Rajasthan

Alwar Expressway Accident | 3-year-old girl survives in Alwar accident |

Last Updated:April 16, 2026, 06:05 IST

Alwar News: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बस और ट्रक की भिड़ंत में ड्राइवर मोनू, उनकी पत्नी और 8 साल की बेटी की मौत हो गई, जबकि उनकी 3 साल की बेटी रिद्धी चमत्कारिक रूप से बच गई. उज्जैन से दर्शन कर लौट रहा यह परिवार केबिन में बैठा था. अनाथ हुई मासूम बच्ची दिनभर राजगढ़ थाने में अपनी मां को पुकारती रही, जिसे एसएचओ राजेश मीणा ने पिता की तरह संभाला. शाम को पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने बच्ची को उसके दादा के सुपुर्द कर दिया.

ख़बरें फटाफट

अलवर. राजस्थान के अलवर जिले से होकर गुजर रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने हर किसी का कलेजा चीर कर रख दिया. सुबह करीब 4:50 बजे एक तेज रफ्तार बस आगे चल रहे केमिकल से भरे ट्रक से जा टकराई. यह टक्कर इतनी भीषण थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया और बस हाईवे के सुरक्षा एंगल में जा घुसी. इस दुर्घटना में बस चला रहे ड्राइवर मोनू, उनकी पत्नी रीना और उनकी 8 साल की बड़ी बेटी की मौके पर ही मौत हो गई. हादसे के वक्त बस में चीख-पुकार मच गई और करीब 30 से अधिक यात्री घायल हो गए, लेकिन इस पूरी त्रासदी के बीच 3 साल की मासूम रिद्धी चमत्कारिक रूप से अकेली बच गई.

मृतक बस चालक मोनू अपने पूरे परिवार को उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन कराने ले गए थे. दर्शन के बाद लौटते समय उन्होंने अपनी पत्नी और दोनों बेटियों को सुरक्षा के लिहाज से बस के केबिन में ही अपने पास बैठा रखा था. सफर के दौरान केबिन का गेट गलती से खुला रह गया था, जो हादसे के वक्त रिद्धी के लिए जीवनदान साबित हुआ. जैसे ही टक्कर हुई, केबिन में बैठे मोनू, रीना और उनकी बड़ी बेटी बुरी तरह फंस गए और उनकी जान चली गई, जबकि छोटी बेटी रिद्धी उछलकर बस की गैलरी में जा गिरी. गैलरी में गिरने की वजह से उसे गंभीर चोटें नहीं आईं, लेकिन जब पुलिस मौके पर पहुँची, तो वह खून से लथपथ माहौल के बीच अपनी मां को जोर-जोर से पुकार रही थी.

थाने में मासूम की सिसकियां और पुलिस का मानवीय चेहराहादसे के बाद राजगढ़ एसएचओ राजेश मीणा और उनकी टीम ने घायलों को संभाला. शुरुआत में किसी भी यात्री ने बच्ची को अपना नहीं बताया, लेकिन बाद में शिनाख्त होने पर पता चला कि केबिन में मृत पड़े लोग ही बच्ची के माता-पिता और बहन थे. राजगढ़ एसएचओ मासूम रिद्धी को थाने लेकर आए, जहाँ वह लगातार “मम्मी-मम्मी” चिल्लाती रही. जब उसे भूख लगी, तो उसने बिस्किट मांगे, लेकिन आधा बिस्किट खाते ही उसे फिर अपनी मां की याद आ गई और वह रोते हुए कहने लगी कि “बिस्किट नहीं खाना, मुझे मम्मी चाहिए”. इस दृश्य ने थाने में मौजूद हर कठोर दिल पुलिसकर्मी की आंखों को नम कर दिया.

एसएचओ ने पिता बनकर संभाला, दादा को सौंपी मासूमपुलिस ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए बच्ची को थाने के माहौल से दूर रखा. एसएचओ राजेश मीणा उसे अपने क्वार्टर पर ले गए और उसे सुलाने की कोशिश की. एक महिला कांस्टेबल को खास तौर पर उसकी देखभाल के लिए लगाया गया. जब बच्ची सोकर उठी, तो उसने फिर से अपनी मां की रट लगा ली. पुलिस ने वीडियो कॉल के जरिए उसके मामा और दादा से बात करवाई, जिसे देखकर वह और भी ज्यादा बिलखने लगी. शाम को जब मासूम के दादा अलवर पहुँचे, तो पुलिस ने पोस्टमार्टम की कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद तीनों शवों के साथ रिद्धी को उन्हें सौंप दिया. दादा भारी मन से अपनी मासूम पोती को लेकर रवाना हुए, जिसके सिर से अब हमेशा के लिए माता-पिता का साया उठ चुका है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें

न्यूजलेटर

अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज

खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में

सबमिट करें

Location :

Alwar,Alwar,Rajasthan

First Published :

April 16, 2026, 05:52 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj