे दी थी. लेकिन अब मौसम वैज्ञानिकों की नजर अब एक ऐसे खतरे पर टिकी है जो आने वाले महीनों में बिजली व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा बन सकता है. यह खतरा है अल नीनो (El Niño) का. अगर अल नीनो का असर बढ़ता है और बारिश सामान्य से कम होती है, तो सबसे पहले असर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स पर पड़ेगा. नदियों और बांधों में पानी कम होगा तो हाइड्रो पावर उत्पादन घटेगा. दूसरी ओर तेज हवाओं में कमी आने पर विंड एनर्जी भी प्रभावित हो सकती है. ऐसे हालात में देश की बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ना तय माना जा रहा है. यही वजह है कि केंद्र सरकार ने संभावित संकट का इंतजार करने के बजाय पहले से तैयारी शुरू कर दी है. पावर मंत्रालय ने सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समीक्षा बैठक कर साफ संकेत दे दिया है कि बिजली आपूर्ति किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होने दी जाएगी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बिजली केवल घरों की जरूरत नहीं है. उद्योग, खेती, अस्पताल, रेलवे और डिजिटल अर्थव्यवस्था भी इसी पर निर्भर है. इसलिए मौसम में बदलाव अब सिर्फ मौसम विभाग की चिंता नहीं रह गया, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है. प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की समीक्षा बैठक के बाद अब बिजली मंत्रालय एक विस्तृत एडवाइजरी जारी करने की तैयारी में है. इसमें राज्यों, बिजली कंपनियों, ट्रांसमिशन एजेंसियों और थर्मल पावर प्लांट्स के लिए कई अहम निर्देश शामिल होंगे, ताकि अगर अल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ता है तो भी देश में बिजली संकट पैदा न हो.

नदियों और बांधों में पानी कम होगा तो हाइड्रो पावर उत्पादन घटेगा. (फाइल फोटो PTI)

यदि बारिश सामान्य से कम होती है तो सबसे अधिक जिम्मेदारी कोयला आधारित बिजलीघरों पर आ जाएगी. इसलिए मंत्रालय थर्मल पावर प्लांट्स को पर्याप्त कोयला भंडारण बनाए रखने और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश देने की तैयारी कर रहा है. राज्य सरकारों से भी जरूरत पड़ने पर जल उपलब्ध कराने में सहयोग मांगा जा सकता है. इसके अलावा सभी बिजलीघरों को समय रहते मशीनों की मेंटेनेंस पूरी करने को कहा जाएगा ताकि मांग बढ़ने पर तकनीकी खराबी के कारण उत्पादन प्रभावित न हो.

सरकार केवल बिजली उत्पादन पर ही नहीं बल्कि ट्रांसमिशन सिस्टम पर भी फोकस कर रही है. एडवाइजरी में उन ट्रांसमिशन लाइनों, ट्रांसफॉर्मरों और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों की पहचान करने को कहा जाएगा, जिन पर अधिक लोड पड़ सकता है. इन संवेदनशील नेटवर्क की पहले से मरम्मत और निगरानी करने से बड़े पैमाने पर बिजली बाधित होने की आशंका कम होगी.

About the AuthorSumit KumarSenior Sub Editor

सुमित कुमार हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें

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यदि बारिश सामान्य से कम होती है तो सबसे अधिक जिम्मेदारी कोयला आधारित बिजलीघरों पर आ जाएगी. इसलिए मंत्रालय थर्मल पावर प्लांट्स को पर्याप्त कोयला भंडारण बनाए रखने और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश देने की तैयारी कर रहा है. राज्य सरकारों से भी जरूरत पड़ने पर जल उपलब्ध कराने में सहयोग मांगा जा सकता है. इसके अलावा सभी बिजलीघरों को समय रहते मशीनों की मेंटेनेंस पूरी करने को कहा जाएगा ताकि मांग बढ़ने पर तकनीकी खराबी के कारण उत्पादन प्रभावित न हो.

सरकार केवल बिजली उत्पादन पर ही नहीं बल्कि ट्रांसमिशन सिस्टम पर भी फोकस कर रही है. एडवाइजरी में उन ट्रांसमिशन लाइनों, ट्रांसफॉर्मरों और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों की पहचान करने को कहा जाएगा, जिन पर अधिक लोड पड़ सकता है. इन संवेदनशील नेटवर्क की पहले से मरम्मत और निगरानी करने से बड़े पैमाने पर बिजली बाधित होने की आशंका कम होगी.

मंत्रालय राज्यों को कृषि क्षेत्र की बिजली मांग को दिन के समय शिफ्ट करने की सलाह भी दे सकता है. इसका उद्देश्य दिन में उपलब्ध सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करना है. अगर खेत में पानी के लिए लगा पंप दिन के समय चलेंगे तो सोलर पावर का बेहतर इस्तेमाल होगा और शाम के समय बिजली ग्रिड पर दबाव कम रहेगा. इससे कोयले पर निर्भरता भी कुछ हद तक घटाई जा सकेगी.

एक्सपर्ट की चिंता इस बात को लेकर है कि यदि अल नीनो के कारण मानसून कमजोर रहता है तो सबसे पहले हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स का उत्पादन घटेगा. बांधों में जलस्तर कम होने से बिजली उत्पादन प्रभावित होगा. इसके साथ ही हवा की गति में कमी आने से विंड एनर्जी उत्पादन भी घट सकता है. ऐसे में देश की बिजली जरूरत पूरी करने के लिए कोयला आधारित बिजलीघरों पर अतिरिक्त निर्भरता बढ़ सकती है.

क्या अल नीनो आने का मतलब देश में निश्चित रूप से बिजली संकट होगा?

नहीं. अल नीनो का मतलब यह नहीं कि बिजली संकट तय है. इसका अर्थ केवल इतना है कि सामान्य से कम बारिश और मौसम में असामान्य बदलाव की संभावना बढ़ जाती है. यदि समय रहते कोयला भंडारण, जल प्रबंधन, ट्रांसमिशन नेटवर्क और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तैयारी पूरी कर ली जाए तो बिजली आपूर्ति सामान्य रखी जा सकती है. इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार पहले से तैयारी कर रही है.

सरकार किन उपायों से बिजली कटौती रोकना चाहती है?

सरकार थर्मल पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला स्टॉक, जल उपलब्धता, मशीनों की समय पर मरम्मत, संवेदनशील ट्रांसमिशन नेटवर्क की निगरानी और सोलर ऊर्जा के अधिक उपयोग पर जोर दे रही है. राज्यों को भी बिजली मांग का बेहतर प्रबंधन करने की सलाह दी जाएगी ताकि किसी भी स्थिति में बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट जैसी नौबत न आए.

आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ सकता है?

यदि मौसम सामान्य रहता है तो आम लोगों को किसी अतिरिक्त परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. लेकिन यदि बारिश में भारी कमी आती है और बिजली उत्पादन प्रभावित होता है, तो उद्योगों, कृषि और बड़े शहरों में बिजली की मांग बढ़ सकती है. ऐसे समय सरकार की पहले से की गई तैयारी ही तय करेगी कि बिजली आपूर्ति कितनी सुचारु बनी रहती है. फिलहाल सरकार का फोकस यही है कि उपभोक्ताओं पर न्यूनतम असर पड़े.

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