बीजेपी ने 113 सीटों को संगठनात्मक रूप से माना कमजोर, मजबूत करने की कवायद की शुरू

Rajasthan Panchayat Elections : राजस्थान में पंचायत निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है. इसके साथ ही राजस्थान भाजपा ने पंचायत और निकाय चुनाव के साथ आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है. पिछले दिनों भाजपा प्रदेश मुख्यालय में विधानसभा प्रवासी कार्यकर्ताओं की अहम बैठक हुई. बैठक में संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने, जनसंपर्क अभियान, आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों और चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई. प्रशिक्षण के बाद इन कार्यकर्ताओं को संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में भेज दिया गया.
पार्टी का मानना है कि पंचायत और निकाय चुनाव केवल स्थानीय निकायों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों और विधानसभा चुनाव की नींव भी इन्हीं चुनावों से तैयार होती है. ऐसे में कमजोर क्षेत्रों में संगठन को सक्रिय करना भाजपा की प्राथमिकता बन गया है. पार्टी के आंतरिक सर्वे के अनुसार 200 विधानसभा सीटों में से लगभग 113 विधानसभा सीटें ऐसी है जहां पर पार्टी अन्य स्थानों की अपेक्षा कमजोर स्थिति में मान रही है.
प्रवासी अपनी रिपोर्ट सीधे प्रदेश पार्टी नेतृत्व को देंगेऐसे में सत्ता और संगठन की जमीनी स्तर पर नब्ज टटोल कर ये प्रवासी अपनी रिपोर्ट सीधे प्रदेश पार्टी नेतृत्व तक पहुंचने का काम करेंगे. प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की संगठनात्मक स्थिति, बूथों की सक्रियता, कार्यकर्ताओं की भागीदारी और चुनावी माहौल का नियमित मूल्यांकन भी इन्ही प्रवासियों की जिम्मे है. पंचायत-निकाय चुनाव में बड़ी जीत की रणनीति के साथ काम कर रही पार्टी इन्ही विधानसभा प्रवासियों के फीडबैक को आधार मान कर आगे की चुनावी रणनीति तय करेगी.
सर्वे में इन जिलों में पार्टी को कमजोर माना गया है
सर्वे में सीकर, झुंझुनूं, दौसा, टोंक और सीएम भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर को कमजोर जोन के रूप में चिन्हित किया गया है. इसके अलावा कई ऐसे जिले भी हैं जहां कुछ विधानसभा क्षेत्रों को छोड़कर बाकी सीटों पर पार्टी को अपनी स्थिति कमजोर नजर आ रही है. इसमें बीकानेर शहर की दो विधानसभा सीटों को छोड़कर पूरा जिला और उदयपुर शहर की एक सीट को छोड़कर पूरा जिला कमजोर माना गया है. इनके अलावा अलवर उत्तर और अलवर दक्षिण को छोड़कर पूरा अलवर जिला, नागौर की दो शहरी सीटों को छोड़कर पूरा जिला और भीलवाड़ा की सहाड़ा विधानसभा सीट को छोड़कर बाकी सभी विधानसभा भी पार्टी के कमजोर क्षेत्रों की सूची में शामिल बताए जा रहे हैं.
विधानसभा प्रवासी के रूप में नेताओं को सक्रिय कर दियाभाजपा के आंतरिक सर्वे में सामने आए इस आकलन के बाद पार्टी ने इन कमजोर मानी जा रही विधानसभा सीटों पर संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है. पार्टी ने इन सभी सीटों पर करीब छह महीने पहले ही विधानसभा प्रवासी के रूप में नेताओं को सक्रिय कर दिया ताकि जमीनी स्थिति का आकलन कर संगठन की कमियों को दूर किया जा सके. विधानसभा प्रवासी अपनी अपनी विधानसभा क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों, स्थानीय राजनीतिक समीकरणों, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनता के बीच पार्टी की स्थिति का फीडबैक जुटा रहे हैं. इसके आधार पर संबंधित विधानसभा क्षेत्रों की रिपोर्ट पार्टी मुख्यालय को उपलब्ध कराई जा रही है.
विधानसभा क्षेत्र में बड़ी अहम भूमिका होती है प्रवासी कीभाजपा के संगठनात्मक ढांचे में विधानसभा प्रवासी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. प्रदेश महामंत्री कैलाश मेघवाल बताते हैं कि विधानसभा प्रवासी संबंधित विधानसभा क्षेत्र के स्थायी निवासी नहीं होते, बल्कि संगठन की ओर से उन्हें विशेष जिम्मेदारी देकर वहां भेजा जाता है. उनका काम स्थानीय संगठन और प्रदेश नेतृत्व के बीच समन्वय स्थापित करना होता है. इसके साथ ही बूथ समितियों की सक्रियता की समीक्षा करना, मंडल तथा शक्ति केंद्रों की बैठकें कराना और संगठनात्मक कमियों की पहचान कर उनकी रिपोर्ट तैयार करना होता है. इसके अलावा प्रवासी कार्यकर्ता स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ नियमित संवाद करते हैं. जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के बीच तालमेल बनाए रखते हैं. इसके साथ सरकार की योजनाओं और पार्टी की नीतियों को आम जनता तक पहुंचाने का भी काम करते हैं.
भाजपा का पूरा कमजोर क्षेत्रों में पार्टी का जनाधार बढ़ाने पर हैपंचायत और निकाय चुनावों को भाजपा केवल स्थानीय सत्ता तक सीमित नहीं मान रही है, बल्कि इन्हें भविष्य की बड़ी चुनावी रणनीति का आधार बनाया जा रहा है. पार्टी का पूरा फोकस संगठनात्मक मजबूती, बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और कमजोर क्षेत्रों में भाजपा का जनाधार बढ़ाने पर है. चुनाव के दौरान विधानसभा प्रवासियों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर हर विधानसभा क्षेत्र का विस्तृत आकलन किया जाएगा. इन्हीं फीडबैक के जरिए यह तय होगा कि किन क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने, नए नेतृत्व को अवसर देने और किन मुद्दों पर अधिक काम करने की जरूरत है. पंचायत और निकाय चुनावों से प्राप्त यह राजनीतिक फीडबैक आगामी 2028 विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का रोडमैप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.



